

जुलाई के पहले पखवाड़े में मानसून के रफ्तार पकड़ने से कुछ इलाकों में बारिश बढ़ी है जलाशयों की स्थिति में थोड़ा बहुत सुधार हुआ है, बावजूद इसके अभी भी हालात चिंताजनक ही बने हुए हैं।
केंद्रीय जल आयोग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 16 जुलाई 2026 तक देश के 166 बड़े जलाशयों में 63.249 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध था, जो उनकी कुल क्षमता (लाइव स्टोरेज) का 34.46 प्रतिशत है।
पिछले वर्ष इसी अवधि में यह भंडारण 103.955 बीसीएम था, जबकि सामान्य (नॉर्मल) भंडारण 64.427 बीसीएम माना जाता है। यानी वर्तमान भंडारण पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले केवल 60.84 प्रतिशत और सामान्य भंडारण का 98.17 प्रतिशत है।
कुल मिलाकर देश में जलाशयों की स्थिति न केवल पिछले वर्ष की समान अवधि से कमजोर है, बल्कि सामान्य स्तर से भी कम बनी हुई है।
हालांकि दो सप्ताह पहले तक हालात और ज्यादा खराब थे। 2 जुलाई 2026 को इन जलाशयों में कुल 47.725 अरब घन मीटर (26 प्रतिशत) पानी उपलब्ध था। इसके बाद कुछ इलाकों में हुई बारिश के बाद जलाशयों में पानी बढ़ा है, परंतु पिछले वर्ष और सामान्य भंडारण से तुलना करें तो 16 जुलाई 2026 तक के हाल चिंता बढ़ाने वाले ही हैं।
17 जलाशयों में 50 प्रतिशत से कम है पानी
देश में जलाशयों की स्थिति में सुधार के बावजूद गंभीर संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 16 जुलाई तक भी 17 प्रमुख जलाशयों में सामान्य जल भंडारण का 50 प्रतिशत से भी कम पानी बचा हुआ है।
इनमें बिहार का चंदन बांध, गुजरात का उंड-1, हिमाचल प्रदेश का कोल बांध, कर्नाटक के कृष्णराज सागर, नारायणपुर, तट्टीहल्ला और तुंगभद्रा, केरल का पेरियार, मध्य प्रदेश का तवा, तमिलनाडु के अलीयार, लोअर भवानी और वैगई, तेलंगाना के कड्डम, नागार्जुन सागर और सिंगूर, उत्तर प्रदेश का मौदाहा तथा पश्चिम बंगाल का कांग्साबती जलाशय शामिल हैं।
हालांकि दो सप्ताह पहले यानी 2 जुलाई को ऐसे जलाशयों की संख्या 34 थी, जो अब घटकर 17 रह गई है। इसके बावजूद इन जलाशयों का सामान्य स्तर से काफी नीचे होना इस बात का संकेत है कि इन राज्यों में मानसून की बारिश इतनी नहीं हुई है कि जलाशय भर सकें।
166 जलाशयों में से 57 ऐसे हैं, जिनमें सामान्य भंडारण के 80 प्रतिशत से भी कम पानी है। सबसे अधिक ऐसे जलाशय कर्नाटक (10) में हैं।
इसके बाद महाराष्ट्र (8), तेलंगाना (7), झारखंड, केरल, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश (चार-चार), गुजरात (3), बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल (दो-दो) तथा पंजाब, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम (एक-एक) का स्थान है।
इन राज्यों में बिगड़ रहे हालात
बुलेटिन के मुताबिक सबसे चिंताजनक स्थिति पश्चिम बंगाल की है। पश्चिम बंगाल के दो जलाशयों में औसत भराव क्षमता का केवल 18.66 प्रतिशत पानी ही बचा है और यह सामान्य से 55.83 प्रतिशत कम है। कांग्साबती जलाशय में सामान्य का केवल 38.73 प्रतिशत पानी बचा है।
इसके अलावा तेलंगाना राज्य के आठ जलाशयों में औसत भराव केवल 12.53 प्रतिशत है, जो सामान्य से 46.59 प्रतिशत कम है। इनमें कड्डम (17.04 प्रतिशत), नागार्जुन सागर (28.10 प्रतिशत) और सिंगूर (38.23 प्रतिशत) जैसे तीन बड़े जलाशय सामान्य के आधे से भी कम स्तर पर हैं।
बिहार की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां के तीन जलाशयों में भराव केवल 30.16 प्रतिशत है और सामान्य से 30.91 प्रतिशत कम है। चंदन बांध की स्थिति सबसे खराब है, जहां सामान्य का केवल 5.47 प्रतिशत पानी बचा है।
पंजाब राज्य का एकमात्र प्रमुख जलाशय क्षमता के केवल 29.65 प्रतिशत तक भरा है और सामान्य से लगभग 35 प्रतिशत नीचे है।
कर्नाटक में मानसून से सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी 18 में से 10 जलाशय सामान्य के 80 प्रतिशत से नीचे हैं। कृष्णराज सागर, नारायणपुर, तट्टीहल्ला और तुंगभद्रा जैसे चार प्रमुख जलाशय सामान्य के 50 प्रतिशत से भी नीचे हैं।
झारखंड में जलाशयों की स्थिति पिछले दो सप्ताह में कुछ सुधरी है, लेकिन चिंता पूरी तरह टली नहीं है। राज्य के छह प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण 2 जुलाई को उनकी क्षमता के 30.52 प्रतिशत था, जो 16 जुलाई तक बढ़कर 33.60 प्रतिशत हो गया।
इसके बावजूद यह सामान्य स्तर से करीब 19 प्रतिशत कम है। राज्य के चार प्रमुख जलाशय (कोनार, पंचेत हिल, तेनुघाट और तिलैया) अब भी सामान्य भंडारण के 80 प्रतिशत से नीचे हैं, जबकि पंचेत हिल का जलस्तर सामान्य का केवल 75.98 प्रतिशत है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार चार नदी बेसिन अभी भी "सामान्य से कम" श्रेणी में हैं। इनमें महानदी और पेन्नार के बीच की पूर्ववाहिनी नदियों का बेसिन, कावेरी बेसिन, ताप्ती से ताद्री तक की पश्चिमवाहिनी नदियों का बेसिन तथा ताद्री से कन्याकुमारी तक की पश्चिमवाहिनी नदियों का बेसिन शामिल हैं। इन नदी बेसिनों में जलाशयों का भंडारण सामान्य से 20 से 60 प्रतिशत तक कम है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जल आयोग देश के 166 जलाशयों के जल भंडारण की साप्ताहिक निगरानी करता है और प्रत्येक गुरुवार को बुलेटिन जारी करता है। इनमें 20 जलाशय जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े हैं, जिनकी कुल जीवित भंडारण क्षमता 35.299 है।
सभी 166 जलाशयों की कुल जीवित भंडारण क्षमता 183.565 बीसीएम है, जो देश की अनुमानित कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 257.812 बीसीएम का 71.20 प्रतिशत है।