आर्थिक असमानता वैश्विक खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रही है, जिससे भोजन की उपलब्धता और वास्तविक पहुंच में अंतर बढ़ता है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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महंगा परिवहन व आर्थिक असमानता जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने में बन रही बड़ी बाधा

भोजन की कमी सिर्फ उत्पादन की समस्या नहीं, महंगी परिवहन व्यवस्था और आर्थिक असमानता भी वैश्विक खाद्य सुरक्षा के रास्ते में बड़ी बाधा बनकर उभर रही है

Dayanidhi

  • एशिया के दक्षिणी, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भोजन की मांग पूरी न होने की समस्या सबसे ज्यादा देखी गई।

  • खाद्य उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद महंगी परिवहन व्यवस्था के कारण जरूरतमंद क्षेत्रों तक भोजन पहुंचना बड़ी चुनौती बन रहा है।

  • आर्थिक असमानता वैश्विक खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रही है, जिससे भोजन की उपलब्धता और वास्तविक पहुंच में अंतर बढ़ता है।

  • अफ्रीका में परिवहन लागत बढ़ने से घरेलू उत्पादन का बड़ा हिस्सा लोगों तक पहुंचने के बजाय आपूर्ति व्यवस्था में अटक जाता है।

  • सड़कों, बंदरगाहों और समुद्री परिवहन को मजबूत करना वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुधारने के लिए बेहद जरूरी कदम माना गया है।

दुनिया में खाद्य सुरक्षा को लेकर अब तक मुख्य तौर पर गौर इस बात पर रहा है कि पर्याप्त मात्रा में भोजन पैदा हो रहा है या नहीं। लेकिन फिनलैंड में हुई एक नई स्टडी ने बताया है कि केवल भोजन का उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है। भोजन उन लोगों तक समय पर और उचित कीमत पर पहुंचे, यह भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए मजबूत यातायात व्यवस्था और आर्थिक समानता की जरूरत है।

फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ओउलू के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भोजन की उपलब्धता और उसे लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था का अध्ययन किया। इस शोध में आल्टो यूनिवर्सिटी और पेलर्वो इकोनॉमिक रिसर्च के विशेषज्ञ भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने भोजन के उत्पादन, लोगों की जरूरत, परिवहन के साधनों और भोजन पहुंचाने की लागत से जुड़े आंकड़ों को एक साथ देखा। यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ क्लीनर प्रोडक्शन' में प्रकाशित किया गया है।

भोजन है, लेकिन हर जगह पहुंच नहीं रहा

शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया में कुल मिलाकर पर्याप्त भोजन उपलब्ध होने के बावजूद हर क्षेत्र में लोगों को जरूरत के अनुसार भोजन नहीं मिल पाता। इसका एक बड़ा कारण परिवहन व्यवस्था है। यदि किसी देश या क्षेत्र में भोजन का उत्पादन कम है, तो दूसरे क्षेत्र से भोजन वहां पहुंचाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए सड़क, समुद्री मार्ग और दूसरी परिवहन सुविधाएं मजबूत होना जरूरी है।

अगर परिवहन की लागत बहुत अधिक हो, तो भोजन को एक जगह से दूसरी जगह भेजना महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जिनकी आय कम है। इस तरह भोजन उपलब्ध होने के बावजूद वह जरूरतमंद लोगों की पहुंच से बाहर रह सकता है।

एशिया में सबसे ज्यादा असर

अध्ययन में पाया गया कि भोजन की सबसे अधिक कमी एशिया के कई हिस्सों में दिखाई देती है। खास तौर पर दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया में भोजन की मांग और उसकी पहुंच के बीच बड़ा अंतर देखा गया।

इन क्षेत्रों में बड़ी आबादी रहती है और भोजन की जरूरत भी बहुत अधिक है। इसलिए यदि परिवहन व्यवस्था में रुकावट आती है या भोजन पहुंचाने की लागत बढ़ती है, तो इसका असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ सकता है।

अफ्रीका में परिवहन लागत बड़ी चुनौती

अफ्रीका से जुड़े परिणाम भी महत्वपूर्ण हैं। जब शोधकर्ताओं ने यह मानकर अध्ययन किया कि हर क्षेत्र में परिवहन की लागत समान है, तो अफ्रीका के बड़े हिस्से में घरेलू भोजन उत्पादन लोगों तक पहुंचने योग्य दिखाई दिया। लेकिन जब वास्तविक आर्थिक अंतर और अधिक परिवहन लागत को ध्यान में रखा गया, तो काफी मात्रा में भोजन लोगों तक नहीं पहुंच पाया।

इससे साफ होता है कि केवल स्थानीय स्तर पर भोजन पैदा करना पर्याप्त नहीं है। सड़कें, बंदरगाह, समुद्री परिवहन और अन्य सुविधाएं भी मजबूत होनी चाहिए, ताकि भोजन कम लागत में जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंच सके।

आर्थिक असमानता ने बढ़ाई समस्या

अध्ययन में आर्थिक असमानता को सबसे प्रभावशाली कारणों में पाया गया। अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की आय और भोजन पर खर्च करने की क्षमता अलग होती है। जब इन अंतर को अध्ययन में शामिल किया गया, तो एक तरफ कुछ जगहों पर भोजन का अतिरिक्त भंडार बढ़ा, जबकि दूसरी तरफ लोगों की जरूरत पूरी नहीं हो सकी।

इसका मतलब है कि दुनिया की खाद्य व्यवस्था में भोजन मौजूद हो सकता है, लेकिन आर्थिक कारणों से वह सही जगह तक नहीं पहुंच पाता। गरीब क्षेत्रों के लिए महंगा परिवहन और कम खरीद क्षमता एक साथ बड़ी समस्या बन जाती है।

छह प्रमुख फसलों का अध्ययन

शोधकर्ताओं ने छह प्रमुख फसल समूहों से मिलने वाली खाद्य ऊर्जा का अध्ययन किया। इनमें गेहूं, जौ और राई जैसे अनाज, मक्का, चावल, बाजरा और ज्वार जैसे उष्णकटिबंधीय अनाज, कसावा तथा दालें शामिल थीं। ये फसलें दुनिया के अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार में जाने वाली कुल कैलोरी का लगभग आधा हिस्सा उपलब्ध कराती हैं।

अध्ययन में तीन अलग-अलग परिस्थितियों को देखा गया। पहली स्थिति में सभी क्षेत्रों में परिवहन लागत समान मानी गई। दूसरी में अलग-अलग क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति और परिवहन लागत के अंतर को शामिल किया गया। तीसरी स्थिति में उत्पादन में कमी और परिवहन ढांचे को होने वाले नुकसान जैसे संकटों का अध्ययन किया गया।

मजबूत परिवहन तंत्र जरूरी

यूनिवर्सिटी ऑफ ओउलू के शोधकर्ताओं के अनुसार, परिवहन नेटवर्क दुनिया की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए भविष्य में खाद्य सुरक्षा की योजना बनाते समय केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा।

सड़कों, बंदरगाहों और समुद्री परिवहन को बेहतर बनाना होगा। साथ ही परिवहन की लागत कम करने और आर्थिक असमानता घटाने की दिशा में भी काम करना होगा। प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट के समय परिवहन व्यवस्था जल्दी बहाल हो सके, इसके लिए भी मजबूत ढांचा जरूरी है।

यह अध्ययन साफ संदेश देता है कि भोजन पैदा करना और भोजन पहुंचाना, दोनों मिलकर ही वास्तविक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। दुनिया में भोजन की कमी दूर करने के लिए खेतों के साथ-साथ सड़कों, बंदरगाहों, बाजारों और गरीब लोगों की आर्थिक क्षमता पर भी ध्यान देना होगा।