

"गेहूं काटने और दाने-भूसे को अलग करने के लिए के लिए गांवों में मशीनें खड़ी हैं लेकिन उन्हें चलाने के लिए पेट्रोल और डीजल नहीं है।"
ज्यादातर पेट्रोल पंप बंद हैं और उनपर नाकेबंदी कर दी गई है, इसके बावजूद लोग आसरे में खड़े हैं। राज्य में रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं ही है जिसकी कटाई का अहम वक्त है।
उत्तर प्रदेश में बहराइच जिले के एक निजी कंपनी के पेट्रोल पंप पर कतार में खड़े किसान जगदेव वर्मा अपने खाली डिब्बे के साथ रातभर से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। जिले के इस इकलौते पेट्रोल पंप पर किसानों की कतारें लगी हैं।
वर्मा बताते हैं कि अभी दो हफ्ते पहले भी यही स्थति हुई थी, पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की खबर के चलते पेट्रोल पंपों पर नाकेबंदी करनी पड़ी थी।
ईरान-यूएस युद्ध का असर देश के सबसे पिछड़े जिलों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गेहूं कटाई और थ्रेशर के लिए बड़ी कंबाइन हार्वेस्टर हो या फिर छोटे खेतों के लिए रीपर मशीन दोनों के पहिए थम गए हैं।
वर्मा बताते हैं कि गैस की किल्लत के चलते दिल्ली और हरियाणा से कई मजदूर वापस अपने गांव लौट आए हैं लेकिन इसके बावजूद कटाई के लिए श्रमिकों की कमी है क्योंकि गेहूं कटाई की मजदूरी इस बार ज्यादा मांग रहे हैं।
नजदीकी श्रावस्ती जिले में भी कई पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए हैं। हफ्तों से यह स्थिति है। ग्रामीण क्षेत्र में पेट्रोल पंप की आपूर्ति बाधित है। पेट्रोल पंप के संचालक आनंद प्रताप सिंह बताते हैं कि आपूर्ति बाधित होने के बाद पेट्रोल पंप को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है। स्टोर टैंक खाली हो गया है।
वह बताते हैं, "अब ज्यादातर किसान अपने खेतों में गेहूं की कटाई मशीनों से ही कराते हैं, जिसके लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता बढ़ गई है। किसान परेशान हैं और हम उन्हें तेल नहीं दे पा रहे। स्थिति कब सामान्य होगी, कह नहीं सकते।"
यूपी के और एक जिले महाराजगंज जिले में भी स्थिति सामान्य नहीं है, वहां के निवासी योगेंद्र कनौजिया बताते हैं कि पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारे लगी हुई हैं। लोगो अपने निजी वाहन से लेकर ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में तेल भराने को लेकर कतारों में खड़े हैं।
गांव से शहरों में बसों की आवाजाही भी बाधित हो रही है।
श्रावस्ती में किसान राहुल तिवारी का कहना है कि सभी पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं, वैसे ही गेहूं की फसलों का आंधी पानी की वजह से नुकसान हो चुका है। अब कटाई में देरी फसलों को प्रभावित कर सकती है।
लखीमपुर के ईसानगर निवासी संदीप बताते हैं कि,बीते एक महीने से यूपी के अलग-अलग हिस्सों में पेट्रोल पंप पर संकट पैदा हो रहा है। लखीमपुर के ईसानगर में ही एक महीने पहले तेल की सप्लाई बाधित होने से 10 पेट्रोल पंप में से 9 पेट्रोल पंप बंद करने पड़े थे। फिलहाल अभी पेट्रोल पंप जारी है, हालांकि 50 फीसदी गेहूं की कटाई ही अभी तक हो पाई है।
दिल्ली और आस-पास के औद्योगिक क्षेत्र से वापस लौट रहे श्रमिक भी गांव में जरूर हैं लेकिन वह बेहतर समय का इंतजार कर रहे हैं ताकि वापस फिर से काम पर लौट पाएं। संदीप कहते हैं कि गांव में अब मनरेगा जैसा काम नहीं है और न ही वापस लौटे श्रमिक गेहूं कटाई जैसे कामों में हिस्सा लेते हैं।
दिल्ली के आजादपुरमंडी में जयनारायण का कहना है कि वहां श्रमिक बहुत कम बचे हैं, इस वक्त। जबसे खुले में मिलने वाली गैस आपूर्ति महंगी हुई है तब से लोग जाना शुरु कर चुके हैं। एक किलो गैस 300 से 400 रुपए किलो तक मिल रहा है।
बहरहाल, कई जगह अफवाहें भी पेट्रोल पंप पर भीड़ को बढ़ा दे रही हैं और कई जगह कैपिंग की जा रही है।