बिना अनुमति भूजल दोहन पर सख्ती: ग्रेटर नोएडा में माइक्रोसॉफ्ट प्रोजेक्ट को भूगर्भ जल विभाग का नोटिस

केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य सरकार की कई रिपोर्टों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को ‘अतिदोहन’ या ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है
माइक्रोसॉफ्ट का निर्माणाधीन कैंपस, फोटो साभार - फेसबुक
माइक्रोसॉफ्ट का निर्माणाधीन कैंपस, फोटो साभार - फेसबुक
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उत्तर प्रदेश में तेजी से गिरते भूजल स्तर और अनियंत्रित दोहन के बीच गौतमबुद्धनगर में भूगर्भ जल विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश में नोएडा के सेक्टर 145 में स्थित माइक्रोसॉफ्ट प्रोजेक्ट को भू-गर्भ जल विभाग की ओर से बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के अवैध रूप से भूजल दोहन किए जाने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है।

यह नोटिस 15 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। नोटिस में कंपनी से आवश्यक अनुमति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम, 2019 प्रदेश में अक्टूबर 2019 से प्रभावी है। इस अधिनियम का उद्देश्य राज्य में भूजल की सुरक्षा, संरक्षण, नियंत्रण और विनियमन सुनिश्चित करना है। अधिनियम के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) नियमावली, 2020 भी लागू की गई है। इसके बावजूद, विभाग के संज्ञान में यह बात आई है कि कई उद्योग और संस्थान बिना आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किए भूगर्भ जल का दोहन कर रहे हैं।

भूगर्भ जल विभाग के मुताबिक, इस तरह का अनधिकृत दोहन न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि जल संसाधनों के अवैध उपयोग और भूजल प्रदूषण को भी बढ़ावा देता है। इसी को रोकने के लिए अधिनियम की धारा 27, 28 और 29 में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। विभाग का कहना है कि इन धाराओं का उद्देश्य भूजल के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करना और भविष्य की जरूरतों के लिए इसे संरक्षित करना है।

नोटिस के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट प्रोजेक्ट, सेक्टर-145, नोएडा में भूगर्भ जल विभाग की टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान परियोजना स्थल पर कुल 10 बोरवेल स्थापित पाए गए। विभाग का कहना है कि निरीक्षण के समय इन बोरवेल के लिए किसी भी प्रकार की वैध अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र मौके पर उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद भूगर्भ जल विभाग के गौतमबुद्ध नगर स्थित कार्यालय अधिशासी अभियंता ने यह नोटिस जारी किया।

भूगर्भ जल विभाग ने परियोजना प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे 15 कार्य दिवस के भीतर सभी बोरवेल की अनुमति से संबंधित प्रतियां विभागीय कार्यालय में जमा कराएं और साथ ही विभाग द्वारा दिए गए ईमेल पते पर भी भेजें।

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुपालन नहीं किया गया, तो इसे भूगर्भ जल अधिनियम, 2019 के अंतर्गत अवैध जल निष्कर्षण माना जाएगा और जुर्माना तथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अधिनियम की धारा 39 के तहत व्यवसायिक उद्देश्य से भूगर्भ जल का अनधिकृत दोहन करने पर कड़े दंड का प्रावधान है। इसके अंतर्गत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति, समूह या संस्था पर दो लाख से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना, छह माह से एक वर्ष तक का कारावास, या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। विभाग का कहना है कि अधिनियम लागू होने के बाद इस प्रकार के संज्ञेय अपराध न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि अधिनियम के मूल उद्देश्यों को भी बाधित करते हैं।

भूगर्भ जल विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि गौतमबुद्धनगर जनपद के अंतर्गत सभी भूजल उपभोक्ताओं के लिए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पंजीकरण कराना और भूजल निकास के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। साथ ही, ड्रिलिंग एजेंसियों का पंजीकरण भी जरूरी है।

पर्यावरणविद विक्रांत तोंगड़ ने कहा कि गौतमबुद्धनगर, खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र, तेजी से शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य सरकार की कई रिपोर्टों में इस क्षेत्र को ‘अतिदोहन’ या ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है। इसके बावजूद, बड़े निर्माण और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में भूजल पर निर्भरता बनी हुई है और अवैध तरीके से भूजल का दोहन भी हो रहा है।

वहीं, भूगर्भ जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े कॉरपोरेट और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स नियमों का पालन किए बिना भूजल का दोहन करते रहे तो इसका असर न केवल जल स्तर पर पड़ेगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पीने के पानी का संकट और गहरा हो सकता है। मार्च, 2025 में इस माइक्रोसॉफ्ट कैंपस का उद्घाटन किया गया था।

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