

ग्रीन क्ले के टेनिस कोर्ट मेटाबेसाल्ट से बने हैं, जो एन्हांस्ड रॉक वेदरिंग प्रक्रिया द्वारा सीओ2 अवशोषित करते हैं।
अमेरिका के 17,178 ग्रीन क्ले कोर्टों से सालाना लगभग 25,000 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित होती है।
अधिकांश कोर्ट 10 साल के अंदर नेट-जीरो उत्सर्जन तक पहुंच जाते हैं, 3.5 साल में औसतन नेट-निगेटिव हो जाते हैं।
गर्म क्षेत्रों और वर्जीनिया के पास कोर्ट सबसे अधिक कार्बन अवशोषण करते हैं, ठंडे और दूरस्थ क्षेत्रों में कम प्रभाव।
हार्ड कोर्ट की तुलना में ग्रीन क्ले कोर्ट निर्माण में 1.6 से 3 गुना कम उत्सर्जन करते हैं और पर्यावरणीय फायदा बढ़ाते हैं।
आज के समय में जलवायु परिवर्तन एक गंभीर समस्या बन गई है। वैज्ञानिक नई-नई तकनीकों और तरीकों की खोज कर रहे हैं ताकि वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) को कम किया जा सके। हाल ही में एक अध्ययन में यह पाया गया है कि ग्रीन मिट्टी (ग्रीन क्ले) के टेनिस कोर्ट वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पुरानी चट्टानों की आबोहवा के कारण नष्ट हो जाना या एन्हांस्ड रॉक वेदरिंग कहलाती है।
पुरानी चट्टानों का आबोहवा के कारण नष्ट हो जाना क्या है?
पुरानी चट्टानों की आबोहवा के कारण नष्ट हो जाना एक प्राकृतिक प्रक्रिया पर आधारित तकनीक है। इसमें सिलिकेट रॉक जैसे बेसाल्ट का उपयोग किया जाता है। जब यह पत्थर बारिश के पानी और वातावरण में मौजूद सीओ2 के संपर्क में आता है, तो यह रासायनिक प्रतिक्रिया करता है और कार्बन को अवशोषित कर लेता है। यह एक ऐसा तरीका है जिससे वातावरण से कार्बन को स्थायी रूप से हटाया जा सकता है।
अमेरिका में ग्रीन क्ले के टेनिस कोर्ट मेटाबेसाल्ट नामक पत्थर से बनाए जाते हैं। यह बेसाल्ट एन्हांस्ड रॉक वेदरिंग के लिए उपयुक्त है और सीओ2 अवशोषण में मदद करता है।
टेनिस कोर्ट में शोध
एप्लाइड जियोकेमिस्ट्री में प्रकाशित इस अध्ययन में गैलैटिन स्कूल ऑफ इंडिविज़ुअलाइज़्ड स्टडीज और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अमेरिका के टेनिस कोर्ट के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। उन्होंने 17,178 ग्रीन क्ले के कोर्ट का विश्लेषण किया और उनके कार्बन अवशोषण की दरों का आंकलन किया।
शोध में केवल कोर्ट का निर्माण और उसके सतही निर्माण से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को ही नहीं, बल्कि खनन, सामग्री की ढुलाई, निर्माण और रखरखाव को भी ध्यान में रखा गया। इसके अलावा कोर्ट की तापमान, पत्थर का आकार और रासायनिक संरचना जैसे तत्वों को भी मॉडल में शामिल किया गया।
कार्बन अवशोषण के परिणाम
शोधकर्ताओं ने पाया कि इन ग्रीन क्ले के कोर्ट से सालाना लगभग 25,000 मीट्रिक टन सीओ2 अवशोषित होती है। अध्ययन में यह भी देखा गया कि अधिकांश कोर्ट निर्माण के 10 साल के अंदर नेट-जीरो उत्सर्जन तक पहुंच जाते हैं। लगभग 92 फीसदी कोर्ट 20 साल के अंदर नेट-जीरो स्तर तक पहुं च जाते हैं। औसतन, एक ग्रीन क्ले का कोर्ट 3.5 साल में नेट-निगेटिव हो जाता है, यानी यह जितना सीओ2 उत्सर्जित करता है, उससे अधिक सीओ2अवशोषित करता है।
यदि हम इसे सामान्य कंक्रीट के हार्ड कोर्ट से तुलना करें, तो हार्ड कोर्ट का निर्माण अधिक कार्बन उत्सर्जित करता है और ये सीओ2 अवशोषित नहीं करते। इसके अलावा, ग्रीन क्ले के कोर्ट का निर्माण हार्ड कोर्ट के मुकाबले 1.6 से 3 गुना कम उत्सर्जन करता है।
कार्बन अवशोषण पर प्रभाव डालने वाले कारण
ग्रीन क्ले के कोर्ट में कार्बन अवशोषण की क्षमता के कई कारण असर डालते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है तापमान - जो गर्म इलाकों में कोर्ट अधिक सीओ2 अवशोषित करते हैं।
संसाधन की दूरी - कोर्ट का स्थान उस बेसाल्ट प्रोसेसिंग साइट के करीब होना चाहिए। अध्ययन में पाया गया कि वर्जीनिया में मुख्य प्रोसेसिंग साइट के पास के कोर्ट में सबसे अधिक कार्बन अवशोषण हुआ।
कुछ कोर्ट, जो बहुत ठंडे क्षेत्रों में हैं और प्रोसेसिंग साइट से दूर हैं, हो सकता है कि कभी भी नेट-जीरो उत्सर्जन तक नहीं पहुंचे।
भविष्य की संभावनाएं
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि यह अध्ययन सार्वजनिक जागरूकता और जलवायु समाधान में नए अवसर प्रदान करता है। नए कोर्ट निर्माण में ग्रीन क्ले का उपयोग करने से उत्सर्जन कम हो सकता है और अगर तोड़े गए पत्थर की संरचना और रखरखाव की निगरानी में सुधार किया जाए तो सीओ2 अवशोषण को और बढ़ाया जा सकता है।
यह तकनीक दर्शाती है कि रोजमर्रा की सुविधाएं जैसे खेल मैदान और टेनिस कोर्ट भी जलवायु परिवर्तन से लड़ने में योगदान दे सकते हैं।
ग्रीन क्ले के टेनिस कोर्ट सिर्फ खेल के लिए नहीं हैं, बल्कि ये एक तरह के कार्बन अवशोषक भी हैं। यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो यह वातावरण से कार्बन हटाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह दिखाता है कि रोजमर्रा की संरचनाएं भी जलवायु समाधान का हिस्सा बन सकती हैं।