बैठे ठाले: विकसित रामगढ़

“मौसी और सूरमा भोपाली बाकी गांव वालों के साथ वोटर लिस्ट में अपना नाम-पता ठीक करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं”
बैठे ठाले: विकसित रामगढ़
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रामगढ़ में गोल्डन जुबली महोत्सव का माहौल सेट था। आरडीए यानी रामगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस उत्सव की तैयारी के मद्देनजर शहर की हर गली, नुक्कड़, सड़क, फुटपाथ को खोद दिया था। एक ओर जेसीबी की “धड़-धड़-धड़” और दूसरी ओर ट्रैफिक की “चीं-चीं-पों -पों।” कूड़ेदान का कूड़ा सड़क के बीच तक आ गया था जहां सैकड़ों आवारा पशु आराम से प्लास्टिक चर रहे थे।

राजू गाइड देश-विदेश से आए पर्यटकों को ऐतिहासिक रामगढ़ गोल्डन जुबली महोत्सव की सैर करवा रहा था।

अचानक एक आवाज आई, “क्यों रे सांभा! सरकार ने इस पहाड़ी को तोड़ने के लिए कितने का ठेका दिया है?”

ऊंची पहाड़ी पर जेसीबी चलाते हुए व्यक्ति ने निस्पृह भाव से कहा, “सरदार पूरे पचास हजार करोड़!”

गाइड बोला, “पर्यटकों! अभी आपने गब्बर सेठ और जीएमके यानी गब्बर माइनिंग कंपनी के सीईओ के बीच हुई वार्ता को सुना। कभी यहां पहाड़ियां होती थीं पर अपने अथक परिश्रम से गब्बर सेठ ने इन पहाड़ियों में खदान विकास करने की योजना बनाई है। गब्बर जी कभी दुर्दांत दस्यु हुआ करते थे पर दस्यु करियर में खास ग्रोथ की गुंजाइश नहीं बची, सो वह कारपोरेट सेक्टर में आ गए हैं। यहां की सारी सड़कें, जमीन, कारखाने, बिजलीघर, बांध, इंफ्रास्ट्रक्चर, खदान सब गब्बर सेठ की ही हैं। पहले रामगढ़ में एक कच्ची सड़क हुआ करती थी जिस पर केवल इक्के चल सकते थे। अब गब्बर सेठ यहां छह लेन का वर्ल्ड क्लास हाइवे बना रहे हैं!”

गाइड की बात को काटते हुए एक पर्यटक ने पूछा, “यहाँ पर एक आम का बागीचा हुआ करता था वह कहाँ गया? रामगढ़ के बाकी निवासी भी कहीं दिख नहीं रहे हैं। वह सब कहां गए?”

गाइड बोला, “गब्बर सेठ को बिजलीघर बनाने के लिए आम का बागीचा बहुत पसंद आया था सो उन्होंने सारे पेड़ों को काट डाला। केवल बिजलीघर नहीं हाइवे, खदान इत्यादि बनाने के लिए गब्बर सेठ को ढेर सारी जमीन चाहिए थी, सो उन्होंने स्वेच्छा से लोगों की उनकी जमीनें हथिया लीं और लोग प्रवासी मजदूर बन गए। कुछ विकास विरोधी लोगों ने विरोध किया था। उन लोगों को अंग्रेजों के जमाने के कॉलोनियल कानूनों में फंसाकर अंग्रेजों के जमाने की जेलों में भेज दिया जहां वह आजकल सुखी जिंदगी जी रहे हैं।”

किसी ने पूछा, “बसंती और रामगढ़ के बाकी लोगों का क्या हुआ?

किसी और ने पूछा, “रहीम चाचा, मौसी और सूरमा भोपाली कहां हैं आजकल?”

गाइड ने कहा, “लोगों के घरों पर रामगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी का बुलडोजर चल गया। बसंती का इक्का जब्त हो गया क्योंकि उसके पास इक्का चलाने का लाइसेंस नहीं था। लगता है आपने मंटो को नहीं पढ़ा। मौसी और सूरमा भोपाली लोग वोटर लिस्ट में अपना नाम-पता ठीक करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। रहीम चाचा को घुसपैठिया बताकर बांग्ला-देश भेज दिया गया है।”

एक विदेशी पर्यटक ने कहा, “जय और वीरू ने उनकी कोई मदद नहीं की?”

गाइड बोला, “जय और बीरू गब्बर जी के पार्टनर बन गए हैं।”

अचानक एक पर्यटक ने पूछा, “यहां पानी की टंकी हुआ करती थी जिसके ऊपर दीवाना वीरू चढ़ गया था, वह नहीं दिख रही है!”

गाइड ने कहा, “कुछ उपद्रवी लोगों ने टंकी को पानी से भर दिया जिससे वह खुद ही भरभरा कर गिर गई! कोई पानी की टंकी में पानी भरता है क्या?”

एक पर्यटक ने पूछा, “जब यह सब हो रहा था ठाकुर साहब क्या कर रहे थे?”

गाइड बोला, “गब्बर सेठ ने बरसों पहले कानून का हाथ काट दिया था!”

पर्यटकों में से आवाज आई, “ऐसे कैसे पानी की टंकी पानी भरने पर गिर जाती है? लोगों के घरों पर बुलडोजर चल जाता है? उनकी जमीनें छीन ली जाती हैं? पहाड़ियों को खोद डाला जाता है? क्यों लोग कुछ नहीं कहते?”

“क्योंकि 2047 तक हमें विकसित रामगढ़ को बनाना है” कहते हुए गाइड आगे बढ़ गया।

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