

जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से जारी भारी बारिश के बीच पुंछ जिले में भूस्खलन से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है।
राजौरी और पुंछ सबसे अधिक प्रभावित जिलों में हैं, जहां अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से मकानों, सड़कों, बिजली लाइनों और संचार नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है।
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों से अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले कुछ दिनों तक और बारिश का अनुमान जताते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक बाढ़, भूस्खलन, मलबा खिसकने, नदियों के जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में जलभराव की चेतावनी जारी की है।
जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से जारी भारी बारिश के बीच मृतकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। पुंछ जिले में भूस्खलन की एक घटना में एक ही परिवार के सात लोगों, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं, की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
20 जुलाई 2026 को पुंछ जिले के लोरन दुमिलान गांव के ऊपरी इलाके में भूस्खलन होने से मिट्टी का एक मकान मलबे में दब गया। उस समय घर के अंदर मौजूद सभी लोग मलबे में फंस गए।
सूचना मिलते ही पुलिस, नागरिक प्रशासन की टीमें और स्थानीय स्वयंसेवक मौके पर पहुंचे। पूरे दिन चले खोज एवं बचाव अभियान के बाद सभी सात शव बरामद कर लिए गए।
मृतकों की पहचान जाहिदा बेगम (38), उनके छह वर्षीय बेटे मानन रफीक, चार वर्षीय बेटी अलीसा, उनके देवर तनवीर अहमद भट (27), ननद शमीम अख्तर (33) और शबनम बानो (31), तथा 17 वर्षीय भतीजे मोहम्मद इरफान के रूप में हुई है। सभी पुंछ जिले की मंडी तहसील के अरिगाम गांव के निवासी थे।
पुंछ के जिला विकास आयुक्त अशोक कुमार शर्मा ने सात लोगों की मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सभी शवों को कानूनी औपचारिकताओं के तहत पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा।
ये मौतें ऐसे समय हुई हैं जब जम्मू क्षेत्र में लगातार दो दिनों तक हुई अत्यधिक भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई है। राजौरी और पुंछ जिले सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
घर बह गए
इससे पहले राजौरी जिले में सुरन नदी के किनारे स्थित एक घर बाढ़ की चपेट में आने से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई थी। पीर पंजाल पर्वतमाला से निकलने वाली सुरन नदी, सुरनकोट से होकर बहती है और आगे चलकर पुंछ नदी में मिल जाती है। भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे यह हादसा हुआ।
राजौरी के विधायक इफ्तिखार चौधरी ने बताया कि राजौरी जिले में तीन और पुंछ जिले में 15 लोगों की मौत हुई थी। इस प्रकार ताजा भूस्खलन की घटना से पहले दोनों जिलों में मृतकों की संख्या 18 थी।
उन्होंने कहा कि कई मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है, लेकिन अब भी कई इलाके अंधेरे में हैं।
20 जुलाई 2026 को डोडा जिले में भी दो और लोगों की मौत की सूचना मिली।
अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रग्गी नाला के पास पहाड़ी से एक विशाल चट्टान लुढ़ककर एक यात्री बस पर आ गिरी। इस हादसे में मनीष कुमार की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग घायल हो गए।
एक अन्य घटना में डोडा जिले के कश्तीगढ़ क्षेत्र में शिव देवी नामक महिला की उस समय मौत हो गई, जब एक बड़ा पत्थर उनके घर पर आ गिरा।
सड़कें, बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, राजौरी शहर की दर्हाली नदी के किनारे स्थित निचले इलाके बेला कॉलोनी में आई बाढ़ के कारण स्थानीय बस अड्डे पर रातभर खड़े लगभग 30 वाहन बह गए। आसपास के कई मकानों और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बाढ़ के कारण संचार सेवाएं और बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पुंछ जिले का सुरनकोट तथा राजौरी जिले के दरहाल, थन्नामंडी और मंजाकोट सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। भूस्खलन और तेज बहाव के कारण मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर लाइनें और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क कट गया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी के बाद नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था। अधिकांश लोगों को समय रहते निकाल लिया गया, लेकिन एक महिला बाढ़ की चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई।
बाढ़ के दौरान बह गए विकास अहमद का शव 19 जुलाई की सुबह राजौरी शहर के सलानी क्षेत्र में नदी से बरामद किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, कुछ इलाकों में अब जलस्तर घटने लगा है, लेकिन राहत और बचाव दल अब भी सतर्क हैं, क्योंकि 25 जुलाई तक और बारिश तथा कुछ स्थानों पर बादल फटने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से एक बार फिर नदी किनारों और निचले इलाकों से दूर रहने की अपील की है।
कारगिल, गुरेज और रामबन भी प्रभावित
भारी बारिश का असर क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिला। कारगिल में अचानक आई बाढ़ से मकानों, वाहनों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा। वहीं गुरेज में कई स्थानों पर बादल फटने की घटनाओं के बाद भूस्खलन, जलभराव और फसलों का नुकसान हुआ, जिससे राहत और मरम्मत कार्यों पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया है।
रामबन में चिनाब नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पुलिस ने लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी जारी की। अब्दुल्ला पुल के पास बाढ़ का पानी एक झुग्गी बस्ती में घुस गया, जिससे 50 से अधिक परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। पुलिस ने बताया कि तारिक पुल के आसपास रहने वाले लोगों को भी कई आपातकालीन कॉल मिलने के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने रविवार को अमरनाथ यात्रा को पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों से अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं के वाहनों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यात्रियों से निकटतम शिविरों में रुकने और पुलिस के साथ सहयोग करने की अपील की।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 19 जुलाई 2026 को दिल्ली का अपना दौरा बीच में ही समाप्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन की योजना बनाई थी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह स्थिति की निगरानी के लिए जम्मू लौट रहे हैं, जबकि पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में प्रदर्शन तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।
वहीं, विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी पुंछ और राजौरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया।
और बारिश का अनुमान
श्रीनगर स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राजौरी में 92.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। पुंछ में 78 मिलीमीटर, जम्मू के छत्ता क्षेत्र में 59 मिलीमीटर, कटरा में 53.5 मिलीमीटर, गांदरबल में 46 मिलीमीटर, श्रीनगर में 45.6 मिलीमीटर और रामबन में 45.2 मिलीमीटर बारिश हुई।
मौसम विभाग ने 20 से 23 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहने, रुक-रुक कर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। विशेष रूप से रियासी और उधमपुर में शाम और रात के समय अत्यधिक भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है।
24 से 27 जुलाई के बीच भी कई इलाकों में बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। विभाग के अनुसार 20 से 23 जुलाई के बीच शाम और रात के समय जम्मू, कठुआ, सांबा, राजौरी, पुंछ, डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जिलों में भारी वर्षा हो सकती है।
अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और मलबा खिसकने की आशंका जताई है। इसके साथ ही नदियों के जलस्तर में वृद्धि और निचले इलाकों में जलभराव की भी चेतावनी दी गई है। जिला विकास आयुक्तों ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और मरम्मत कार्य शुरू करने के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।