जयपुर में अवैध कचरा डिपो पर रिपोर्ट तलब, एनजीटी का निर्देश

जयपुर में अवैध कचरा डिपो पर एनजीटी की सख्ती, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर रोक
फाइल फोटो: सीएसई
फाइल फोटो: सीएसई
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सारांश
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जयपुर में अवैध कचरा डिपो पर सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

  • यह स्थल आवासीय क्षेत्र के पास स्थित है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

  • मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च 2026 को होगी।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 जनवरी 2026 को जयपुर नगर निगम को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुपालन को सुनिश्चित करने तथा पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करते हुए ठोस कचरे के खुले में जलाने पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

यह मामला जयपुर के रीको क्षेत्र में स्थित राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की भूमि से संबंधित है, जिसका क्षेत्रफल 14,545.055 वर्ग मीटर है। यह स्थल एक आवासीय इलाके से सटा हुआ है और वर्ष 2001 से प्रदूषण तथा स्वास्थ्य जोखिम का बड़ा स्रोत बना हुआ है।

निवासियों द्वारा विभिन्न प्राधिकरणों को बार-बार शिकायतें देने के बावजूद यहां अवैध रूप से संचालित खुला कचरा डिपो लगातार मौजूद है।

अपील में कहा गया है कि यहां खुले कचरे का अवैध संचालन हो रहा है और इसके लिए न तो कंसेंट टू ऑपरेट, न कंसेंट टू एस्टैब्लिश और न ही पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त है।

आगे तर्क दिया गया कि यह स्थल लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित एक ट्यूबवेल और पानी की टंकी के बेहद पास स्थित है।

ये जलस्रोत जयपुर के मानसरोवर स्थित एसएफएस कॉलोनी के निवासियों के लिए पीने के पानी का एकमात्र स्रोत हैं और आवासीय क्षेत्र में खुले पड़े खतरनाक कचरे के कारण इनके दूषित होने की आशंका जताई गई है, जिससे जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

इसके अलावा, कचरा डिपो का लगातार संचालन उन निवासियों के लिए और भी गंभीर चिंता का विषय है जो पहले से ही जानलेवा बीमारियों से पीड़ित हैं, साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी, क्योंकि इससे पैदा होने वाला प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।

अपील में यह भी कहा गया है कि यह स्थल जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अत्यंत निकट है, जिससे बड़ी संख्या में पक्षी आकर्षित होते हैं। इससे पक्षी-टकराव (बर्ड स्ट्राइक) का सीधा और गंभीर खतरा पैदा होता है, जो विमानन सुरक्षा को भी जोखिम में डालता है।

आवेदक के वकील ने आगे दलील दी कि कचरे को खुले में जलाया जा रहा है और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करते हुए उसका निस्तारण किया जा रहा है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरपीसीबी) के वकील ने बताया कि समिति के सदस्यों ने 10 जनवरी 2026 को स्थल का निरीक्षण किया है और वे शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में हैं।

रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अल्प समय मांगा गया, जिस पर अदालत ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर दाखिल की जाए।

जयपुर के जिला कलेक्टर, जयपुर नगर निगम, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), केंद्रीय भूजल बोर्ड तथा रवि ट्रैवल्स ने भी अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। अदालत ने सभी को तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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