

पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के कई राज्यों में 20 जून तक बारिश, आंधी और गरज-चमक की आशंका।
पूर्वी राजस्थान में 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक तेज हवाएं चल सकती हैं, मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की।
असम, मेघालय, केरल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी।
दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो-तीन दिनों में कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और दक्षिण छत्तीसगढ़ में आगे बढ़ेगा।
उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान तीन से पांच डिग्री बढ़ने के आसार, महाराष्ट्र में लू का खतरा।
देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक ओर उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में बढ़ोतरी का दौर शुरू होने वाला है, तो दूसरी ओर कई राज्यों में बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के द्वारा आज, 14 जून, 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और कई राज्यों में आगे बढ़ रहे दक्षिण-पश्चिम मानसून के चलते आने वाले दिनों में मौसम लगातार बदलता रहेगा।
पहाड़ी राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का असर
विभाग ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। 14 और 15 जून को इन राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
हवाओं की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को मौसम की जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
मैदानी राज्यों में भी बदलेगा मौसम
पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 14 से 20 जून के बीच बारिश होने की संभावना है। राजस्थान के कुछ इलाकों में तेज आंधी और तूफानी हवाएं चल सकती हैं। यहां हवाओं की गति 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। इससे पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों को नुकसान हो सकता है।
देश के कई हिस्सों में गरज-चमक का अलर्ट
वहीं आज, 14 जून, 2026 को मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान का अंदेशा जताया गया है। वहीं बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है।
कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि आज, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, केरल, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने के आसार हैं। इन राज्यों में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां 64.5 से 115.5 मिमी तक बादल बरस सकते हैं।
लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मानसून की रफ्तार बढ़ने के संकेत
मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। अगले दो से तीन दिनों में मानसून कर्नाटक के शेष हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा के कुछ इलाकों और दक्षिण छत्तीसगढ़ तक पहुंच सकता है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है।
उत्तर-पश्चिम भारत में बढ़ेगा तापमान
बारिश और आंधी की गतिविधियों के बावजूद उत्तर-पश्चिम भारत में 14 से 18 जून के बीच अधिकतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की आशंका है। देश के बाकी हिस्सों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। 13 जून को देश का सबसे अधिक तापमान 41.9 डिग्री सेल्सियस गुजरात के भावनगर में दर्ज किया गया।
महाराष्ट्र में लू और तटीय क्षेत्रों में उमस
महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में लू चलने के आसार हैं। वहीं ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश तथा कोंकण और गोवा क्षेत्रों में गर्म और उमस भरा मौसम बना रह सकता है। ऐसे इलाकों में लोगों को पर्याप्त पानी पीने और दोपहर के समय धूप से बचने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
बारिश और आंधी की आशंका को देखते हुए किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं के दौरान कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव नहीं करना चाहिए। जिन राज्यों में मानसून पहुंचने वाला है, वहां किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू कर सकते हैं। पशुपालकों को भी अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने और बिजली गिरने के दौरान खुले मैदानों में न छोड़ने की सलाह दी गई है।
सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विभाग का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक देश के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहेगा। कहीं बारिश तो कहीं आंधी और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में लोगों और किसानों को मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर रखते हुए आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।