

आयुष मंत्रालय ने 27 देशों के साथ समझौते कर विदेशों में आयुष के प्रचार को बढ़ावा दिया, जिससे आयुष उत्पादों के निर्यात में वृद्धि हुई।
सरकार ने बताया कि 100 प्रतिशत नीम कोटेड यूरिया के उपयोग से फसल उत्पादन बढ़ा है और नाइट्रोजन की बर्बादी में कमी आई।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 97.9 प्रतिशत रहा, फिर भी लाखों बच्चे जीरो-डोज़ श्रेणी में हैं।
भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का सफल संचालन शुरू किया, जो स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि मंत्रालय ने बताया कि फसल विविधीकरण, औषधीय पौधों की खेती और भूमि संरक्षण के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की जा रही हैं।
विदेशों में आयुष वेलनेस सेंटरों का विस्तार
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आज, आयुष मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में बताया कि भारत सरकार आयुष पद्धतियों को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में आयुष मंत्रालय ने कई देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है। मंत्रालय ने अब तक 27 एक देश-से-दूसरे देश समझौता ज्ञापन, 16 आयुष चेयर और 57 एक संस्थान-से दूसरे -संस्थान के माध्यम से हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है।
जाधव ने कहा कि इन प्रयासों के कारण दुनिया में भारतीय पारंपरिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता और स्वीकार्यता बढ़ी है। इसका सकारात्मक प्रभाव आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात पर भी पड़ा है। साल 2021-22 में भारत से आयुष एवं हर्बल उत्पादों का निर्यात 4,563.5 करोड़ रुपये था, जो साल 2025-26 में बढ़कर 5,639.2 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में रुपये के आधार पर 5.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई है।
नीम कोटेड यूरिया से खेती को लाभ
नीम कोटेड यूरिया को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से लोकसभा में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि साल 2015 से देश में उत्पादित तथा आयातित सभी यूरिया को 100 प्रतिशत नीम कोटेड यूरिया के रूप में उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यूरिया का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और खेती की लागत कम करना है।
उन्होंने बताया कि नीम की परत होने के कारण यूरिया धीरे-धीरे घुलता है, जिससे पौधों को लंबे समय तक नाइट्रोजन मिलती रहती है। इससे किसानों को सामान्य यूरिया की तुलना में कम मात्रा में यूरिया की आवश्यकता होती है। शोधों के अनुसार, नीम कोटेड यूरिया के उपयोग से औसतन 8.25 प्रतिशत तक फसल उत्पादन बढ़ा है। साथ ही नाइट्रोजन की बर्बादी में लगभग 10 से 15 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलती है।
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और जीरो-डोज बच्चे
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मंत्रालय के तहत देशभर में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 12 टीका-रोकथाम योग्य बीमारियों से बचाव के लिए 11 प्रकार के टीके निःशुल्क लगाए जाते हैं। जिन बच्चों को एक वर्ष की आयु तक पेंटावैलेंट वैक्सीन की पहली खुराक भी नहीं मिलती, उन्हें जीरो-डोज बच्चे कहा जाता है।
पटेल ने बताया कि कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 97.9 प्रतिशत रहा। इसके बावजूद वर्ष 2025 में देश में 6,78,756 ऐसे बच्चे थे जिन्हें पेंटावैलेंट टीके की पहली खुराक भी नहीं मिल सकी। सरकार इन बच्चों तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रही है।
लद्दाख में उच्च हिमालयी औषधीय पौधों की खेती
सदन में उठे एक और सवाल का जवाब देते हुए आज, आयुष मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में बताया कि आयुष मंत्रालय ने लद्दाख में औषधीय पौधों की खेती की संभावनाओं को अहम माना है। लद्दाख की जलवायु सी-बकथॉर्न, रोडियोला, आर्टेमिसिया और एकोनाइटम जैसे उच्च हिमालयी औषधीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त है।
जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड देशभर में "औषधीय पौधों का संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन" नामक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू कर रहा है। इस योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं को सहायता प्रदान की जाती है ताकि औषधीय पौधों का संरक्षण और व्यावसायिक उत्पादन बढ़ाया जा सके।
पश्चिम बंगाल और केरल में निपाह वायरस के मामले
निपाह वायरस को लेकर सदन में पूछे गए एक अन्य प्रश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में कहा कि साल 2026 के दौरान पश्चिम बंगाल और केरल में निपाह वायरस के मामले सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल में दो प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए मामले मिले, जिनमें एक मरीज की मृत्यु हो गई। वहीं केरल में एक पुष्ट मामला सामने आया।
उन्होंने बताया कि दोनों राज्यों में राज्य सरकारों ने तुरंत जांच शुरू की और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। साथ ही नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम को दोनों राज्यों में भेजा गया। इन टीमों ने निगरानी, संपर्कों की पहचान, जांच और संक्रमण रोकने के लिए आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में राज्य सरकारों की सहायता की।
हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत
सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि भारतीय रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का उद्घाटन 17 जुलाई 2026 को किया गया।
उन्होंने बताया कि यह ट्रेन जींद-सोनीपत के 89 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर चल रही है। तीन अगस्त 2026 तक यह ट्रेन 2,492 किलोमीटर का व्यावसायिक संचालन पूरा कर चुकी है। इस परियोजना को भारतीय रेलवे ने पायलट परियोजना के रूप में विकसित किया है ताकि भविष्य में स्वच्छ और हरित परिवहन को बढ़ावा दिया जा सके। ट्रेन के लिए जींद में विशेष हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र भी स्थापित किया गया है।
मानव जनित भूमि क्षरण और कृषि उत्पादन
सदन में उठे एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि सरकार ने अभी तक भूमि क्षरण का कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव का अलग से कोई अध्ययन नहीं कराया है। हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर द्वारा प्रकाशित डेजर्टिफिकेशन एंड लैंड डिग्रेडेशन एटलस ऑफ इंडिया 2021 के अनुसार साल 2018-19 तक देश में लगभग 6.38 लाख हेक्टेयर भूमि मानवजनित मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण से प्रभावित थी।
उन्होंने कहा कि भूमि संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
देश में खेती योग्य भूमि की स्थिति
देश में खेती योग्य भूमि को लेकर उठे एक और सवाल के जवाब में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में बताया कि देश में खेती योग्य भूमि में पिछले तीन वर्षों के दौरान मामूली कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में देश में 179.98 मिलियन हेक्टेयर, वर्ष 2023-24 में 179.77 मिलियन हेक्टेयर तथा वर्ष 2024-25 में 179.43 मिलियन या 17.943 करोड़ हेक्टेयर खेती योग्य भूमि उपलब्ध थी।
हालांकि सकल फसल क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 में यह 198.28 मिलियन हेक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 225.19 मिलियन हेक्टेयर हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि कृषि क्षेत्र में फसल चक्र और बहुफसली खेती को बढ़ावा मिला है।
फसल विविधीकरण और मानसून रणनीति
सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, इसी बीच सेन में पूछे गए एक अन्य प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग किसानों को धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों से हटाकर कम पानी वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित कर रहा है। यह कार्य प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन प्रोग्राम के माध्यम से वर्ष 2013-14 से किया जा रहा है।
ठाकुर ने बताया कि यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लागू है। इसके तहत किसानों को मोटे अनाज (श्री अन्न), दलहन, तिलहन तथा अन्य कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सरकार प्रदर्शन प्लॉट, कृषि यंत्रीकरण, मूल्य संवर्धन, जागरूकता कार्यक्रम तथा अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान करती है। वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान पंजाब में 9,460 हेक्टेयर, हरियाणा में 53,723 हेक्टेयर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 61,349 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रदर्शन किए गए हैं। इन पहलों से कृषि में जल संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में सहायता मिलने की उम्मीद है।