चाइम टेलीस्कोप ने पहली बार अपने आंकड़ों से प्राचीन ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस के संकेतों का सफल नक्शा तैयार किया।
सात साल की मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि चाइम दूर स्थित हाइड्रोजन के बेहद कमजोर रेडियो संकेत पकड़ सकता है।
हाइड्रोजन के वितरण का अध्ययन ब्रह्मांड के फैलाव की गति और डार्क एनर्जी के रहस्य को समझने में मदद कर सकता है।
2019 में 94 रातों से जुटाए आंकड़ों की गहन जांच के बाद वैज्ञानिकों को वास्तविक ब्रह्मांडीय संकेत मिलने का भरोसा हुआ।
चाइम के सात वर्षों के अतिरिक्त आंकड़ों से भविष्य में ब्रह्मांड के विस्तार और उसके बदलते स्वरूप की नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।
ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है और वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह फैलाव समय के साथ तेज क्यों होता जा रहा है। इस रहस्य को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने अब एक नई तकनीक का सफल परीक्षण किया है। कनाडा के एक खास रेडियो टेलीस्कोप ने पहली बार अपने ही आंकड़ों की मदद से प्राचीन ब्रह्मांड में मौजूद हाइड्रोजन गैस का नक्शा तैयार करने में सफलता हासिल की है।
इस काम को पूरा करने और इसके नतीजों पर भरोसा करने में वैज्ञानिकों को करीब सात साल लगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में ब्रह्मांड के फैलाव और डार्क एनर्जी के रहस्य को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह शोध द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
क्या है चाइम टेलीस्कोप?
इस शोध में कनाडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट यानी चाइम का इस्तेमाल किया गया है। यह कई रेडियो टेलीस्कोप का समूह है, जो मुख्य रूप से कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में स्थित है। यह टेलीस्कोप हर दिन उत्तरी आकाश के बड़े हिस्से का निरीक्षण करता है।
चाइम का मुख्य काम ब्रह्मांड में मौजूद हाइड्रोजन गैस से निकलने वाले बेहद कमजोर रेडियो संकेतों को पकड़ना है। हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके संकेतों से यह पता लगाया जा सकता है कि ब्रह्मांड में पदार्थ किस तरह फैला हुआ है।
हाइड्रोजन से कैसे मिलेगी ब्रह्मांड की जानकारी?
हाइड्रोजन से निकलने वाला रेडियो संकेत वैज्ञानिकों के लिए एक तरह के निशान का काम करता है। इन संकेतों को अलग-अलग जगहों और अलग-अलग समय से जोड़कर वैज्ञानिक यह समझ सकते हैं कि अरबों साल पहले ब्रह्मांड में पदार्थ कहां और किस मात्रा में मौजूद था।
यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रह्मांड के फैलाव की गति समय के साथ बदलती रही है। अगर वैज्ञानिक अलग-अलग समय के ब्रह्मांड का नक्शा तैयार कर पाते हैं, तो वे उसके फैलाव के इतिहास को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
पहले दूसरे टेलीस्कोप की लेनी पड़ती थी मदद
चाइम से मिलने वाले संकेत बहुत कमजोर होते हैं। इसलिए अब तक इसके आंकड़ों की पुष्टि के लिए दूसरे टेलीस्कोप से मिली जानकारी का सहारा लेना पड़ता था। यह प्रक्रिया महंगी भी थी और इसमें काफी समय लगता था।
नई सफलता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब चाइम ने दिखाया है कि वह अपने ही आंकड़ों से दूर के ब्रह्मांड में मौजूद हाइड्रोजन के संकेतों को पहचान सकता है। इससे भविष्य में ब्रह्मांड का अध्ययन करने के लिए एक स्वतंत्र तरीका उपलब्ध हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने 2019 में 94 रातों के दौरान मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया। इन आंकड़ों की कई स्तरों पर जांच की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मिला संकेत किसी तकनीकी गलती या दूसरे स्रोत से पैदा नहीं हुआ है।
तीन अरब साल पुराने ब्रह्मांड की झलक
चाइम की मदद से वैज्ञानिक ऐसे रेडियो संकेत पकड़ सकते हैं जो ब्रह्मांड के करीब तीन अरब साल पुराने समय से आते हैं। उस समय ब्रह्मांड आज की तुलना में काफी छोटा था।
शोधकर्ताओं के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें यह देखने का मौका मिलता है कि ब्रह्मांड उस दौर में किस तरह फैल रहा था। अलग-अलग समय के ऐसे आंकड़ों की तुलना करके वैज्ञानिक ब्रह्मांड के विकास की बेहतर तस्वीर बना सकते हैं।
डार्क एनर्जी का रहस्य
ब्रह्मांड के लगातार तेज होते फैलाव को समझने के लिए वैज्ञानिक डार्क एनर्जी का अध्ययन करते हैं। डार्क एनर्जी को उस अज्ञात कारण से जोड़ा जाता है जिसके कारण ब्रह्मांड का विस्तार तेज हो रहा है। हालांकि वैज्ञानिक अभी तक यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि डार्क एनर्जी वास्तव में क्या है।
चाइम से मिलने वाले हाइड्रोजन के नक्शे इस सवाल पर नई जानकारी दे सकते हैं। वैज्ञानिक इन नक्शों के जरिए अलग-अलग समय में ब्रह्मांड के फैलाव की गति का अध्ययन कर सकेंगे।
हाइड्रोजन की मात्रा पर भी मिली जानकारी
इस शोध से जुड़े एक अन्य अध्ययन में हाइड्रोजन के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मांड में मौजूद हाइड्रोजन का करीब दो प्रतिशत हिस्सा न्यूट्रल यानी उदासीन अवस्था में है। इसका मतलब है कि हाइड्रोजन के परमाणु में एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन होते हैं और कुल विद्युत आवेश शून्य रहता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह आंकड़ा दूसरे टेलीस्कोप से मिले परिणामों के साथ मेल खाता है।
आगे और बड़े अध्ययन की तैयारी
वैज्ञानिकों की यह सफलता अभी शुरुआत मानी जा रही है। चाइम के पास सात वर्षों के और भी आंकड़े मौजूद हैं। अब शोधकर्ता इन आंकड़ों का अध्ययन करके हाइड्रोजन के और बड़े नक्शे तैयार करना चाहते हैं।
अगर आने वाले वर्षों में इन आंकड़ों से ब्रह्मांड के फैलाव के बारे में अधिक सटीक जानकारी मिलती है, तो वैज्ञानिकों को डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड के भविष्य को समझने में मदद मिल सकती है। इस तरह कनाडा का चाइम टेलीस्कोप ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरण बन सकता है।