

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) का वार्षिक अनिल अग्रवाल डायलॉग इस वर्ष एक ऐसे समय में लौट रहा है जब पृथ्वी अभूतपूर्व दबाव में है और मीडिया परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।
25 से 27 फरवरी, 2026 तक राजस्थान के निमली स्थित अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित अनिलअग्रवाल डायलॉग 2026 तीन दिनों तक गहन विचार-विमर्श, विज्ञान, नीति तथा पत्रकारिता को जोड़ने वाली सार्थक बातचीत का मंच बनेगा।
25 फरवरी को औपचारिक उद्घाटन सत्र में सीएसई और डाउन टू अर्थ की वार्षिक रिपोर्ट “स्टेट ऑफ इंडिया’ज एनवायरमेंट 2026” जारी की जाएगी।
सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण इस रिपोर्ट का प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पूर्व सचिव अशोक लवासा अपने मुख्य वक्तव्य देंगे। उनके संबोधन कानून और शासन इन दो दृष्टिकोणों से वर्तमान पर्यावरणीय परिदृश्य को समझने की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।
अनिल अग्रवाल डायलॉग 2026 की विषय-वस्तु वैश्विक चुनौतियों की तात्कालिकता को रेखांकित करती है।
25 फरवरी को आयोजित सत्र “मनुष्य, पशु और जलवायु परिवर्तन” जैव विविधता में हो रही गिरावट और प्रजातियों के बदलते व्यवहार पर केंद्रित होगा। इस सत्र में संरक्षण जीवविज्ञानी कमर कुरैशी, आईआईएसईआर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च) पुणे के मिलिंद वाटवे और आरहूस विश्वविद्यालय के निनाद मुंगी अपने विचार रखेंगे।
वन्यजीव और मानव–वन्यजीव संघर्ष की रिपोर्टिंग पर एक ओपन हाउस चर्चा भी आयोजित की जाएगी, जिसमें द इंडियन एक्सप्रेस, सैंक्चुअरी एशिया और डाउन टू अर्थ के पत्रकार अपने अनुभव साझा करेंगे।
अगले दिन प्रतिभागी वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की आपस में जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। सत्रों में स्रोत निर्धारण (सोर्स अपॉर्शनमेंट), निगरानी तंत्र की कमियां और स्वास्थ्य पर प्रभाव जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसमें आईआईटी दिल्ली के हर्ष कोटा और डॉ. संजीव बगई जैसे विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
दोपहर का जलवायु सत्र “एपोकैलिप्स इज नाउ – द ब्रीचिंग ऑफ द प्लैनेटरी बाउंड्रीज” शीर्षक से आयोजित होगा, जिसमें बदलती जलवायु व्यवस्थाओं, प्रवाल भित्तियों (कोरल) के क्षरण और पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते संरचनात्मक दबाव की पड़ताल की जाएगी।
दिन का समापन अरावली पर्वतमाला और गरीबी विषय पर दो विशेष संवादों के साथ होगा।
अंतिम दिन का केंद्र बिंदु कचरा, गर्मी और स्वास्थ्य होंगे। समुद्री कचरे, विस्तारित उत्पादक दायित्व (ईपीआर) और भारत के पूर्वोत्तर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर चर्चाओं के बाद “स्वास्थ्य और पर्यावरण – उभरते कारक” विषय पर सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें शहरी गर्मी, आंत माइक्रोबायोम और पर्यावरण–भोजन–स्वास्थ्य के अंतर्संबंधों पर विचार-विमर्श होगा।