अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश के अधिकतर इलाकों में कम बरसेंगे बादल, तापमान में होगी बढ़ोतरी

अक्टूबर से दिसंबर तक दक्षिण भारत में सामान्य बारिश का अनुमान, देश के अधिकतर इलाकों में कम बरसेंगे बादल, तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अंदेशा।
देश के अधिकतर इलाकों में अक्टूबर से दिसंबर तक सामान्य से कम बारिश, उत्तर-पश्चिम भारत में बेहतर वर्षा की उम्मीद।
देश के अधिकतर इलाकों में अक्टूबर से दिसंबर तक सामान्य से कम बारिश, उत्तर-पश्चिम भारत में बेहतर वर्षा की उम्मीद।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दक्षिण भारत में अक्टूबर से दिसंबर तक सामान्य बारिश का अनुमान, पांच मौसम उपखंडों में 334.1 मिलीमीटर बारिश की संभावना जताई गई।

  • देश के अधिकतर इलाकों में अक्टूबर से दिसंबर तक सामान्य से कम बारिश, उत्तर-पश्चिम भारत में बेहतर वर्षा की उम्मीद।

  • अक्टूबर में देशभर में बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत से अधिक कम रहने का अनुमान, कई राज्यों में तापमान भी बढ़ेगा।

  • मजबूत अल नीनो साल के अंत तक और प्रभावी हो सकता है, उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान हिंद महासागर में तटस्थ स्थिति।

  • कम बारिश से रबी फसलों की मिट्टी में नमी, सिंचाई और भूजल पुनर्भरण प्रभावित होने की आशंका, जल संरक्षण पर जोर।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच तापमान और बारिश को लेकर मौसमी अनुमान जारी किया है। इसके अनुसार, दक्षिण भारत के पांच उपखंडों में उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान सामान्य बारिश होने की संभावना है। वहीं, देश के अधिकतर इलाकों में इस अवधि में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने अक्टूबर महीने में भी देशभर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। इसके साथ ही ज्यादातर राज्यों में दिन और रात का तापमान सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं।

दक्षिण भारत में सामान्य बारिश की उम्मीद

मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर तक भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में औसत बारिश सामान्य रहने की संभावना है। इस क्षेत्र में तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा, केरल और माहे तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं।

इन पांच मौसम उपखंडों में बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की 88 से 112 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बारिश का दीर्घकालिक औसत 334.1 मिलीमीटर है। यह औसत 1971 से 2020 के मौसम संबंधी आंकड़ों पर आधारित है।

दक्षिण भारत के लिए यह मौसम खेती और पानी की उपलब्धता के लिहाज से अहम है। इस क्षेत्र में सालभर होने वाली बारिश का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान होती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में सालाना बारिश का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा इसी अवधि में दर्ज होता है।

देश के ज्यादातर हिस्सों में कम बारिश का अंदेशा

मौसम विभाग के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों और भारतीय प्रायद्वीपी के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

अक्टूबर महीने के लिए भी देशभर में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इस दौरान पूरे देश में औसत बारिश 75.4 मिलीमीटर के दीर्घकालिक औसत के 85 प्रतिशत से कम रह सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों, भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप और पूर्वी भारत के कुछ अलग-अलग इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

अक्टूबर में बढ़ेगा तापमान

बारिश के साथ मौसम विभाग ने अक्टूबर के तापमान को लेकर भी अनुमान जारी किया है। इसके अनुसार, देश के ज्यादातर इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों और मध्य तथा उत्तर-पश्चिम भारत के अलग-अलग इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य रहने की संभावना है।

रात के यानी न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी का अनुमान है। देश के अधिकतर इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इसके विपरीत, पूर्वोत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में रात का तापमान सामान्य से कम या सामान्य रहने की संभावना जताई गई है।

अल नीनो की स्थिति होगी मजबूत

मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। इस क्षेत्र के समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक है। मौसम विभाग के मानसून मिशन युग्मित पूर्वानुमान प्रणाली और अन्य प्रमुख वैश्विक जलवायु मॉडलों के अनुसार, साल के अंत तक अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

वहीं, हिंद महासागर में फिलहाल हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) की तटस्थ स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान भी इसके तटस्थ बने रहने की संभावना है।

खेती और जल प्रबंधन पर असर की आशंका

सामान्य से कम बारिश होने पर रबी की फसलों के लिए मिट्टी में नमी की कमी हो सकती है। इससे सिंचाई की जरूरत बढ़ने और कृषि उत्पादन प्रभावित होने का खतरा रहता है। कम बारिश के कारण जलाशयों और भूजल का दोबारा भराव भी प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही लंबे शुष्क दौर और पानी की कमी की आशंका बढ़ सकती है।

मौसम विभाग ने पड़ने वाले असर को देखते हुए पहले से तैयारी करने की जरूरत बताई है। संबंधित विभागों और किसानों को पानी की उपलब्धता का नियमित आकलन करने, सिंचाई संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और जल संरक्षण पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। जरूरत के अनुसार कृषि संबंधी वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार रखने की सलाह दी गई है।

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