2026 के आखिर तक अल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना है, जिससे 2027 के रिकॉर्ड में सबसे गर्म वर्ष बनने का खतरा बढ़ सकता है; फोटो: आईस्टॉक 
जलवायु

सावधान! अब और तपेगी दुनिया: वैज्ञानिकों ने चेताया 2030 तक 1.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है तापमान

यह सिर्फ मौसम के बदलते आंकड़े नहीं बल्कि हमारी सुलगती धरती की चीख है, जहां अगले पांच साल हमारी फसलों, नदियों और आने वाली नस्लों का भविष्य झुलसाने के लिए तैयार खड़े हैं।

Lalit Maurya

  • धरती लगातार तप रही है और आने वाले पांच साल इस संकट को और भयावह बना सकते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और ब्रिटेन के मौसम विभाग की नई रिपोर्ट के मुताबिक 2026 से 2030 के बीच वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से पहले की तुलना में 1.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।

  • वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगले पांच वर्षों में गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं और 86 फीसदी आशंका है कि इस दौरान कोई एक साल इतिहास का सबसे गर्म साल बनेगा।

  • रिपोर्ट के अनुसार 91 फीसदी आशंका है कि इन वर्षों में कम से कम एक बार तापमान अस्थाई रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार कर जाएगा।

  • वैज्ञानिकों ने यह भी चेताया है कि आर्कटिक क्षेत्र दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में साढ़े तीन गुना तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे समुद्री बर्फ तेजी से पिघलेगी। वहीं मौसम का मिजाज भी पूरी तरह बदल सकता है।

  • कहीं बाढ़ का खतरा बढ़ेगा तो कहीं सूखे की मार गहराएगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह केवल बढ़ते तापमान की कहानी नहीं, बल्कि हमारी खेती, पानी, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर मंडराता गंभीर संकट है।

हम जिस दुनिया को जानते थे वो पहले जैसी नहीं रही। धरती लगातार तप रही है। हर गुजरते साल के साथ गर्मी के नए रिकॉर्ड टूट रहे हैं, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जंगल जल रहे हैं और मौसम पहले से कहीं ज्यादा बेरहम होता जा रहा है।

इन सब के बीच अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले पांच साल इंसानों के लिए और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और ब्रिटेन के मौसम विभाग ने अपनी नई रिपोर्ट में चेताया है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर के आसपास बना रह सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान दुनिया का औसत तापमान औद्योगिक काल (1850-1900) से पहले की तुलना में 1.9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है। मतलब कि इस बीच दुनिया भर में गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं।

पांच सालों में धरती को और चढ़ेगा बुखार

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात की 86 फीसदी आशंका है कि अगले पांच सालों में कोई एक साल ऐसा होगा, जो इतिहास का अब तक का सबसे गर्म साल साबित होगा और 2024 की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी को भी पीछे छोड़ देगा। गौरतलब है कि 2024 में भी वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से पहले की तुलना में करीब 1.55 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था।

इतना ही नहीं, इस बात की 91 फीसदी आशंका है कि इन पांच वर्षों में कम से कम एक साल ऐसा होगा जब तापमान अस्थाई रूप से डेढ़ डिग्री सेल्सियस की लक्ष्मण रेखा को पार कर जाएगा।

लक्ष्मण रेखा के करीब पहुंची ग्लोबल वॉर्मिंग

वैज्ञानिकों ने इस बात की 75 फीसदी आशंका जताई है कि इन पांच वर्षों में औसत वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से पहले की तुलना में डेढ़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहेगा। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले पांच वर्षों में किसी एक साल का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की आशंका एक फीसदी से भी कम है।

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी एक साल में तापमान के डेढ़ डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने का मतलब यह नहीं है कि हम जलवायु परिवर्तन की जंग पूरी तरह हार गए हैं। पेरिस समझौते का लक्ष्य तापमान को लंबे समय (करीब 20 साल के औसत) तक डेढ़ डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना है।

लेकिन, यह बार-बार होने वाली अस्थाई बढ़ोतरी इस बात का सबूत है कि हम खतरे के मुहाने पर खड़े हैं।

हालांकि वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जैसे-जैसे धरती गर्म होती जाएगी, इस सीमा को अस्थाई रूप से पार करने की घटनाएं और बढ़ेंगी।

अल नीनो का साया, मौसम बेसाया

रिपोर्ट से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर लियोन हरमनसन के मुताबिक, 2026 के आखिर तक अल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना है, जिससे 2027 के रिकॉर्ड में सबसे गर्म वर्ष बनने का खतरा बढ़ सकता है। बता दें कि अल नीनो का सीधा मतलब है समुद्र का गर्म होना, जो मौसम का मिजाज बिगाड़ देता है। इसी वजह से साल 2027 के इतिहास का सबसे गर्म साल होने की सबसे ज्यादा आशंका है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ती गर्मी अब केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन, कृषि, जल स्रोतों और स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डाल रही है।

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि आने वाले पांच वर्षों में आर्कटिक दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से गर्म होगा। आशंका है कि उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों (नवंबर से मार्च) में यहां का तापमान सामान्य से करीब 2.8 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। यह इस अवधि में तापमान में होने वाली वैश्विक औसत वृद्धि से साढ़े तीन गुणा से भी अधिक है।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इससे खासकर बेरेंट्स सागर, बेरिंग सागर और ओखोत्स्क सागर में समुद्री बर्फ तेजी से घटेगी। यह बदलती आबोहवा हमारे खेतों, हमारी नदियों और हमारे जीवन को सीधे प्रभावित करने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक मौसम का चक्र पूरी तरह गड़बड़ाने वाला है।

कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे का खतरा

डब्ल्यूएमओ ने रिपोर्ट में बारिश के पैटर्न में भी बड़े बदलाव की आशंका जताई है। इन पांच सालों में मई से सितम्बर के बीच उत्तरी यूरोप, साइबेरिया, अलास्का और अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।

अमेजन जैसे इलाकों में सूखे की स्थिति बनने की आशंका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक गर्म होती दुनिया में यही पैटर्न उभर रहा है, कुछ क्षेत्रों में जहां भारी बारिश होगी, वहीं दूसरे हिस्सों में गंभीर सूखा पड़ सकता है।

डब्ल्यूएमओ का कहना है कि ये अनुमान दुनिया भर की मौसम एजेंसियों और जलवायु वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं, ताकि सरकारें समय रहते जलवायु संकट से निपटने की तैयारी कर सकें। लेकिन सवाल यही है कि क्या दुनिया इन चेतावनियों को गंभीरता से लेगी, या फिर बढ़ती गर्मी आने वाले वर्षों में करोड़ों लोगों के जीवन को और मुश्किल बना देगी।

सच कहें तो यह रिपोर्ट केवल मौसम का हाल नहीं है, बल्कि प्रकृति की आखिरी पुकार है। अगर हम अब भी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियों को एक झुलसती, बेहाल धरती विरासत में मिलेगी।