जलवायु और गतिविधि: पैदल चलना, साइकिल, और सार्वजनिक परिवहन कार्बन उत्सर्जन कम करते हैं और पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सुधार लाते हैं। फोटो साभार: आईस्टॉक
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शारीरिक निष्क्रियता से हर साल 50 लाख मौतें, फिर भी लोग सक्रिय जीवनशैली क्यों नहीं अपनाते?

एक नए शोध में पाया गया कि शारीरिक गतिविधि न केवल स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभा सकती है

Dayanidhi

  • वैश्विक शारीरिक निष्क्रियता: पिछले दो दशकों में वैश्विक शारीरिक गतिविधि में कोई सुधार नहीं हुआ, लाखों मौतें होती हैं।

  • जलवायु और गतिविधि: पैदल चलना, साइकिल, और सार्वजनिक परिवहन कार्बन उत्सर्जन कम करते हैं और पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सुधार लाते हैं।

  • सामाजिक असमानताएं: अमीर पुरुषों को मनोरंजन गतिविधियों तक अधिक पहुंच, गरीब महिलाएं और कम आय वाले लोग शारीरिक गतिविधि में पीछे।

  • स्वास्थ्य लाभ: नियमित शारीरिक गतिविधि प्रतिरक्षा मजबूत करती है, अवसाद कम करती है, कैंसर के परिणाम बेहतर बनाती है।

  • नीति और कार्यान्वयन: कई देशों में नीतियां हैं, लेकिन मल्टी-सेक्टोरल सहयोग, स्पष्ट लक्ष्य और कार्यान्वयन में गंभीर कमी देखी जाती है।

आज की आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि का महत्व बहुत बढ़ गया है। फिर भी दुनिया भर में लोगों की सक्रियता में पिछले दो दशकों में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। हाल ही में प्रकाशित शोध पत्रों, नेचर मेडिसिन और नेचर हेल्थ में बताया गया है कि शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नीतियां अभी तक अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई हैं। इन अध्ययनों के अनुसार, यदि लोगों को अधिक सक्रिय नहीं बनाया गया तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और समाज दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।

शारीरिक निष्क्रियता एक वैश्विक समस्या

शारीरिक निष्क्रियता आज दुनिया भर में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 50 लाख से अधिक मौतें शारीरिक गतिविधि की कमी से जुड़ी होती हैं। इसके बावजूद दुनिया के अधिकांश लोग स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए मानकों को पूरा नहीं कर पाते।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वयस्कों को हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। बच्चों और किशोरों को प्रतिदिन लगभग 60 मिनट सक्रिय रहना चाहिए।

लेकिन वास्तविकता यह है कि लगभग तीन में से एक वयस्क और दस में से आठ किशोर इन मानकों को पूरा नहीं कर पाते। इसका असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है।

सामाजिक और आर्थिक असमानताएं

शोध पत्र में कहा गया है कि शोधकर्ताओं ने 68 देशों के आंकड़ों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि दुनिया के अलग-अलग वर्गों में शारीरिक गतिविधि के अवसरों में बड़ी असमानता है।

उदाहरण के लिए, मनोरंजन के लिए की जाने वाली गतिविधियां जैसे जॉगिंग, खेलकूद या जिम अधिकतर संपन्न और विकसित देशों के लोगों में ज्यादा देखी जाती हैं। शोध के अनुसार, उच्च आय वाले देशों के अमीर पुरुषों की तुलना में कम आय वाले देशों की गरीब महिलाओं के पास ऐसी गतिविधियों तक पहुंच लगभग 40 प्रतिशत कम होती है।

दूसरी ओर, गरीब और वंचित वर्ग के लोग अक्सर आर्थिक जरूरतों के कारण शारीरिक श्रम करते हैं, जैसे खेती, मजदूरी या पैदल चलकर काम पर जाना। इसका मतलब यह है कि उनकी गतिविधि पसंद से नहीं बल्कि मजबूरी से होती है।

शारीरिक गतिविधि के स्वास्थ्य को फायदा

नियमित शारीरिक गतिविधि के कई बड़े लाभ होते हैं। यह केवल शरीर को फिट रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करती है।

शोध के अनुसार, नियमित गतिविधि से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, संक्रामक रोगों का जोखिम कम होता है, अवसाद और तनाव में कमी आती है, कैंसर के रोगियों में बेहतर परिणाम देखे जाते हैं। इसलिए डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा सक्रिय जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं।

जलवायु परिवर्तन और शारीरिक गतिविधि

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि शारीरिक गतिविधि और जलवायु परिवर्तन के बीच गहरा संबंध है। यदि लोग कारों की बजाय पैदल चलने, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, तो इससे कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती लू या हीटवेव, अत्यधिक गर्मी और चरम मौसम की घटनाएं लोगों के लिए बाहर जाकर व्यायाम करना मुश्किल बना सकती हैं। इसलिए भविष्य की नीतियों में स्वास्थ्य और जलवायु दोनों को साथ-साथ ध्यान में रखना जरूरी है।

नीतियों में कमी और चुनौतियां

एक अन्य अध्ययन में 200 देशों की 661 राष्ट्रीय नीतियों का विश्लेषण किया गया। यह अध्ययन 2004 से 2025 के बीच लागू की गई नीतियों पर आधारित था।अध्ययन में पाया गया कि कई देशों ने शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए नीतियां तो बनाई हैं, लेकिन उनके कार्यान्वयन में कमी है।

कुछ प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं -

  • केवल लगभग 38.7 फीसदी नीतियों में कई सरकारी विभागों का सहयोग शामिल है

  • लगभग 26.5 फीसदी देशों में नीतियों के स्पष्ट लक्ष्य ही निर्धारित नहीं हैं

इसके अलावा, विशेषज्ञों ने बताया कि सरकारों में इस विषय को अभी भी पर्याप्त राजनीतिक प्राथमिकता नहीं मिल रही है।

आगे का रास्ता

शोधकर्ताओं का मानना है कि शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग की नीतियां पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए शिक्षा, परिवहन, शहरी नियोजन और पर्यावरण जैसे कई क्षेत्रों को साथ मिलकर काम करना होगा।

शोध पत्र में शोधकर्ताओं के हवाले से कुछ प्रमुख सुझाव दिए हैं -

  • नीतियों में स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्य तय किए जाएं

  • विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर सहयोग हो

  • शहरों को इस तरह विकसित किया जाए कि लोग आसानी से पैदल या साइकिल से यात्रा कर सकें

  • समाज के कमजोर वर्गों को विशेष ध्यान दिया जाए

स्पष्ट है कि शारीरिक गतिविधि केवल व्यक्तिगत आदत का विषय नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और नीतिगत मुद्दा है। यदि सरकारें, समाज और विभिन्न संस्थाएं मिलकर काम करें, तो लोगों को अधिक सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इससे न केवल स्वास्थ्य में सुधार होगा बल्कि पर्यावरण और समाज के समग्र विकास में भी मदद मिलेगी।