जलवायु बचाने से बचेगी जिंदगी, अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा 9.3 लाख करोड़ डॉलर का फायदा: डब्ल्यूएचओ

छह आसान और आजमाए हुए उपायों से हर साल 16 लाख मौतें रोकी जा सकती हैं। गर्मी से बचाव, साफ पानी, स्वच्छता और स्वच्छ ईंधन पर निवेश से सेहत और सरकारी खजाने, दोनों को होगा फायदा।
डब्ल्यूएचओ का दावा: छह उपायों से सालाना 16.7 अरब टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा।
डब्ल्यूएचओ का दावा: छह उपायों से सालाना 16.7 अरब टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा।प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट: छह जलवायु उपायों से हर साल 16 लाख मौतें रोकी जा सकती हैं, अर्थव्यवस्था को खरबों डॉलर का फायदा।

  • जलवायु सुरक्षा बनेगी आर्थिक ताकत: हर साल 3.9 लाख करोड़ डॉलर का आर्थिक लाभ और 5.4 लाख करोड़ डॉलर का राजस्व संभव।

  • गर्मी से बचाव की चेतावनी प्रणाली सबसे कारगर, हर एक डॉलर के निवेश पर 835 डॉलर तक लाभ मिलने का अनुमान।

  • स्वच्छ ईंधन और सही जीवाश्म ईंधन कर नीति से हर साल 12 लाख मौतें रोकने और प्रदूषण घटाने की उम्मीद।

  • डब्ल्यूएचओ का दावा: छह उपायों से सालाना 16.7 अरब टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा।

जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ मौसम का मिजाज नहीं बिगाड़ रहा, बल्कि इंसानों की जिंदगी पर भी भारी पड़ रहा है। कहीं जानलेवा गर्मी है, कहीं पीने के पानी का संकट, तो कहीं प्रदूषण लोगों की सांसें छीन रहा है। लेकिन इस संकट के बीच एक अच्छी खबर भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक नई रिपोर्ट बताती है कि कुछ आजमाए हुए उपायों को दुनिया भर में लागू कर दिया जाए, तो हर साल करीब 16 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है। इतना ही नहीं, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल खरबों डॉलर का फायदा भी हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, छह जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी उपायों पर बड़े पैमाने पर काम करने से हर साल 3.9 लाख करोड़ डॉलर का आर्थिक कल्याण लाभ और 5.4 लाख करोड़ डॉलर का राजकोषीय लाभ मिल सकता है। यानी कुल संभावित सालाना फायदा 9.3 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।

छह कदम, लाखों जिंदगियों की सुरक्षा

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में जिन छह उपायों पर जोर दिया गया है, उनमें सबसे पहला है गर्मी से बचाव के लिए समय रहते चेतावनी देने वाली व्यवस्था। बढ़ते तापमान के दौर में हीट अलर्ट लोगों को सावधान कर सकते हैं और अस्पतालों पर पड़ने वाला दबाव घटा सकते हैं।

दूसरा बड़ा कदम है जलवायु के झटकों को झेलने में सक्षम पेयजल व्यवस्था। बाढ़, सूखा और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के बीच भी लोगों तक साफ पानी पहुंचना जरूरी है। तीसरा उपाय बुनियादी स्वच्छता सेवाओं का विस्तार है, ताकि गंदगी और दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों पर लगाम लगाई जा सके।

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चौथा कदम है हर घर तक हाथ धोने और साफ-सफाई की सुविधाएं पहुंचाना। पांचवां है खाना पकाने और घर गर्म रखने के लिए स्वच्छ ईंधन और तकनीक को बढ़ावा देना। छठा उपाय जीवाश्म ईंधन की कीमतों को सही ढंग से तय करना है। इसमें बेअसर सब्सिडी हटाना और उचित कर लगाना शामिल है।

एक रुपये के निवेश पर 24 रुपये का फायदा

इस रिपोर्ट की सबसे दिलचस्प बात इसका आर्थिक आकलन है। पांच उपायों पर खर्च किए गए हर एक डॉलर से औसतन 24 डॉलर का लाभ मिलने का अनुमान है। यानी स्वास्थ्य की सुरक्षा पर किया गया खर्च बोझ नहीं, बल्कि भविष्य के लिए निवेश साबित हो सकता है।

गर्मी से बचाव के लिए चेतावनी प्रणाली इस मामले में खास तौर पर प्रभावी मानी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें लगाए गए हर एक डॉलर के बदले 835 डॉलर तक का लाभ मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि मौजूदा मौसम और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करके कम लागत में बड़ी संख्या में लोगों को बचाया जा सकता है।

जीवाश्म ईंधन की नीति से सबसे बड़ा फायदा

रिपोर्ट में जीवाश्म ईंधन की कीमतों से जुड़ी नीतियों को सबसे बड़े आर्थिक लाभ वाला कदम बताया गया है। इसमें अप्रभावी सब्सिडी हटाने और ईंधन पर उचित कर लगाने की बात कही गई है। अनुमान है कि इन नीतियों से हर साल 12 लाख मौतें रोकी जा सकती हैं। साथ ही 3 लाख करोड़ डॉलर का आर्थिक कल्याण लाभ और 5.4 लाख करोड़ डॉलर का राजकोषीय लाभ मिल सकता है।

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इसका मतलब है कि सही ऊर्जा नीतियां केवल प्रदूषण घटाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि सरकारी आय और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने में भी मदद कर सकती हैं।

16.7 अरब टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

इन छह उपायों का फायदा सिर्फ इंसानों की सेहत और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इन्हें वैश्विक स्तर पर लागू करने से हर साल 16.7 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचा जा सकता है। यह भूमि उपयोग और भूमि उपयोग में बदलाव तथा वानिकी को छोड़कर दुनिया के सालाना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का करीब 31 फीसदी है।

रिपोर्ट का अनुमान है कि कम और मध्यम आय वाले देशों को इन उपायों से विशेष लाभ मिल सकता है। इन देशों में जलवायु जोखिम और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी अक्सर एक-दूसरे की मुश्किलें बढ़ाते हैं।

अब वादों से आगे बढ़ने का वक्त

रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस का कहना है कि जलवायु संकट वास्तव में स्वास्थ्य संकट है, लेकिन इसके कारण होने वाले बड़े नुकसान को मौजूदा उपायों से रोका जा सकता है। उनका संदेश साफ है कि जलवायु कार्रवाई के केंद्र में लोगों की सेहत होनी चाहिए।

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कॉप31 से पहले आई यह रिपोर्ट सरकारों के सामने एक बड़ा सवाल रखती है। क्या वे जलवायु परिवर्तन से निपटने को सिर्फ भविष्य की जिम्मेदारी मानेंगी या आज ही ऐसे कदम उठाएंगी, जिनसे लोगों की जान बचे और अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो?

साफ है, जलवायु पर खर्च किया गया पैसा केवल धरती को बचाने का खर्च नहीं है। यह अस्पतालों का बोझ घटाने, बच्चों को सुरक्षित रखने, परिवारों को स्वच्छ हवा और पानी देने तथा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारने का निवेश है। अब जरूरत योजनाओं और घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीन पर काम करने की है।