

अक्टूबर 2026 में देश के 267 शहरों में से 261 शहरों की हवा में पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय दैनिक सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक रहा। इस महीने उत्तर प्रदेश वायु प्रदूषण के बड़े हॉटस्पॉट के रूप में सामने आया। देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में छह उत्तर प्रदेश के हैं।
स्वतंत्र शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने सीएएक्यूएमएस से प्राप्त 267 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद एक रिपोर्ट जारी की। सीएएक्यूएमएस से आशय नियमित परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से हैं, जो केंद्र व राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा स्थापित किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2026 में बड़ौत में पीएम2.5 का मासिक औसत स्तर 87 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक था।
राष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरे 229 शहर
अक्टूबर 2026 में देश के 267 शहरों में से 229 शहरों में पीएम2.5 का स्तर भारत के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों की तय सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम रहा। इन शहरों में कम से कम 80 फीसदी दिनों के लिए हवा की गुणवत्ता मापने वाले स्वचालित निगरानी केंद्रों के आंकड़े उपलब्ध थे।
हालांकि, स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के दैनिक सुरक्षित मानक 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर खरे उतरने वाले शहरों की संख्या महज छह रही।
रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत शामिल 97 शहरों में से 90 शहरों में अक्टूबर 2026 का औसत पीएम2.5 स्तर भारत के दैनिक राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक यानी 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा के भीतर रहा। हालांकि, इनमें से 95 शहरों में पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की दैनिक सुरक्षित सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में शामिल नहीं किए गए 170 शहरों में से 166 शहरों में पीएम2.5 का मासिक औसत स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की दैनिक सुरक्षित सीमा से अधिक रहा। वहीं, 31 शहरों में पीएम2.5 का स्तर भारत के राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी अधिक दर्ज किया गया।
यहां यह उल्लेखनीय है कि दोनों श्रेणियों के आंकड़े उन शहरों के हैं, जहां 80 फीसदी से अधिक दिनों का निगरानी डेटा उपलब्ध था।
टॉप-10 में यूपी के छह शहर
सीआरईए की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश का बड़ौत अक्टूबर 2026 में देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां पीएम2.5 का मासिक औसत स्तर 87 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। महीने में निगरानी के 29 दिनों में से 24 दिन पीएम2.5 का स्तर भारत के राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक रहा।
बड़ौत में अक्टूबर के दौरान पांच दिन हवा की गुणवत्ता बेहद खराब, पांच दिन खराब और 14 दिन मध्यम श्रेणी में रही। वहीं, चार दिन हवा संतोषजनक और एक दिन अच्छी श्रेणी में दर्ज की गई।
उत्तर प्रदेश का ही खोड़ा 85 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पीएम2.5 के मासिक औसत के साथ देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां दो दिन हवा की गुणवत्ता बेहद खराब, नौ दिन खराब और 17 दिन मध्यम श्रेणी में रही। इसके अलावा दो दिन हवा संतोषजनक और एक दिन अच्छी श्रेणी में दर्ज की गई।
देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में गजरौला तीसरे और मेरठ दसवें स्थान पर रहा। इस सूची में यमुनानगर, गाजियाबाद, मानेसर, गुम्मिडिपूंडी, बहादुरगढ़ और नोएडा भी शामिल रहे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह, हरियाणा के तीन और तमिलनाडु का एक शहर शामिल था।
राष्ट्रीय मानक से हरियाणा के 11 शहरों में प्रदूषण ज्यादा
रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 2026 में उत्तर प्रदेश के 13 शहरों में पीएम2.5 का स्तर भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक दर्ज किया गया। इस मामले में हरियाणा के 11 शहर दूसरे स्थान पर रहे।
इसके अलावा गुजरात के तीन, जबकि मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के दो-दो शहरों में पीएम2.5 का स्तर तय राष्ट्रीय मानक से अधिक रहा। बिहार, महाराष्ट्र, मेघालय, दिल्ली और तमिलनाडु के एक-एक शहर में भी प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक से ऊपर दर्ज किया गया।
मिजोरम का आइजोल देश का सबसे साफ शहर
अक्टूबर 2026 में मिजोरम की राजधानी आइजोल देश का सबसे साफ शहर रहा। यहां पीएम2.5 का मासिक औसत स्तर महज चार माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसके बाद उत्तराखंड का ऋषिकेश और जम्मू-कश्मीर का लेह सबसे साफ शहरों में शामिल रहे।
देश के 10 सबसे साफ शहरों की सूची में जम्मू-कश्मीर के दो शहर शामिल थे। इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, सिक्किम और उत्तराखंड के एक-एक शहर ने जगह बनाई।