दिल्ली और फरीदाबाद से सामने आए दो मामलों ने पर्यावरण प्रबंधन की दो अलग तस्वीरें पेश की हैं, एक तरफ दिल्ली में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण का मामला सामने आया है।
दूसरी तरफ फरीदाबाद में कचरा प्रबंधन सुधार की प्रशासनिक तैयारी को लेकर रिपोर्ट दाखिल की गई है। दोनों मामलों की सुनवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में हुई, लेकिन सवाल एक ही है, जमीनी स्तर पर कानून कितना लागू हो रहा है।
दिल्ली के भाटी खुर्द में सरकारी वन भूमि पर फार्महाउस मालिकों द्वारा कथित कब्जे और बिना अनुमति पुल निर्माण के आरोपों ने वन संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरटीआई से यह सामने आया कि जमीन वन क्षेत्र के रूप में दर्ज है और निर्माण के लिए कोई सरकारी टेंडर जारी नहीं हुआ। निर्माण रोकने के आदेश के बावजूद काम जारी रहने के आरोप यह दिखाते हैं कि नियमों के बावजूद निगरानी कितनी कमजोर है।
वहीं फरीदाबाद में प्रशासन ने ठोस कचरा प्रबंधन सुधार के लिए निगरानी तंत्र, नई निविदाएं और 600 टन प्रतिदिन क्षमता वाला नया संयंत्र लगाने की योजना पेश की है। यह पहल शहर के लिए राहत बन सकती है, लेकिन इसकी सफलता इस पर निर्भर करेगी कि योजनाएं फाइलों से निकलकर सड़कों तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं।
एक मामला बताता है कि कानून टूट रहा है, दूसरा कि सुधार की कोशिश हो रही है, लेकिन दोनों मामलों में असल परीक्षा अमल की है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली के भाटी खुर्द इलाके में सरकारी वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
7 मई 2026 को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस बारे में अन्य लोगों के साथ डिप्टी फॉरेस्ट कंजर्वेशन ऑफिसर, प्रिंसिपल फॉरेस्ट ऑफिसर, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस से भी जवाब तलब किया गया है।
आवेदक के अनुसार, जमीन पर फार्महाउस मालिकों ने कब्जा कर लिया है, जो संबंधित अधिकारियों से जरूरी मंजूरी लिए बिना और गैर-कानूनी तरीके से पुल बना रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है।
अदालत में साझा जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने 27 अक्टूबर 2025 को सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदन देकर पूछा था कि क्या इस भूमि पर पुल निर्माण के लिए दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने कोई आदेश, सर्कुलर या टेंडर जारी किया था।
जवाब में 1 जनवरी 2026 को विभाग ने साफ किया कि संबंधित जमीन वन भूमि के रूप में दर्ज है और पुल निर्माण के लिए कोई टेंडर जारी नहीं किया गया।
क्या कानूनों को ताक पर रख दिया गया निर्माण
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के सेक्शन 2 के तहत वन भूमि का उपयोग गैर-वन कार्यों के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। ऐसे में पुल निर्माण न केवल वन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि दिल्ली मास्टर प्लान और दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 के भी खिलाफ है।
यह भी सामने आया है कि दक्षिण वन प्रभाग के रेंज फॉरेस्ट अधिकारी ने 6 मार्च 2026 को निर्माण रोकने का आदेश भी जारी किया था, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
यह मामला एक बार फिर राजधानी में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को सामने लाता है। सवाल यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड खुद जमीन को वन क्षेत्र मानते हैं, तो फिर वहां अवैध निर्माण आखिर किसकी निगरानी में जारी है?
फरीदाबाद में कचरा प्रबंधन के सुधार की तैयारी तेज, प्रशासन ने बनाई निगरानी व्यवस्था
फरीदाबाद में ठोस कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। प्रशासन ने कहा है कि हरियाणा के इस जिले में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के प्रभावी पालन के लिए मजबूत निगरानी, समीक्षा और समन्वय तंत्र विकसित किया जा रहा है।
यह जानकारी फरीदाबाद के जिला मजिस्ट्रेट और उपायुक्त की ओर से 11 मई, 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे शहर में कचरे को एकत्र करने से लेकर निपटान तक की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सके।
इसके तहत शहर के पूर्वी और पश्चिमी जोन में घर-घर से कचरा उठाने, अलग-अलग श्रेणियों में छंटाई, परिवहन और वैज्ञानिक तरीके से निपटान के लिए एकीकृत निविदाएं जारी की जा चुकी हैं। ये निविदाएं हरियाणा ई-टेंडरिंग पोर्टल पर डाली गई हैं।
नगर निगम की है कचरे के निपटान की जिम्मेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक अभी फरीदाबाद में प्रतापगढ़ और मुझेरी प्रोसेसिंग साइट पर ठोस कचरे के प्रसंस्करण और निपटान की सुविधाएं चालू हैं। इन दोनों संयंत्रों की कुल क्षमता करीब 450 टन प्रतिदिन (टीपीडी) है। इसके साथ ही नगर निगम फरीदाबाद में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए करीब 600 टन प्रतिदिन क्षमता वाला एक नया प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में जरूरी कदम उठा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शहर की सीमा के भीतर कचरे को एकत्र करने, छंटाई, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान की कानूनी जिम्मेदारी नगर निगम की है। हालांकि, फरीदाबाद जिला प्रशासन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के सुचारु क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक सहयोग, समन्वय और निगरानी में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
ऐसे में अगर ये योजनाएं जमीन पर सही ढंग से लागू होती हैं, तो फरीदाबाद के लिए यह सिर्फ कचरा निपटान की व्यवस्था नहीं, बल्कि साफ-सुथरे और स्वस्थ शहर की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
लेकिन असली चुनौती यही रहेगी कि कागजों पर बनी योजनाएं कितनी जल्दी सड़कों, मोहल्लों और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में नजर आती हैं।