कांगो में इबोला संक्रमण के 2,011 मामले, 754 मौतें; दुर्लभ बुंदिबुग्यो स्ट्रेन ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ाई
पूर्वी कांगो में तेजी से फैल रहा इबोला, युगांडा तक पहुंचा वायरस; रोकथाम अभियान गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने बुंदिबुग्यो इबोला टीके का पहला मानव परीक्षण शुरू किया, वैज्ञानिकों को मिली नई उम्मीद
डब्ल्यूएचओ ने शुरू किया एंटीवायरल दवा परीक्षण, संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों को बचाने की कोशिश तेज
हिंसा, अफवाह और स्वास्थ्य संकट के बीच कांगो में इबोला नियंत्रण मुश्किल, नए उपचारों से भविष्य की उम्मीद
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप गंभीर रूप लेता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 2,011 हो गई है, जबकि इस खतरनाक बीमारी से अब तक 754 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बार संक्रमण फैलाने वाला वायरस बुंदिबुग्यो स्ट्रेन है, जो इबोला का एक दुर्लभ प्रकार माना जाता है।
पूर्वी कांगो से युगांडा तक पहुंचा संक्रमण
कांगो के पूर्वी हिस्सों में यह वायरस तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इटुरी, नॉर्थ किवु और हाउटे-उएले प्रांतों में संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को ही 54 नए मामलों की पुष्टि हुई।
बुंदिबुग्यो स्ट्रेन के कारण पैदा हुए इस प्रकोप ने पड़ोसी देश युगांडा के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में लोगों की आवाजाही के कारण संक्रमण को रोकना और भी मुश्किल हो जाता है।
इलाज के सीमित साधन, स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव
इबोला के इस प्रकार के खिलाफ अभी तक कोई मंजूर टीका उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, ऐसी कोई विशेष दवा भी नहीं है जो सीधे बुंदिबुग्यो वायरस को खत्म कर सके। इसके कारण स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण रोकने और मरीजों का इलाज करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इबोला से निपटने के लिए संक्रमित लोगों की पहचान, उनके संपर्क में आए लोगों की जांच और मरीजों को तुरंत चिकित्सा सुविधा देना बेहद जरूरी होता है। लेकिन कांगो में जारी हिंसा और असुरक्षा की स्थिति ने इन प्रयासों को प्रभावित किया है।
कई इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले हुए हैं। लोगों के बीच फैली अफवाहों के कारण कई बार मरीज इलाज के लिए आगे नहीं आते। वहीं, वेतन संबंधी समस्याओं के कारण स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल ने भी हालात को और कठिन बना दिया है।
डब्ल्यूएचओ ने घोषित की थी वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मई में इस इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था। इसके बावजूद संक्रमण पर पूरी तरह नियंत्रण पाना चुनौती बना हुआ है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी महामारी को रोकने के लिए केवल दवाओं और टीकों की जरूरत नहीं होती, बल्कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, लोगों का सहयोग और सुरक्षित माहौल भी जरूरी होता है।
ऑक्सफोर्ड में शुरू हुआ दुनिया का पहला टीका परीक्षण
इस संकट के बीच वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बुंदिबुग्यो इबोला स्ट्रेन के खिलाफ बनाए गए टीके का दुनिया का पहला मानव परीक्षण शुरू किया है।
यह परीक्षण इबोला के भविष्य के प्रकोपों से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगर यह टीका सफल साबित होता है तो दुर्लभ इबोला स्ट्रेन के खिलाफ सुरक्षा का एक नया रास्ता खुल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि टीके को आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होने में अभी समय लगेगा। मानव परीक्षण के कई चरण पूरे होने के बाद ही इसकी सुरक्षा और प्रभाव की पुष्टि की जाएगी।
इबोला से बचाव के लिए एंटीवायरल दवा की भी जांच
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुंदिबुग्यो इबोला से बचाव के लिए एक एंटीवायरल दवा के मानव परीक्षण की शुरुआत की भी घोषणा की है। इस परीक्षण को ईबीओ-पीईपी (ईबीओ-पीईपी) नाम दिया गया है।
इसमें ओबेल्डेसिविर नाम की दवा की जांच की जा रही है। यह दवा उन लोगों को दी जाएगी जो इबोला संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए हैं। वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह दवा संक्रमण को बीमारी में बदलने से रोक सकती है या नहीं।
यह दवा अमेरिका की गिलियड साइंसेज कंपनी ने विकसित की है। शुरुआती प्रयोगों में यह इबोला जैसे वायरस परिवार के खिलाफ प्रभावी पाई गई थी, लेकिन इंसानों पर इसकी सफलता की पुष्टि अभी बाकी है।
वैज्ञानिकों को भविष्य में बेहतर तैयारी की उम्मीद
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा है कि हर बड़ी वैज्ञानिक सफलता की शुरुआत उम्मीद से होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नया टीका और एंटीवायरल दवा सफल रहती है, तो दुनिया को इबोला जैसी खतरनाक महामारियों से निपटने के लिए मजबूत हथियार मिल सकते हैं।
फिलहाल कांगो में संक्रमण रोकने की चुनौती बनी हुई है। स्वास्थ्यकर्मी सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच काम कर रहे हैं, लेकिन नए वैज्ञानिक प्रयासों ने इस संकट के बीच एक नई उम्मीद जरूर पैदा की है।