

आलीशान दिल्ली दरबार शान-ओ-शौकत से लगा हुआ था। राजकीय हाथी के हौद से राजा जॉर्ज पंचम ने दूर-दूर तक देखा। चारों ओर खाली मैदान था।
हौद में अपने साथ बैठे एक दूसरे अंग्रेज की ओर देखते हुए उन्होंने कहा, “देख रहे हो लुटियंस! दूर-दूर तक खाली मैदान! मैं चाहूं तो रातों-रात इस खाली मैदान को प्रॉपर्टी में बदल सकता हूं!”
पास बैठे अंग्रेज ने पूछा, “इसमें क्या बड़ी बात है पंचम दा! देसी मैदान का नाम बदलकर अंग्रेजी प्रॉपर्टी कर दो। परंतु हे राजन! क्या आपको भी नाम बदलने का चस्का लग गया है?” राजा जॉर्ज पंचम ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम मेरा कमाल देखो!”
रात ठीक 8 बजे राजा जॉर्ज पंचम लाल किले की बालकनी में प्रकट हुए और उन्होंने घोषणा की कि आज रात 12 बजे के बाद भारत की राजधानी कलकत्ते से दिल्ली शिफ्ट हो जाएगी। यह सुनकर बाहर मैदान में उपस्थित जनता में खुशी और शीत की लहर दौड़ गई। राजा जॉर्ज पंचम द्वारा लप्प से की गई इस घोषणा से सभी लोग हैरान थे। केवल लुटियंस साहब परेशान थे। उन्होंने पूछा, “पंचम दा! भला 4 घंटे में राजधानी कैसे शिफ्ट हो सकती है?”
जॉर्ज पंचम ने कहा, “4 घंटे में पूरे देश में लॉकडाउन लग सकता है, नोटबंदी हो सकती है तो आपसे राजधानी दिल्ली नहीं लाई जाएगी? आपसे न हो पाएगा तो बताइए, मैं ईडी, आयकर विभाग से बात करूं।”
लुटियंस साहब राजा जॉर्ज पंचम के मन की बात को समझ गए और रातों रात दिल्ली को राजधानी बनाने का काम शुरू हो गया। रात 12 बजे राजा जॉर्ज पंचम और लुटियंस साहब हाथी के हौद पर सवार होकर नई राजधानी को देखने के लिए निकल पड़े। जॉर्ज पंचम ने कहा, “राजधानी दिल्ली तो वाकई खूबसूरत बनाई है। चौड़ी सड़कें हैं, ट्रैफिक की बत्तियां काम कर रही हैं, लोग ट्रैफिक के नियमों को मान रहे हैं, हरे-भरे पेड़ों की कतारें हैं...”
लुटियंस बोले, “जनाब-ए-आली मैंने इसका नाम लुटियंस दिल्ली रखा है! पर मैं अब भी कहना चाहूंगा कि आप दिल्ली को राजधानी मत बनाओ।”
इसके पहले जॉर्ज पंचम कुछ बोलते उनका हाथी अचानक बिदककर ऐसे इलाके में चला गया जहां भीड़ और गंदगी का साम्राज्य था। सड़कों पर आवारा पशु घूम रहे थे, जगह-जगह कूड़े का ढेर था। लुटियंस बोले, “पंचम दा अभी तक हम लुटियंस दिल्ली में थे और अभी हम लुटी-पिटी दिल्ली में हैं। लुटी पिटी दिल्ली में “वी दी पीपल” रहेंगे और लुटियंस दिल्ली में उनके प्रतिनिधि। वैसे मैं अब भी कहा रहा हूं आप दिल्ली को राजधानी मत बनाओ वर्ना आगे चलकर आपको अपने इस ज्वेल इन दी क्राउन भारत से हाथ धोना पड़ेगा।”
जॉर्ज पंचम खीजकर बोले, “ यू के दिल्ली को राजधानी मत बनाओ की रट लगा राखी है ताऊ! दिल्ली है दिलवालों की!”
अपनी नई राजधानी में जॉर्ज पंचम खुशी-खुशी राज करने लगे पर हाय उनकी खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। एक रात अचानक तेज खांसी से उनकी नींद खुली। कमरे में भरी जहरीली हवा से उनका दम घुट रहा था। उन्होंने खिड़की-दरवाजे खोल दिए पर बाहर का हाल और बुरा था। उनके प्यारे शहर को जहरीली हवा ने ढक रखा था। उन्होंने अपने कमरे में रखे एयर-प्यूरीफायर को देखा जहां एक्यूआई 10 हजार पार कर चुका था।
तभी लुटियंस की आवाज आई, “मैंने आपको कई बार आगाह किया कि दिल्ली को राजधानी मत बनाइए, वर्ना इसकी प्रदूषित हवा के चलते आपको भारत से हाथ धोना पड़ेगा पर आपने मेरी एक न सुनी ...”
जाॅर्ज पंचम ने आव देखा न ताव। उन्होंने अपना बोरिया बिस्तर उठाया और महल से बाहर निकल कर भागने लगे और लंदन पहुंच कर ही दम लिया। उनके पीछे पीछे पूरा अंग्रेजी राज भी भारत से भागता हुआ लंदन पहुंच गया।
और इस तरह अहिंसक तरीके से भारत अंग्रेजों से आजाद हो गया। नेहेरुवियन इतिहासकारों ने आज तक हम लोगों को गलत इतिहास पढ़ाया है।