दुर्भाग्य से, खेल के नियमों की मूलभूत समझ के साथ, इस फैसले में काले के खिलाफ सफेद खड़ा करने का पुराना दृष्टिकोण हावी रहा, और वास्तव में यह हम लोग हैं जो हारे हैं। जब पहाड़ों को कीचड़ में बदल दिया जाता है, और एक अस्थिर हिमालय को चरम मौसम की आपदाओं के लिए और अधिक संवेदनशील बना दिया जाता है, तो वर्तमान या भविष्य के लिए क्या स्थिरता, हम विकास के रास्ते में किस ‘पूर्ण क्षमता’ की बात कर रहे हैं ? आखिरकार हमारे देश की सुरक्षा ये गरजती, आर्शीवाद देती पहाड़ों की चोटियां ही तो हैं। इसकी जलवायु, इसका पानी, इसकी खूबसूरती, इसकी संपत्ति, इसका खाना, इसकी हवा ये बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह कहने में कोई अतिरंजना नहीं होगी कि जब हिमालय इस संघर्ष में हारा है, तो केवल सुरक्षा की तैयारियां नहीं हारी हैं, वास्तव में भारत हारा है।