

केंद्रीय प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड द्वारा दो नवंबर 2026 की शाम चार बजे बुलेटिन जारी किया गया
देश के आठ शहरों में एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया
दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 324 रिकॉर्ड किया गया
उत्तर प्रदेश का गजरौला सबसे प्रदूषित (389 एक्यूआई) रहा
बुलेटिन के अनुसार, गंगटोक (सिक्किम) देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 21 दर्ज किया गया। इसके बाद आइजोल (22) और नयागढ़ (24) रहे
देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2 नवंबर 2026 को शाम 4 बजे जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई ) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 34 शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब या उससे भी बदतर श्रेणी में दर्ज की गई। इनमें आठ शहर ऐसे हैं जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार पहुंच गया है और हवा की स्थिति बहुत खराब श्रेणी में है। वहीं, 26 शहरों में हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बुलेटिन के मुताबिक, गजरौला में सबसे अधिक 389 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके बाद बड़ौत में 341, हापुड़ में 339, नोएडा में 330, दिल्ली में 324, खोड़ा में 319, कैथल में 310 और फतेहपुर सीकरी में 306 एक्यूआई रहा। इन सभी आठ शहरों में प्रमुख प्रदूषक पीएम2.5 दर्ज किया गया।
उत्तर प्रदेश के शहरों में प्रदूषण का अधिक असर
बहुत खराब वायु गुणवत्ता वाले आठ शहरों में सात उत्तर प्रदेश के हैं। इनमें गजरौला, बड़ौत, हापुड़, नोएडा, खोड़ा और फतेहपुर सीकरी शामिल हैं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी हवा खराब श्रेणी में रही। बुलंदशहर में एक्यूआई 289, ग्रेटर नोएडा में 289, गाजियाबाद में 289, मोदीनगर में 287, खुर्जा में 290, मुजफ्फरनगर में 257 और मेरठ में 234 दर्ज किया गया। वहीं, बरेली में 131 और आगरा में 172 एक्यूआई रहा, जो मध्यम श्रेणी में है।
खराब श्रेणी में शामिल 26 शहर
बुलेटिन के मुताबिक, 201 से 300 के बीच एक्यूआई वाले 26 शहरों में अंबाला (285), अनपरा (204), बल्लभगढ़ (278), भरतपुर (204), भिवाड़ी (208), बीकानेर (261), बुलंदशहर (289), धारूहेड़ा (298), गाजियाबाद (289), ग्रेटर नोएडा (289), गुरुग्राम (246), ग्वालियर (257), हनुमानगढ़ (214), जैसलमेर (233), खुर्जा (290), कुरुक्षेत्र (258), लुधियाना (214), मानेसर (211), मेरठ (234), मोदीनगर (287), मुजफ्फरनगर (257), पंचगांव (214), पटियाला (239), सिंगरौली (203), श्रीगंगानगर (203) और यमुनानगर (208) शामिल हैं।
केवल 32 शहरों की हवा है साफ
बुलेटिन में शामिल 268 शहरों में से 136 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक, 66 में मध्यम और 32 में अच्छी श्रेणी में दर्ज की गई। एक्यूआई 0–50 अच्छी, 51–100 संतोषजनक, 101–200 मध्यम, 201–300 खराब, 301–400 बहुत खराब और 401–500 गंभीर श्रेणी में आता है।
संतोषजनक श्रेणी वाले शहरों में अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भावनगर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, व्यासनगर, बायर्निहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छल, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दावणगेरे, देहरादून, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालना, जमुई, झालावाड़, जोरापोखर, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कारवार, कटिहार, खन्ना, किऊल, कोहिमा, कोलार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलगुन, नांदेड़, नवी मुंबई, नेल्लोर, पंपोर, पानीपत, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सतारा, सतना, शिलांग, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सीतामढ़ी, शिवसागर, सीवान, सोलापुर, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तूतीकोरिन, तिरुमाला, तिरुपति, तुमिडीह, उडुपी, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा और यादगिर शामिल हैं।
वहीं, मध्यम श्रेणी में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमृतसर, बद्दी, बारां, बरेली, बाड़मेर, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बूंदी, बायर्निहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, देवास, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गोपालगंज, गुम्मिडिपूंडी, हिसार, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालौर, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कानपुर, करौली, कटनी, खैरथल, कोटा, कुंजेमुरा, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मथुरा, मुरादाबाद, नागौर, नारनौल, नासिक, पीथमपुर, रायचूर, राजकोट, रोहतक, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, सोनीपत, उदयपुर, उज्जैन, वटवा और वृंदावन शामिल हैं।
अच्छी श्रेणी में आइजोल, अमरावती, बदलापुर, बारबिल, बारिपदा, बीड, भिलाई, भुवनेश्वर, बिहारशरीफ, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दरभंगा, गंगटोक, काकीनाडा, करनाल, किशनगंज, कोरबा, मधुबनी, मडिकेरी, नलबाड़ी, नयागढ़, ओंगोल, पलवल, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राउरकेला, शिवमोगा, सुकुआती, तालचर, त्रिशूर, विजयपुरा और विशाखापत्तनम शामिल हैं।
पीएम2.5 बना प्रमुख प्रदूषक
बहुत खराब श्रेणी में शामिल सभी आठ शहरों में पीएम2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा। पीएम2.5 ऐसे सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के साथ फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
बुलेटिन में दिए गए स्वास्थ्य संबंधी वर्गीकरण के मुताबिक, 201 से 300 के बीच एक्यूआई वाली खराब श्रेणी में लंबे समय तक रहने पर अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। वहीं, 301 से 400 के बीच की बहुत खराब श्रेणी में लंबे समय तक रहने से श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।