अनुमानों में दिखाया गया है कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों के साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के हिस्से सूख जाएंगे, जबकि उष्णकटिबंधीय और उत्तर में ओले गिरेंगे। भारत के लिए रुझान यह भी दर्शाता है कि चावल की खेती के लिए उपयोग होने वाली भूमि का 100 प्रतिशत, मक्का का 91 प्रतिशत और सोयाबीन का 80 प्रतिशत हिस्सा अगले 40 वर्षों के भीतर अत्यधिक बारिश वाली परिस्थितियों का सामना करेगा।