सबसे अधिक कार्बन वृद्धि सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों जैसे राजस्थान और गुजरात में होने की संभावना जताई गई है। फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

सदी के अंत तक भारत के जंगलों में 97% तक कार्बन वृद्धि संभव, लेकिन कटाई-आग और जलवायु जोखिम से लाभ अस्थिर होने की आशंका

यह अध्ययन बताता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के जंगलों में भविष्य में कार्बन भंडारण बढ़ सकता है, लेकिन इसके साथ खतरे भी जुड़े हैं।

Dayanidhi

  • अध्ययन के अनुसार, भारत के जंगलों में इस सदी के अंत तक कार्बन भंडारण लगभग दोगुना हो सकता है।

  • बारिश में वृद्धि और वायुमंडल में अधिक सीओ 2 जंगलों की वृद्धि और कार्बन संग्रह बढ़ाने के मुख्य कारण बताए गए हैं।

  • 2030 तक सभी जलवायु परिदृश्यों में समान वृद्धि दिखती है, लेकिन 2050 के बाद अंतर बहुत तेजी से बढ़ जाता है।

  • सबसे अधिक कार्बन वृद्धि सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों जैसे राजस्थान और गुजरात में होने की संभावना जताई गई है।

  • जंगलों में बढ़ोतरी के बावजूद कटाई, आग और जलवायु संबंधी खतरे इसे अस्थिर बनाकर कार्बन वापस वातावरण में छोड़ सकते हैं।

हाल ही में प्रकाशित एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह कहा गया है कि इस सदी के अंत तक भारत के जंगलों में कार्बन जमा होने की मात्रा लगभग दोगुनी हो सकती है। इस अध्ययन में भारतीय शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की है कि जलवायु परिवर्तन का भारत के जंगलों पर भविष्य में क्या असर पड़ेगा। यह अध्ययन एनवायर्नमेंटल रिसर्च : क्लाइमेट नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

क्या कहता है अध्ययन?

अध्ययन के अनुसार, विभिन्न परिस्थितियों में जंगलों में कार्बन की मात्रा अलग-अलग तरह से बढ़ेगी। अगर प्रदूषण कम रहता है, तो कार्बन लगभग 35 फीसदी तक बढ़ सकता है। मध्यम स्तर के प्रदूषण में यह बढ़ोतरी 62 फीसदी तक हो सकती है। वहीं अगर प्रदूषण बहुत ज्यादा हुआ, तो यह बढ़ोतरी 97 फीसदी तक पहुंच सकती है।

शुरुआती वर्षों में, यानी 2030 तक, सभी स्थितियों में लगभग समान वृद्धि दिखती है। लेकिन इसके बाद अंतर साफ दिखने लगता है और 2050 के बाद तेजी से बदलाव आता है।

बढ़ोतरी क्यों हो रही है?

वैज्ञानिकों ने इसके दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला है बारिश में बढ़ोतरी। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के कई हिस्सों में ज्यादा बारिश होने की संभावना है। ज्यादा पानी मिलने से पेड़ों और पौधों की वृद्धि तेज हो सकती है।

दूसरा कारण है हवा में कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) की मात्रा बढ़ना। ज्यादा सीओ2 होने से पौधे तेजी से प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जिससे उनकी वृद्धि बढ़ती है। इससे जंगलों में कुल कार्बन जमा होने की मात्रा भी बढ़ जाती है। हालांकि यह असर तुरंत नहीं दिखता। पेड़ों को बढ़ने में समय लगता है, इसलिए बारिश और सीओ2 के असर का परिणाम कुछ साल बाद दिखाई देता है।

किन क्षेत्रों में होगा ज्यादा असर

इस अध्ययन में एक दिलचस्प बात सामने आई है कि सबसे ज्यादा बढ़ोतरी घने जंगलों में नहीं, बल्कि सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में होगी। जैसे राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में कार्बन भंडारण 60 फीसदी से ज्यादा बढ़ सकता है।

वहीं पश्चिमी घाट और हिमालय जैसे क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी कम होगी। इसका कारण यह है कि ये इलाके पहले से ही घने और संतुलित जंगलों वाले हैं, जहां ज्यादा विस्तार की गुंजाइश कम है।

क्या यह अच्छी खबर है

पहली नजर में यह खबर अच्छी लग सकती है कि जंगलों में कार्बन बढ़ेगा। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे पूरी तरह अच्छा नहीं माना जा सकता। इसका कारण यह है कि यह बढ़ोतरी जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही है, जो अपने आप में एक बड़ी समस्या है।

इसके अलावा इस मॉडल में कई वास्तविक खतरों को शामिल नहीं किया गया है, जैसे जंगलों के काटे जाने, आग लगना, सूखा, कीटों का हमला और जमीन के उपयोग में बदलाव। ये सभी कारण जंगलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जमा हुआ कार्बन वापस वातावरण में जा सकता है।

आधिकारिक आंकड़ों से अंतर

भारत में जंगलों से जुड़े आधिकारिक आंकड़े फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए जाते हैं। इनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कार्बन भंडारण में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है।

2013 में यह लगभग 6.94 अरब टन था, जो 2023 में बढ़कर 7.29 अरब टन हो गया है। 2030 तक इसके 8.65 अरब टन तक पहुंचने का अनुमान है। ये आंकड़े जमीन पर किए गए सर्वे और उपग्रह के आंकड़ों पर आधारित हैं, जबकि नया अध्ययन भविष्य के अनुमान पर आधारित है।

आगे क्या करना चाहिए

इस अध्ययन से यह साफ होता है कि भारत के जंगल हर जगह एक जैसे नहीं हैं और उनका भविष्य भी अलग-अलग होगा। इसलिए जंगलों की सुरक्षा के लिए एक जैसी नीति काम नहीं करेगी।

हमें क्षेत्र के अनुसार योजनाएं बनानी होंगी, जिसमें स्थानीय जलवायु, जोखिम और जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। साथ ही, जंगलों को आग, कटाई और अन्य खतरों से बचाना भी बहुत जरूरी है।

कुल मिलाकर, यह अध्ययन हमें एक अहम संदेश देता है। भले ही भविष्य में जंगलों में कार्बन बढ़ सकता है, लेकिन यह जलवायु परिवर्तन का सकारात्मक असर नहीं है। इसके साथ कई खतरे भी जुड़े हुए हैं।

इसलिए जरूरी है कि हम जंगलों की सुरक्षा करें और जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए गंभीर कदम उठाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रह सके।