पृथ्वी की हरियाली का केंद्र सालभर उत्तर-दक्षिण और पूर्व-दिशा में बदलता है, मौसम और पौधों की वृद्धि दिखाता है।
जुलाई में उत्तर, मार्च में दक्षिण, यह हरित लहर पृथ्वी की पौधों की गतिविधि और मौसम के अनुसार बदलती है।
उत्तर और पूर्व की ओर बदलाव: दशकों के आंकड़ों से पता चला कि हरियाली का केंद्र लगातार उत्तर और पूर्व की ओर बढ़ रहा है।
वातावरण में बढ़ते सीओ 2 और लंबी गर्मियों से उत्तरी गोलार्द्ध की हरियाली अधिक समय तक बनी रहती है।
यह तरीका हरियाली की दिशा, गति और पृथ्वी पर जीवन में बदलाव को समझने का शक्तिशाली उपकरण है।
वैज्ञानिकों की एक टीम ने हाल ही में पृथ्वी पर हरियाली के स्वास्थ्य और गतिविधि को मापने का नया तरीका खोजा है। इस टीम का नेतृत्व जर्मन सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव बायोडायवर्सिटी रिसर्च (आईडीआईवी), हेल्महोल्ट्ज सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल रिसर्च (यूएफजेड) और लीपजिग यूनिवर्सिटी ने किया।
इस अध्ययन का मुख्य विचार यह है कि पृथ्वी की “हरियाली का केंद्र” यानी “ग्रीन सेंटर” की स्थिति को मापा जाए। यह केंद्र हमें बताता है कि पूरी पृथ्वी की हरियाली का भार कहां केंद्रित है और यह समय के साथ कैसे बदलता है।
हरियाली का केंद्र क्या है?
शोध के अनुसार, इसका कल्पना ऐसे कीजिए जैसे आप एक पूरी तरह गोल पृथ्वी को हाथ में पकड़ें। अब हर जगह की हरी पत्तियों का एक-एक वजन मान लीजिए और उसे उस ग्लोब पर रखें। ग्लोब को पानी में डालने पर जो केंद्र नीचे की ओर दिखे, वही हरियाली का केंद्र है।
साल भर में यह केंद्र उत्तर-दक्षिण की दिशा में हिलता है, बिल्कुल एक हरित लहर की तरह।
मौसम के अनुसार हरियाली की गतिविधि
सैटेलाइट और मॉडल आंकड़ों की मदद से शोधकर्ताओं ने पाया कि हरियाली का केंद्र साल भर उत्तर-दक्षिण दिशा में चलता है -
उत्तर की ओर सबसे ज्यादा: जुलाई के मध्य में, आइसलैंड के पास
दक्षिण की ओर सबसे ज्यादा: मार्च में, लाइबेरिया के पास
इससे पता चलता है कि मौसम के अनुसार पौधों की हरियाली कैसे बदलती है। उत्तर में गर्मियों में हरियाली बढ़ती है और दक्षिण में शीतकाल में बढ़ती है।
उत्तर की ओर होने वाला बदलाव
जब शोधकर्ताओं ने कई दशकों के आंकड़ों का अध्ययन किया, तो उन्हें एक आश्चर्यजनक बात का पता चला कि हरियाली का केंद्र लगातार उत्तर की ओर बढ़ रहा है। दक्षिणी गोलार्ध में गर्मियों के समय कोई विशेष दक्षिण की ओर बदलाव नहीं देखा गया। इसके साथ ही एक पूर्व की ओर भी बदलाव हो रहा है।
पूर्व की ओर यह बदलाव खासतौर पर भारत, चीन और रूस में हरियाली के बढ़ते क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।
इस बदलाव के पीछे के कारण
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस उत्तर की ओर हरियाली के बढ़ते केंद्र के कई कारण हो सकते हैं -
वातावरण में बढ़ते कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ 2) का प्रभाव, जो पत्तियों के लिए खाद की तरह काम करता है और प्रकाश संश्लेषण को बढ़ाता है।
उत्तर गोलार्ध में लंबी बढ़ती हुई फसल अवधि और गर्म सर्दियां, जिससे पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है।
क्षेत्रीय भूमि उपयोग में बदलाव और पुनःवनरोपण
जलवायु और पारिस्थितिकी के बीच संपर्क, जैसे सूखा, आग और जानवरों की गतिविधि ये सभी कारण मिलकर पृथ्वी की हरियाली के कुल केंद्र को धीरे-धीरे उत्तर और पूर्व की ओर खिसका रहे हैं।
वैज्ञानिक नजरिए से महत्व
यह नया तरीका केवल यह नहीं बताता कि पृथ्वी कितनी हरी है, बल्कि यह दिखाता है कि हरियाली कहाँ केंद्रित है और कितनी तेजी से बदल रही है।
इसका महत्व में पृथ्वी की हरियाली की सही जानकारी मिलती है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने में मदद मिलती है। सूखा, आग, और जीव-जंतु गतिविधियों के साथ हरियाली के बदलाव को जोड़कर देखा जा सकता है। पृथ्वी की सतह पर जीवन कैसे बदल रहा है, यह समझने में आसानी होती है।
संक्षेप में, यह अध्ययन दिखाता है कि हमारी पृथ्वी लगातार बदल रही है। हरियाली का यह नया केंद्र हमें बताता है कि किस दिशा में हरियाली बढ़ रही है और किस क्षेत्र में अधिक गहन हरित क्षेत्र बन रहे हैं।
इस प्रकार, यह शोध न केवल पृथ्वी की हरियाली के बारे में जानकारी देता है, बल्कि हमें यह समझने में भी मदद करता है कि जलवायु और मानवजनित गतिविधियों के कारण हमारी पृथ्वी का जीवन धीरे-धीरे पुनःसंरचित हो रहा है।
यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है और वैश्विक हरियाली और जलवायु परिवर्तन पर नई रोशनी डालता है।