रेगिस्तान में बरसात: 2026 में राजस्थान में सामान्य से 154% ज्यादा बारिश, 2019 के बाद बदल रहा है चेहरा

मानसून के बदले मिजाज से रेगिस्तान में रिकॉर्ड तोड़ बरसात हो रही है, 2015 में मानसून ने कई रिकॉर्ड तोड़े
फाइल फोटो: सीएसई
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क्या रेत के धोरों, सूखे और पानी की कमी वाले राजस्थान की पहचान बदलने वाली है? क्या इस साल भी राज्य मानसून के दौरान नए रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है? अभी इस बारे में कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन मानसून 2026 के शुरुआती संकेत चौंकाने वाले हैं।

10 जून तक राजस्थान में सामान्य से 154 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। पूर्वी राजस्थान में स्थिति और भी असाधारण है, जहां अब तक सामान्य से 207 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। दिलचस्प बात यह है कि यह स्थिति तब बनी है, जब पूरे देश के लिए 2026 का मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई गई है।

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मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि एक से नौ जून 2026 के दौरान राजस्थान में 19.1 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य तौर पर यहां इस दौरान केवल 7.5 मिमी बारिश ही होती है। हालांकि अभी मानसून राजस्थान से बहुत दूर है, लेकिन 1 जून से होने वाली बारिश को मौसम विभाग मानसून की बारिश के आंकड़ों में शामिल करता है।

मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में बारिश का कारण पश्चिम विक्षोभ रहा। एक पश्चिमी विक्षोभ मई के अंतिम सप्ताह में सक्रिय था, जबकि दूसरा पश्चिमी विक्षोभ तीन जून 2026 को सक्रिय रहा, जिसका असर 6-7 जून तक दिखाई दिया।

वहीं दूसरी ओर, 10 जून को राज्य मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि 11 जून से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य के कई भागों में दोबारा आंधी व बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की प्रबल संभावना है। विभाग के मुताबिक 11 से 14 जून के दौरान बीकानेर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर संभाग के कुछ भागों में तेज मेघगर्जन के साथ 50 से 60 प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी व हल्की व मध्यम बारिश की संभावना है।

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राजस्थान में बारिश तोड़ रही है रिकॉर्ड

मानसून के दौरान होने वाली बारिश राजस्थान में निरंतर रिकॉर्ड बना रही है। साल 2025 के मानसून ने राजस्थान में खूब बारिश कर एक नया इतिहास रच दिया। इस साल 1917 के बाद सबसे अधिक बारिश हुई। राज्य में जून से सितंबर 2025 के बीच 715.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 435.6 मिमी से 279.6 मिमी अधिक थी। जो दीर्घकालिक औसत (1971-2020) यानी सामान्य से 64 प्रतिशत अधिक रही।

हालांकि यह 1917 में दर्ज 844.2 मिमी की सर्वाधिक वर्षा का रिकॉर्ड नहीं तोड़ सकी, लेकिन 1901 से 2025 के बीच यह सबसे अधिक वर्षा वाले वर्षों में शामिल रही और 1908 के 682.2 मिमी के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया।

स्रोत : मौसम विज्ञान विभाग, जयपुर
स्रोत : मौसम विज्ञान विभाग, जयपुर

पूर्वी राजस्थान में सामान्य मानसूनी वर्षा 626.6 मिमी होती है, लेकिन 2025 में 1,010 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो 1901 के बाद दूसरी सबसे अधिक मानसूनी वर्षा है। इस क्षेत्र में सामान्य से 383 मिमी अधिक पानी बरसा, जो लगभग 61 प्रतिशत अधिक वर्षा के बराबर है।

वहीं पश्चिमी राजस्थान में 2025 के मानसूनी महीनों में 478 मिमी वर्षा हुई, जो पिछले 125 वर्षों में छठे स्थान पर रही। पश्चिमी राजस्थान का अधिकांश इलाका रेगिस्तानी व शुष्क है और यहां सामान्य तौर पर मानसून के दौरान केवल 283.6 मिमी होती है। 2025 में यहां 69 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

जून से ही बनने लगे थे रिकॉर्ड

मौसम विभाग की मानसून 2025 रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में जून माह से मानसून के रिकॉर्ड बनने लगे थे। रिपोर्ट के मुताबिक

  • जून 2025 में राज्य में दीर्घकालिक औसत का 133 प्रतिशत, जुलाई में 78 प्रतिशत, अगस्त में 118 प्रतिशत और सितंबर में 182 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई।

  • जून 2025 में राज्य में कुल 128 मिमी वर्षा हुई। वर्ष 1901 से 2025 के बीच जून माह के इतिहास में यह दूसरी सर्वाधिक वर्षा है। इससे पहले जून 2023 में 156.9 मिमी वर्षा के साथ सर्वाधिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।

  • जुलाई 2025 में कुल 287.1 मिमी वर्षा हुई। वर्ष 1901 से 2025 के बीच जुलाई माह के इतिहास में यह तीसरी सर्वाधिक वर्षा है। जुलाई में सर्वाधिक 308.7 मिमी वर्षा वर्ष 1956 में दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी सर्वाधिक 288.0 मिमी वर्षा वर्ष 1908 में हुई थी।

  • जून से सितंबर 2025 (पूरे मानसून सीजन) के दौरान राज्य में कुल 715.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वर्ष 1901 से 2025 के बीच यह दूसरा सर्वाधिक वर्षा वाला मानसून सीजन रहा। इससे पहले वर्ष 1917 में 844.2 मिमी वर्षा के साथ सर्वाधिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।

  • राज्य के कुल 33 जिलों में से 20 जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत या अधिक वर्षा दर्ज हुई, जिसे बहुत ज्यादा (लार्ज एक्सेस ) श्रेणी में रखा गया।

    • 12 जिलों में सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई, जिसे अधिक (एक्सेस) श्रेणी में रखा गया।

    • केवल 1 जिले में वर्षा सामान्य श्रेणी (−19% से +19%) में रही।

  • जिला स्तर पर सबसे अधिक वर्षा बारां जिले में दर्ज की गई, जहां 1593.5 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 92 प्रतिशत अधिक थी। इसके बाद सवाई माधोपुर में 1333.1 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जो सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक थी।

साल दर बढ़ रही है बारिश

मौसम विभाग की रिपोर्ट बताती है कि 1901 से 2025 के बीच राजस्थान के 10 सबसे अधिक वर्षा वाले मानसून वर्षों की सूची बेहद दिलचस्प है। इस सूची में 1917, 1908, 1944, 1973 और 1975 जैसे पुराने वर्ष तो शामिल हैं ही, लेकिन हाल के वर्षों में रिकॉर्ड बारिश की आवृत्ति तेजी से बढ़ी है।

2025 (715.9 मिमी) राज्य के इतिहास का दूसरा सबसे अधिक वर्षा वाला मानसून रहा, जबकि 2024 चौथे, 2022 आठवें, 2019 दसवें और 2011 नौवें स्थान पर है। यानी राजस्थान के इतिहास के 10 सबसे अधिक वर्षा वाले मानसूनों में से पांच वर्ष केवल पिछले 15 वर्षों (2011-2025) के हैं।

और भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2019 के बाद के मात्र सात मानसून वर्षों (2019-2025) में से चार वर्ष (2019, 2022, 2024 और 2025) राज्य के इतिहास के टॉप-10 सबसे अधिक वर्षा वाले मानसूनों में शामिल हो गए हैं। इनमें 2024 और 2025 लगातार दो वर्षों तक चौथे और दूसरे स्थान पर रहे। इससे संकेत मिलता है कि राजस्थान में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं अब अपवाद नहीं रह गई हैं, बल्कि अधिक बार दिखाई दे रही हैं।

2010 से 2020 के दशक का विश्लेषण बताता है कि राजस्थान में मानसूनी वर्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा था। इस अवधि में केवल 2014 और 2018 ऐसे वर्ष रहे जब वर्षा सामान्य या उससे कम रही, जबकि अधिकांश वर्षों में बारिश सामान्य से अधिक दर्ज की गई। 2011 और 2019 में वर्षा सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक रही, जो उस समय के प्रमुख रिकॉर्ड थे। दशक के अंत तक 2019 का मानसून राज्य के इतिहास के शीर्ष 10 सबसे अधिक वर्षा वाले वर्षों में शामिल हो गया। यह प्रवृत्ति 2020 के बाद और तेज हुई तथा 2022, 2024 और 2025 जैसे वर्ष रिकॉर्ड सूची में शामिल हो गए। इससे संकेत मिलता है कि राजस्थान में मानसून अधिक अस्थिर और चरम होता जा रहा है, जहां सामान्य वर्षों की तुलना में अत्यधिक वर्षा वाले वर्षों की संख्या बढ़ रही है।

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