

देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है। कुछ राज्यों में भारी बारिश हो रही है और कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, बावजूद इसके देश के जलाशयों की स्थिति और अधिक चिंताजनक बन गई है।
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के ताजा साप्ताहिक बुलेटिन के मुताबिक 2 जुलाई 2026 को देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल 47.725 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध है। यह इन जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 183.565 बीसीएम का केवल 26 प्रतिशत है।
यह मात्रा पिछले वर्ष की समान अवधि में उपलब्ध पानी (78.077 बीसीएम) का केवल 61.13 प्रतिशत है। वहीं, पिछले दस वर्षों के औसत यानी सामान्य भंडारण (48.402 बीसीएम) की तुलना में भी यह 1.4 प्रतिशत कम है।
पहली नजर में सामान्य से केवल 1.4 प्रतिशत की कमी मामूली लग सकती है, लेकिन यह ऐसे समय की तस्वीर है जब मानसून देश के अधिकांश हिस्सों में पहुंच चुका है। यही वह अवधि होती है जब जलाशयों में तेजी से पानी भरना शुरू हो जाता है।
ऐसे में सामान्य से नीचे बना रहना संकेत देता है कि बारिश का भौगोलिक वितरण अभी भी असमान है और कई महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में से 69 जलाशयों में पानी का भंडारण सामान्य स्तर के 80 प्रतिशत या उससे कम रह गया है। इनमें भी 34 जलाशयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां सामान्य भंडारण का 50 प्रतिशत या उससे भी कम पानी बचा है। सबसे गंभीर स्थिति वाले जलाशयों में बिहार का चंदन बांध (1.86 प्रतिशत), ओडिशा का रेंगाली (3.15 प्रतिशत), कर्नाटक का अलमट्टी (10.35 प्रतिशत) और तुंगभद्रा (15.80 प्रतिशत) शामिल हैं।
वहीं महाराष्ट्र का भीमा-उज्जैनी, तमिलनाडु का अलियार और उत्तर प्रदेश का मौदाहा जलाशय सामान्य भंडारण की तुलना में शून्य (0 प्रतिशत) स्तर पर पहुंच चुके हैं।
केंद्रीय जल आयोग के 2 जुलाई 2026 के बुलेटिन के अनुसार, 13 राज्यों में जलाशयों का जल भंडारण पिछले 10 वर्षों के औसत (सामान्य) से कम दर्ज किया गया है। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं।
इनमें सबसे अधिक चिंता दक्षिण भारत के राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को लेकर है, जहां जलाशयों का स्तर सामान्य से 16 से 46 प्रतिशत तक नीचे है। वहीं पूर्वी भारत के झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मिजोरम और नागालैंड में भी जल भंडारण सामान्य से काफी कम है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में जलाशयों का भंडारण सामान्य से करीब 62 प्रतिशत, मिजोरम में लगभग 54 प्रतिशत, कर्नाटक में 46 प्रतिशत और ओडिशा में लगभग 19 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।
आयोग के अनुसार, इन राज्यों में यदि आने वाले हफ्तों में जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।
चिंताजनक स्थिति वाले नदी बेसिन
नदी बेसिनों के आधार पर देखें तो सबसे अधिक चिंता कृष्णा, कावेरी, महानदी और पेन्नार के बीच की पूर्व की ओर बहने वाली नदियां, ब्राह्मणी-बैतरणी, बाराक एवं अन्य, तापी से तादरी के बीच तथा तादरी से कन्याकुमारी तक की पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के बेसिनों को लेकर है।
केंद्रीय जल आयोग ने इन सभी बेसिनों को 'कम (डेफिसिएंट )' की श्रेणी में रखा है, यानी यहां जलाशयों में पानी का भंडारण सामान्य से 20 से 60 प्रतिशत तक कम है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस बार देश के किसी भी नदी बेसिन को 'अत्यधिक कमी' की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
इन बेसिनों में सामान्य से बेहतर स्थिति
इसके विपरीत गंगा, नर्मदा, महानदी, गोदावरी, माही, तापी, साबरमती, पेन्नार, पेन्नार और कन्याकुमारी के बीच की पूर्व की ओर बहने वाली नदियां तथा कच्छ-सौराष्ट्र और लूनी क्षेत्र की पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के बेसिनों में जलाशयों का भंडारण सामान्य से बेहतर दर्ज किया गया है।
वहीं सिंधु, ब्रह्मपुत्र और सुवर्णरेखा बेसिनों की स्थिति सामान्य के करीब बनी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि इन नदी घाटियों के जलग्रहण क्षेत्रों में मानसून की बारिश अपेक्षाकृत बेहतर रही है और जलाशयों में पानी का स्तर औसत के आसपास या उससे अधिक बना हुआ है।
देश के दो-तिहाई जिलों में सामान्य से कम बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के 2 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, देश के 741 जिलों में से 325 जिले (44 प्रतिशत) वर्षा की कमी और 165 जिले (22 प्रतिशत) अत्यधिक कमी की श्रेणी में हैं। यानी देश के लगभग 66 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।
इसके विपरीत केवल 30 जिले (4 प्रतिशत) में अत्यधिक अधिक, 60 जिले (8 प्रतिशत) में अधिक और 156 जिले (21 प्रतिशत) में सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। दो जिलों में बारिश नहीं हुई, जबकि तीन जिलों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
राज्यों के स्तर पर देखें तो उत्तर प्रदेश के 75 में से 57 जिले, बिहार के 38 में से 34, ओडिशा के 30 में से 22, तेलंगाना के 33 में से 24, महाराष्ट्र के 36 में से 27, झारखंड के 24 में से 23, असम के 35 में से 25, मध्य प्रदेश के 55 में से 31 और छत्तीसगढ़ के 33 में से 32 जिले सामान्य से कम या अत्यधिक कम वर्षा की श्रेणी में हैं।
इसके विपरीत तमिलनाडु के अधिकांश जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि राजस्थान और पंजाब में भी कई जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि देश में मानसून की प्रगति भले तेज दिख रही हो, लेकिन उसका वितरण अभी भी बेहद असमान बना हुआ है।