

अंटार्कटिका के नीचे छिपे प्राचीन पहाड़ 65 से 45 करोड़ साल पुराने, इनके खनिजों ने पृथ्वी के इतिहास के संकेत दिए।
वैज्ञानिकों ने समुद्री तलछट से 1,712 जिरकॉन कणों का अध्ययन कर प्राचीन पर्वतों की उत्पत्ति और उम्र का पता लगाया।
विशाल पहाड़ों के घिसने से समुद्र में पोषक तत्व पहुंचे, जिससे प्रकाश संश्लेषण करने वाले सूक्ष्म जीवों की वृद्धि हुई।
पहाड़ों से आई तलछट ने जैविक कार्बन को समुद्र में दबाने में मदद की, जिससे वातावरण में ऑक्सीजन बढ़ सकी।
शोध के अनुसार, प्राचीन पर्वत निर्माण और पृथ्वी पर जटिल जीवन के बड़े विकास के बीच महत्वपूर्ण संबंध हो सकता है।
अंटार्कटिका की मोटी बर्फ के नीचे आज भले ही प्राचीन पहाड़ दिखाई नहीं देते, लेकिन उनके छोटे-छोटे खनिज कण पृथ्वी पर जटिल जीवन के विकास की कहानी बता रहे हैं। नए शोध के अनुसार, लाखों साल पहले मौजूद विशाल पहाड़ों के घिसने से ऐसे बदलाव हुए, जिन्होंने पृथ्वी के वातावरण और जीवन के विकास में अहम भूमिका निभाई हो सकती है।
बर्फ के नीचे छिपी पहाड़ों की कहानी
अंटार्कटिका में मौजूद ये प्राचीन पर्वत अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। समय के साथ हवा, पानी और बर्फ ने इन्हें घिस दिया। हालांकि इन पहाड़ों से निकले खनिज समुद्र में जमा होते रहे। वैज्ञानिकों ने इन्हीं खनिजों के सहारे उन विशाल पर्वतों के आकार और इतिहास को समझने की कोशिश की।
अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंस लेटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन को जर्मनी के जीएफजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया। शोध के लिए अंटार्कटिका के आसपास समुद्री तलछट में मौजूद बेहद छोटे खनिज कणों का अध्ययन किया गया।
1,712 जिरकॉन कणों से मिली जानकारी
वैज्ञानिकों ने समुद्री तलछट से निकाले गए 1,712 जिरकॉन खनिज कणों की उम्र का पता लगाया। जिरकॉन वैज्ञानिकों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इसमें मौजूद यूरेनियम एक निश्चित दर से बदलता है। इस प्रक्रिया के आधार पर वैज्ञानिक यह पता लगा सकते हैं कि खनिज का निर्माण कब हुआ था।
अध्ययन में सामने आया कि अधिकांश जिरकॉन कण करीब 65 करोड़ से 45 करोड़ साल पुराने हैं। यह वह समय था जब गोंडवाना नाम का विशाल सुपरमहाद्वीप बन रहा था। इसमें आज के अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप, भारत, ऑस्ट्रेलिया और मेडागास्कर के बड़े हिस्से शामिल थे।
हिमालय जैसे विशाल पहाड़ों के प्रमाण
वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका से मिले जिरकॉन की तुलना दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की नदियों से मिले तलछट के आंकड़ों से की। इससे संकेत मिला कि इनमें से कई खनिज उन पर्वतों की गहरी जड़ों से आए थे, जो आकार और संरचना में आज के हिमालय जैसे विशाल पर्वतों के समान रहे होंगे। शोधकर्ताओं ने इन प्राचीन पर्वतों को “गोंडवानन सुपरमाउंटेन्स” से जोड़ा है। उनका मानना है कि यह पृथ्वी के इतिहास में बने सबसे बड़े और विशाल पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल थे।
पहाड़ों के घिसने से समुद्र को मिले पोषक तत्व
इन विशाल पर्वतों के धीरे-धीरे टूटने और घिसने की प्रक्रिया ने पृथ्वी के पर्यावरण को प्रभावित किया होगा। बारिश, नदियों, बर्फ और अन्य प्राकृतिक प्रक्रियाओं ने पहाड़ों की चट्टानों को तोड़ा और बड़ी मात्रा में तलछट समुद्र तक पहुंचाई।
इस तलछट के साथ कई जरूरी पोषक तत्व भी समुद्र में पहुंचे होंगे। इन पोषक तत्वों ने प्रकाश संश्लेषण करने वाले सूक्ष्म जीवों और अन्य जीवों की वृद्धि को बढ़ावा दिया होगा। ये जीव समुद्री खाद्य श्रृंखला की शुरुआती कड़ी होते हैं।
ऑक्सीजन बढ़ाने में भी हो सकती है भूमिका
प्रकाश संश्लेषण करने वाले सूक्ष्म जीवों के बढ़ने से बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन पैदा हुई होगी। लेकिन केवल ऑक्सीजन का बनना ही पर्याप्त नहीं था। उसे वातावरण में जमा होने के लिए ऐसी परिस्थितियां भी जरूरी थीं, जिनमें वह दोबारा कार्बन के साथ प्रतिक्रिया करके खत्म न हो जाए।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पर्वतों से आई तलछट ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो सकती है। प्रकाश संश्लेषण से बने कुछ जैविक कार्बन को तलछट ने समुद्र के नीचे दबा दिया। इसके कारण वह ऑक्सीजन के साथ दोबारा प्रतिक्रिया नहीं कर पाया। इससे वातावरण में ऑक्सीजन के जमा होने का रास्ता खुला।
जटिल जीवन के विकास से जुड़ा संबंध
शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी पर पर्वत निर्माण और जीवन के बड़े विकास के बीच संबंध हो सकता है। करीब 65 करोड़ से 45 करोड़ साल पहले का समय पृथ्वी पर बड़े जैविक बदलावों के लिए महत्वपूर्ण था। इसी दौरान गोंडवाना का निर्माण और विशाल पर्वतों का विकास हुआ।
यह अध्ययन इस संभावना को मजबूत करता है कि पृथ्वी के पहाड़ केवल भौगोलिक संरचनाएं नहीं थे, बल्कि उन्होंने समुद्र के पोषक तत्वों, कार्बन के दफन होने और वातावरण में ऑक्सीजन के बढ़ने जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित किया होगा। इन बदलावों ने आगे चलकर जटिल जीवन के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में मदद की हो सकती है।