खून की एक बूंद से कैंसर का पता लगाएगा यह सेंसर

नैनोस्केल पर सेंसर दो कंघों की तरह एक दूसरे में गुंथा हुआ दिखता है, जो कंघों के दांतों के बीच जगह छोड़ देता है, इसमें 120 नैनोमीटर के आसपास के इलेक्ट्रोड होते हैं
Photo: wikimedia commons
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नीदरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे और वैगनिंगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नैनोसेंसर विकसित किया है, जो रक्त की एक बूंद से  कैंसर का पता लगा सकता है। यह सेंसर रक्त में बायोमार्कर की एक व्यापक सघनता में से 10 कण प्रति माइक्रोलीटर से 10 लाख कण प्रति माइक्रोलीटर तक में से कैंसर का पता लगा सकता है। मेटास्टेटिक कैंसर का पता लगाने के लिए रक्त में कैंसर बायोमार्कर की तलाश का यह एक भरोसेमंद तरीका है। एमआरआई जैसी इमेजिंग तकनीकों की तुलना में इसकी मांग कम है। इन मार्करों की सघनता बेहद कम होती है, जिससे कैंसर का पता लगाना मुश्किल हो जाता है, जिसे दूर करना एक मुख्य चुनौती है।

मेटास्टेटिक कैंसर या मेटास्टेटिक ट्यूमर शरीर में एक भाग से शुरू होकर शरीर के अलग-अलग भागों में फैल जाता है। मेटास्टेसिस कैंसर कोशिकाओं में अक्सर लसीका प्रणाली या रक्तप्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है। यह शोध नैनो लेटर्स, अमेरिकन केमिकल सोसाइटी की एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

ट्यूमर से उत्पन्न कोशिकी पुटिका (ट्यूमर-डराइव्ड एक्सटरसेल्लुलर वेसिकल्स) कैंसर बायोमार्कर के रूप में उभरते हैं। हालांकि ट्यूमर-डराइव्ड एक्सटरसेल्लुलर वेसिकल्स अन्य कैंसर बायोमार्कर की तुलना में रक्त में काफी अधिक मात्रा में होते हैं, अन्य रक्त घटकों की तुलना में उनकी सघनता अपेक्षाकृत कम रहती है। ट्यूमर-डराइव्ड एक्सटरसेल्लुलर वेसिकल्स के समान आकार वाले रक्त में कणों की उपस्थिति केवल एक संवेदनशील बल्कि चयनात्मक सेंसर भी उसके बारे में पता लगा सकता है।

कैसे बना तथा कैसे काम करता है नैनोसेंसर

नैनोस्केल पर सेंसर दो कंघों की तरह एक दूसरे में गुंथा हुआ दिखता है, जो कंघों के दांतों के बीच जगह छोड़ देता है, इसमें 120 नैनोमीटर के आसपास के इलेक्ट्रोड होते हैं। छोटे आकार की जगह संकेतों को बताती है। सेंसर में चयन के दो स्तर और पता करने के दो स्तर होते हैं।

यह कम सघनता पर भी कणों का सटीक पता लगा लेता है। इस सेंसर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यह कैंसर कणों का पता आसानी से लगा लेता है। ट्वेंटी विश्वविद्यालय में नैनोइलेक्ट्रॉनिक समूह के शोधकर्ताओं में से एक दिलू मैथ्यू कहते हैं कि, यह सेंसर अन्य सेंसर के विपरीत अतिसंवेदनशील है, यह रक्त में ट्यूमर-डराइव्ड एक्सटरसेल्लुलर वेसिकल्स का पता लगाने के लिए चिकित्सा के अनुरूप कार्य करता है।

इस नए सेंसर पर काम कर रहे मैथ्यू कहते है कि हमारा लक्ष्य एक ऐसा सेंसर बनाना है जो कम मात्रा में भी रक्त में ट्यूमर-डराइव्ड एक्सटरसेल्लुलर वेसिकल्स का पता लगाने में सक्षम हो। उनके सहयोगी पेपीजन बीकमैन कहते हैं कि, लैब में हमने पहले ही यह कर दिखाया है, कि हम हर तरह के नैनोकणों का पता लगा सकते हैं।

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