अब तक 36,000 से अधिक पृथ्वी के निकट के एस्टेरॉयडों की खोज की जा चुकी है

अंतरराष्ट्रीय एस्टेरॉयड दिवस पर संयुक्त राष्ट्र की पहल से पृथ्वी के निकट आने वाले खगोलीय पिंडों के खतरे और सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने का प्रयास।
तुंगुस्का विस्फोट 1908 और चेल्याबिंस्क घटना 2013 ने दिखाया कि छोटे खगोलीय पिंड भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
तुंगुस्का विस्फोट 1908 और चेल्याबिंस्क घटना 2013 ने दिखाया कि छोटे खगोलीय पिंड भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • अंतरराष्ट्रीय एस्टेरॉयड दिवस हर वर्ष 30 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी के क्षुद्रग्रह खतरे पर जागरूकता बढ़ाना है।

  • संयुक्त राष्ट्र ने 2016 में यह दिवस घोषित किया, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ग्रह सुरक्षा और संकट संचार को मजबूत करना है।

  • तुंगुस्का विस्फोट 1908 और चेल्याबिंस्क घटना 2013 ने दिखाया कि छोटे खगोलीय पिंड भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

  • 2029 में एस्टेरॉयड अपोफिस पृथ्वी के बहुत करीब से गुजरेगा, जो वैज्ञानिकों और जनता के लिए दुर्लभ खगोलीय अवसर होगा।

  • वैश्विक संस्थाएं जैसे यूएनओओएसए, सीओपीयूओएस, आईएडब्ल्यूएन और एसएमपीएजी मिलकर एस्टेरॉयड की निगरानी और खतरों से बचाव की रणनीति बनाते हैं।

दिसंबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक अहम प्रस्ताव पारित किया, जिसे संकल्प ए/आरईएस /71/90 कहा जाता है। इस निर्णय के तहत हर साल 30 जून को अंतरराष्ट्रीय एस्टेरॉयड या क्षुद्रग्रह दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई।

इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर के लोगों को क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) से होने वाले खतरे के बारे में जागरूक करना है। यह दिन 30 जून 1908 को रूस के साइबेरिया क्षेत्र में हुए तुंगुस्का विस्फोट की याद में मनाया जाता है, जिसे इतिहास का सबसे बड़ा ज्ञात एस्टेरॉयड विस्फोट माना जाता है।

इस पहल को अंतरिक्ष यात्रियों के संघ ने प्रस्तावित किया था और इसे अंतरिक्ष मामलों की संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा समर्थन मिला।

अंतरिक्ष से आने वाला खतरा

एस्टेरॉयड और धूमकेतु जैसे खगोलीय पिंड जब पृथ्वी की कक्षा के पास आते हैं, तो उन्हें पृथ्वी के निकट की वस्तुएं (एनईओ) कहा जाता है। ये ऐसे पिंड होते हैं जो सूर्य से लगभग 1.3 खगोलीय इकाई (करीब 19.5 करोड़ किलोमीटर) की दूरी तक आते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि कोई एस्टेरॉयड 75 लाख किलोमीटर से भी कम दूरी से गुजरता है और उसका आकार 140 मीटर से बड़ा होता है, तो वह पृथ्वी के लिए खतरा बन सकता है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार अब तक 36,000 से अधिक पृथ्वी के निकट के एस्टेरॉयड की खोज की जा चुकी है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि वैज्ञानिक नई खोजें कर रहे हैं।

तुंगुस्का और चेल्याबिंस्क की घटनाएं

इतिहास में कई बार पृथ्वी पर बड़े एस्टेरॉयड के प्रभाव देखने को मिले हैं।

1908 में साइबेरिया के तुंगुस्का क्षेत्र में एक विशाल विस्फोट हुआ था। इसे तुंगुस्का घटना कहा जाता है। यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि लाखों पेड़ नष्ट हो गए, लेकिन उस समय कोई बड़ा शहर इसकी चपेट में नहीं आया, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।

इसके बाद 2013 में रूस के चेल्याबिंस्क शहर के ऊपर एक बड़ा उल्कापिंड वायुमंडल में प्रवेश करते ही फट गया। इसे चेल्याबिंस्क उल्कापिंड कहा जाता है। इसकी ऊर्जा लगभग 440 किलोटन टीएनटी के बराबर थी और इससे एक हजार से अधिक लोग घायल हुए थे।

अपोफिस एस्टेरॉयड और 2029 की घटना

वर्ष 2029 में एक विशेष खगोलीय घटना होने वाली है। एस्टेरॉयड 99942 अपोफिस पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरेगा। यह लगभग 32,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जो कि कई उपग्रहों की कक्षा के भीतर है।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह पृथ्वी के लिए खतरा नहीं होगा, लेकिन यह एक दुर्लभ अवसर होगा जब अरबों लोग इसे नंगी आंखों से देख सकेंगे।

इस घटना को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2029 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसे एस्टेरॉयड जागरूकता और ग्रहीय रक्षा का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष 2029 के रूप में मनाने की योजना बनाई गई है।

वैश्विक सहयोग और अंतरिक्ष संस्थाएं

संयुक्त राष्ट्र के तहत संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष मामलों का कार्यालय लंबे समय से अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी संभावित खतरे की स्थिति में पूरी दुनिया मिलकर कार्रवाई कर सके।

इसके अलावा बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर समिति ने 2013 में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, जिनके आधार पर आगे की योजनाएं बनीं।

2014 में दो महत्वपूर्ण वैश्विक संगठन बनाए गए - अंतर्राष्ट्रीय एस्टेरॉयड चेतावनी नेटवर्क और अंतरिक्ष मिशन योजना सलाहकार समूह। इनका काम एस्टेरॉयड की पहचान करना, उनकी निगरानी करना और यदि आवश्यक हो तो उन्हें रोकने की रणनीति बनाना है।

एस्टेरॉयड पृथ्वी के लिए एक संभावित प्राकृतिक खतरा हो सकते हैं, लेकिन आधुनिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने इस खतरे को काफी हद तक समझने और नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय एस्टेरॉयड दिवस जैसे आयोजन लोगों को जागरूक करते हैं कि पृथ्वी की सुरक्षा केवल एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की जिम्मेदारी है।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in