

मैक्वेरी द्वीप पर 1979 के बाद बारिश 28 प्रतिशत बढ़ी, हर साल लगभग 260 मिलीमीटर अतिरिक्त वर्षा दर्ज की गई।
बढ़ती बारिश के कारण तूफानों की संख्या नहीं बढ़ी, बल्कि हर तूफान अब पहले से अधिक वर्षा पैदा कर रहा है।
अधिक बारिश महासागर की सतही परतों को कम नमकीन बना रही है, जिससे महासागरीय परतों और धाराओं की ताकत बदल रही है।
बढ़ती वर्षा और महासागरीय परतों में बदलाव से पोषक तत्वों और कार्बन का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, समुद्री जीवन पर असर।
अधिक बारिश के लिए बढ़ा वाष्पीकरण महासागर को ठंडा कर रहा है, दक्षिणी महासागर अब 10-15 प्रतिशत ज्यादा ऊर्जा खर्च कर रहा।
दुनिया के सबसे दूर और तूफानी समुद्री क्षेत्रों में से एक, मैक्वेरी द्वीप पर किए गए नए शोध से पता चला है कि यहां बारिश तेजी से बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ एक छोटे द्वीप की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे दक्षिणी महासागर की जलवायु में बड़े परिवर्तन का संकेत हो सकता है।
यह शोध वेदर एंड क्लाइमेट डायनामिक्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन से पता चलता है कि दक्षिणी महासागर के तूफान पहले की तुलना में ज्यादा बारिश ला रहे हैं।
मैक्वेरी द्वीप: एक अनोखी जगह
मैक्वेरी द्वीप तस्मानिया और अंटार्कटिका के बीच स्थित एक दूरस्थ और हवा से भरा हुआ द्वीप है। यह जगह अपने अनोखे वन्यजीवों के लिए जानी जाती है।
यहां बड़ी संख्या में हाथी सील समुद्र तट पर आराम करते दिखाई देते हैं। पहाड़ियों पर किंग पेंगुइन समूहों में चलते हैं। आसमान में बड़े अल्बाट्रॉस पक्षी उड़ते रहते हैं।
लेकिन हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने देखा कि इस द्वीप की जमीन बदल रही है। कई ढलानें ज्यादा गीली और दलदली हो रही हैं। कुछ खास बड़े पौधे, जिन्हें मेगाहर्ब कहा जाता है, अब पहले की तरह नहीं उग रहे हैं।
वैज्ञानिकों को पहले से शक था कि इसका कारण बढ़ती बारिश हो सकती है। अब नए अध्ययन ने इस बात की पुष्टि कर दी है।
दक्षिणी महासागर क्यों महत्वपूर्ण है
दक्षिणी महासागर पृथ्वी की जलवायु के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह महासागर वातावरण में मौजूद अतिरिक्त गर्मी और कार्बन डाइऑक्साइड को काफी मात्रा में अपने अंदर ले लेता है।
इस वजह से यह ग्लोबल वार्मिंग को कुछ हद तक धीमा करने में मदद करता है। इसके अलावा, इस क्षेत्र के तूफान ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दुनिया के कई हिस्सों के मौसम को प्रभावित करते हैं।
लेकिन समस्या यह है कि यह पृथ्वी के सबसे कम देखे गए क्षेत्रों में से एक है। यहां बहुत कम मौसम स्टेशन हैं और अक्सर बादल छाए रहते हैं, इसलिए उपग्रहों और कंप्यूटर मॉडल के लिए सही जानकारी जुटाना मुश्किल होता है।
इसी कारण मैक्वेरी द्वीप का मौसम रिकॉर्ड बहुत कीमती माना जाता है।
75 साल का मौसम रिकॉर्ड
मैक्वेरी द्वीप पर मौसम का रिकॉर्ड लगभग 75 साल से रखा जा रहा है। यह काम ऑस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञान ब्यूरो और ऑस्ट्रेलियाई अंटार्कटिक डिवीजन द्वारा किया जाता है। इस रिकॉर्ड में रोज की बारिश, हवा, तापमान और दबाव की जानकारी शामिल है।
वैज्ञानिकों ने 1979 से 2023 तक के 45 साल के आंकड़ों का विश्लेषण किया। उन्होंने इन आंकड़ों की तुलना एक वैश्विक मौसम मॉडल ईआरए5 पुनःविश्लेषण से भी की।
बारिश में तेज बढ़ोतरी
अध्ययन में पाया गया कि 1979 के बाद से मैक्वेरी द्वीप पर सालाना बारिश में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह हर साल लगभग 260 मिलीमीटर अतिरिक्त बारिश के बराबर है।
दिलचस्प बात यह है कि ईआरए5 मॉडल केवल आठ प्रतिशत वृद्धि दिखाता है। इसका मतलब है कि वास्तविक बदलाव मॉडल से कहीं ज्यादा बड़ा है।
तूफान अब ज्यादा बारिश ला रहे हैं
शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि बारिश क्यों बढ़ रही है। उन्होंने मौसम के पैटर्न को पांच अलग-अलग प्रकारों में बांटा। इनमें कम दबाव वाले तूफान, ठंडी हवा के झोंके और गर्म हवा का आगे बढ़ना शामिल था।
अध्ययन से पता चला कि तूफानों की संख्या में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन जब तूफान आते हैं, तो वे पहले से ज्यादा बारिश कराते हैं। दूसरे शब्दों में, अब हर तूफान ज्यादा नमी लेकर आता है।
महासागर पर इसका असर
अगर यही स्थिति पूरे दक्षिणी महासागर में हो रही है, तो इसके बड़े परिणाम हो सकते हैं। अधिक बारिश का मतलब है कि महासागर की सतह पर ज्यादा ताजा पानी पहुंचेगा। इससे समुद्र के ऊपरी हिस्से की परतें मजबूत हो सकती हैं और पानी का आपस में मिलना कम हो सकता है। इससे महासागरीय धाराओं की ताकत और दिशा बदल सकती है।
कार्बन और समुद्री जीवन पर असर
दक्षिणी महासागर दुनिया के सबसे बड़े कार्बन अवशोषकों में से एक है। अगर पानी की परतें बदलती हैं, तो पोषक तत्वों और कार्बन का प्रवाह भी बदल सकता है। इससे समुद्री जीवन और पूरे महासागर की रसायन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
महासागर “पसीना” बहा रहा है
अधिक बारिश होने के लिए अधिक वाष्पीकरण भी जरूरी होता है। जब समुद्र से पानी भाप बनकर उड़ता है, तो वह समुद्र को ठंडा करता है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 1979 की तुलना में अब दक्षिणी महासागर लगभग 10 से 15 प्रतिशत ज्यादा ठंडा हो रहा है क्योंकि वहां ज्यादा वाष्पीकरण हो रहा है। इसे वैज्ञानिक मजाक में कहते हैं कि महासागर अब ज्यादा “पसीना” बहा रहा है।
एक छोटे द्वीप से मिला बड़ा संकेत
मैक्वेरी द्वीप बहुत छोटा है, लेकिन इसका मौसम रिकॉर्ड वैज्ञानिकों को पूरी पृथ्वी की जलवायु को समझने में मदद कर रहा है। यह अध्ययन दिखाता है कि दक्षिणी महासागर में बदलाव पहले सोचे गए से ज्यादा तेज हो सकते हैं।
अब वैज्ञानिकों की अगली चुनौती यह समझना है कि यह बदलाव पूरे महासागर में कितना फैल चुका है और इसका भविष्य में पृथ्वी की जलवायु पर क्या असर होगा।