महाराष्ट्र व ओडिशा में भीषण बारिश की चेतावनी, छत्तीसगढ़ व गुजरात समेत कई राज्यों में भी बरसेंगे बादल

कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट, कहीं बाढ़ तो कहीं भूस्खलन का खतरा, लोगों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह
मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी जबकि कुछ हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया है।
मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी जबकि कुछ हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया है।फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स
Published on
सारांश
  • कई राज्यों में मानसून सक्रिय, भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने का मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया।

  • उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा, कई इलाकों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट।

  • गुजरात और असम में बाढ़ से हालात गंभीर, लाखों लोग प्रभावित, कई लोगों की मौत, राहत और बचाव कार्य जारी।

  • दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश के बावजूद उमस बरकरार, कई राज्यों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया।

  • मौसम विभाग ने लोगों और किसानों को भारी बारिश, जलभराव और आकाशीय बिजली से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी।

देश के कई इलाकों में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है। मौसम विभाग की ओर से आज सुबह, 26 जुलाई 2026 को जारी बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और उसके आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र अभी भी वहीं जारी है।

वहीं, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल तट के पास भी एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। अगले दो से तीन दिनों में इसके और मजबूत होने के आसार हैं। इन मौसमीय प्रणालियों के कारण देश के कई राज्यों में गरज-चमक, तूफानी हवाएं व भारी से बहुत भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया है।

उत्तर भारत में बारिश और भूस्खलन का खतरा

उत्तराखंड कई इलाकों में आज भारी बारिश के आसार हैं। देहरादून, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के कुछ इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। पर्वतीय इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने का पूर्वानुमान है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है।

हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों की बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। भूस्खलन और फ्लैश फ्लड के कारण 134 सड़कें बंद हैं। मौसम विभाग ने 28 से 30 जुलाई के बीच चार जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चंबा, कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ आने की आशंका भी जताई गई है।

गुजरात और असम में बाढ़ से हालात गंभीर

गुजरात में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। पिछले दो दिनों में बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 35 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में पानी भर गया है और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

असम में भी बाढ़ का संकट बना हुआ है। राज्य के नौ जिलों में सात लाख से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हैं। बाढ़ के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और राहत कार्य जारी हैं।

दिल्ली-एनसीआर में उमस से परेशानी

दिल्ली-एनसीआर में हल्की और छिटपुट बारिश के बावजूद लोगों को उमस से राहत नहीं मिल रही है। हवा में नमी अधिक होने के कारण गर्मी और चिपचिपाहट बनी हुई है। आज अधिकतम तापमान 33 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। हवा की गति लगभग छह किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि आर्द्रता 87 प्रतिशत दर्ज की गई है।

कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी व बिजली गिरने की आशंका

मौसम विभाग ने मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी जबकि कुछ हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया है। इन राज्यों में ऑरेंज से लेकर रेड अलर्ट तक जारी किया गया है। यहां 204.5 मिमी से अधिक बरस सकते हैं बादल।

वहीं आज, छत्तीसगढ़, गुजरात, कोंकण और गोवा में भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन राज्यों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बादल बरस सकते हैं। यहां बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी है।

इसके अलावा आज, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, पश्चिम राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल में गंगा के तटीय इलाकों और कई पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी बारिश होने के आसार हैं। इन सभी राज्यों में भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां 64.5 से 115.5 मिमी तक बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि आज, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कई राज्यों में बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है।

कई राज्यों में सामान्य से अधिक तापमान

मौसम विभाग के अनुसार, असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। वहीं पश्चिम मध्य प्रदेश, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ इलाकों में भी अधिकतम तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा

रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा, बिहार, पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम मध्य प्रदेश तथा पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा।

25 जुलाई 2026 को देश के मैदानी इलाकों में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस तमिलनाडु के मदुरै में दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.0 डिग्री सेल्सियस ओडिशा के बौध में रिकॉर्ड किया गया।

लोगों के लिए जरूरी सावधानियां

भारी बारिश के दौरान लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों, नदी-नालों और पहाड़ी इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। बिजली चमकने के समय खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े नहीं होना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखें और आवश्यक दवाइयों तथा जरूरी सामान का प्रबंध पहले से कर लें। जिन इलाकों में बाढ़ की आशंका हो, वहां रहने वाले लोग स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

किसानों के लिए सलाह

किसानों को अपने खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए ताकि फसलों में जलभराव न हो। जिन फसलों की कटाई तैयार है, उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचा देना चाहिए। भारी बारिश के दौरान सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि बारिश से इनका प्रभाव कम हो सकता है।

सब्जियों और बागवानी फसलों को तेज हवा से बचाने के लिए सहारा देना चाहिए। पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें तथा उनके लिए साफ पानी और पर्याप्त चारे की व्यवस्था करें। मछली पालन करने वाले किसानों को तालाबों के बांध मजबूत रखने चाहिए और मौसम सामान्य होने तक जलाशयों में अनावश्यक गतिविधियों से बचना चाहिए।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। ऐसे में लोगों और किसानों दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। समय पर मौसम की जानकारी लेना, प्रशासन की सलाह मानना और आवश्यक सावधानियां अपनाना ही जान-माल और फसलों की सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय है।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in