पराली में आग लगनी शुरू, एमपी पहले, पंजाब दूसरे और यूपी तीसरे नंबर पर

6 अक्टूबर को पराली में आग की 73 प्रतिशत घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज की गईं
मध्य प्रदेश में पराली में आग की बढ़ती घटनाएं प्रदेश में धान के बढ़ते चलन की देन हैं। फोटो : विकास चौधरी
मध्य प्रदेश में पराली में आग की बढ़ती घटनाएं प्रदेश में धान के बढ़ते चलन की देन हैं। फोटो : विकास चौधरी
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पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में पराली में आग लगाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोईकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (सीआरईएएमएस) द्वारा 6 अक्टूबर को जारी बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर 2026 और 6 अक्टूबर 2026 के बीच सात राज्यों में कुल 287 स्थानों पर फसल अवशेष जलाने की घटनाएं देखी गईं।

ये घटनाएं पंजाब, हरियाणा, यूपी, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में क्रमशः 88, 04, 65, 01, 10, 01 और 118 थीं। बुलेटिन के मुताबिक, पूर्वी-दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बादलों की वजह से और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में घने बादलों के कारण फसल अवशेष जलाने की घटनाओं का पता लगाने में रुकावट आई। सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके फसल अवशेष जलाने की घटनाओं का अनुमान लगाने के लिए सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग के जरिए धान के अवशेष जलाने से जुड़ी सक्रिय आग की घटनाओं की निगरानी की जाती है।

सैटेलाइट ने 6 अक्टूबर 2026 को सात राज्यों में फसल अवशेष जलाने की 33 घटनाएं दर्ज कीं। इस दिन पंजाब में 4, हरियाणा में 0, उत्तर प्रदेश में 2, दिल्ली में 0, राजस्थान में 3, उत्तराखंड में 0 और मध्य प्रदेश में 24 घटनाएं दर्ज की गईं। यानी 6 अक्टूबर को अकेले मध्य प्रदेश में पराली में आग की 73 प्रतिशत घटनाएं दर्ज की गईं।  

सीआरईएएमएस 15 सितंबर से धान की पराली में आग की घटनाएं दर्ज करता है और समय पर बुलेटिन और डैशबोर्ड के जरिए आंकड़ों को सामने रखता है। आंकड़े बताते हैं कि 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच पराली में आग लगाने के लिए बदनाम पंजाब में कुल 88 घटनाएं दर्ज की गईं जो पिछले सात वर्षों में इस अवधि में राज्य में दर्ज सबसे कम घटनाएं हैं।

वहीं दूसरी तरफ धान की पराली में आग लगाने के मामले में कुछ वर्षों से पहले नंबर पर मौजूद मध्य प्रदेश में अब तक 118 घटनाएं दर्ज हुई हैं। यह इस अवधि में राज्य का अब तक का अधिकतम नंबर है। आंकड़े यह भी बताते हैं कि पंजाब में इस सीजन में किसी भी दिन पराली में आग की घटनाएं दहाई के आंकड़ों पर नहीं पहुंची हैं जबकि मध्य प्रदेश में पांच दिन आग की घटनाओं ने दहाई का आंकड़ा छुआ है।

आंकड़े बताते हैं कि पंजाब और हरियाणा में धान की पराली में आग की घटनाओं में भारी कमी आई है जबकि, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ऐसी घटनाओं में इजाफा हो रहा है। 2025 में 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पराली में आग की 33,028 घटनाएं दर्ज हुई थीं जिनमें 17,067 घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश की नाम थीं। यानी छह राज्यों में दर्ज घटनाओं में 50 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सेदारी मध्य प्रदेश की थी। पिछले साल पंजाब में 5,114, हरियाणा में 662, उत्तर प्रदेश में 7,290, दिल्ली में 5 और राजस्थान में 2,890 घटनाएं सामने आई थीं।

जानकार मध्य प्रदेश के इस उभार की वजह जलवायु संकट और कृषि की बदलती प्रवृत्ति से सीधे तौर पर जोड़ते हैं। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश पंजाब की राह पर चल पड़ा है। राज्य के किसान सोयाबीन, उड़द और अन्य खरीफ फसलों के स्थान पर तेजी से धान को अपना रहे हैं क्योंकि मौसम की चरम परिस्थितियां धान के अलावा किसी अन्य फसलों के सामने चुनौती पेश रही हैं। राज्य के किसान धान की फसल कटने के बाद आसान तरीके के तौर पर पराली में आग लगा रहे हैं।

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