बीते नौ साल में आठ बार दिवाली के अगले दिन बिगड़ी दिल्ली-एनसीआर की हवा, इस बार भी गंभीर श्रेणी में पहुंची वायु गुणवत्ता

सुप्रीम कोर्ट के एक दशक के पटाखा नियंत्रण संबंधी आदेशों के बावजूद दिवाली की रात दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 20 पर एक्यूआई गंभीर श्रेणी में पहुंचा, रात 11 बजे शहर का रीयल-टाइम एक्यूआई 373 था, जबकि अगले दिन सुबह 3 बजे यह 367 दर्ज हुआ
दिल्ली में पटाखों का शोर, छाया धुंध, फोटो : विकास चौधरी
दिल्ली में पटाखों का शोर, छाया धुंध, फोटो : विकास चौधरी
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दिल्ली-एनसीआर अक्तूबर के अंत और नवंबर यानी सर्दियों की शुरुआत होते ही एक दमघोंटू धुंध में फंस जाता है। इस बीच दिवाली का त्यौहार वायु प्रदूषण को आक्रामक करने के लिए और ज्यादा ईंधन दे देता है। बीते दस सालों से यह ट्रेंड बदस्तूर जारी है। बहरहाल दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में दाखिल हो रही है। यदि मौसम की गतिविधियां प्रदूषण को बांधने वाली रहीं तो आपात स्थिति पैदा हो सकती है।   

दिल्ली-एनसीआर में 2026 की दिवाली भी पटाखों की गूंज और आंखों में जलन के बीच गुजरी।  पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पिछले एक दशक से लगातार आदेश और निर्देश प्रभावी नहीं रहे। कभी पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई गई, कभी कम उत्सर्जन वाले और हरित पटाखों को शर्तों के साथ अनुमति दी गई और कभी पूरे साल के लिए प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाए गए। लेकिन इन तमाम न्यायिक हस्तक्षेपों के बीच दिवाली की रात इस बार भी दिल्ली के कई इलाकों की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।

आठ नवंबर 2026 को दिवाली की रात दिल्ली के 59 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 20 पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 401 से ऊपर दर्ज किया गया।  करीब रात 10 बजे दिल्ली का समग्र एक्यूआई 371 था। इस समय 33 निगरानी केंद्रों पर हवा बहुत खराब और छह पर खराब श्रेणी में थी। सोनिया विहार में एक्यूआई 463 और जहांगीरपुरी में 450 दर्ज किया गया। सोनिया विहार, जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, बुराड़ी, ओखला और रोहिणी में पूरे दिन हवा गंभीर श्रेणी में बनी रही।

पटाखे चलने के चरम समय के आंकड़े भी प्रदूषण की स्थिति की पुष्टि करते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के रीयल-टाइम आंकड़ों के मुताबिक, रात 9 बजे दिल्ली का एक्यूआई 370 था, जो रात 11 बजे तक 373 एक्यूआई तक ही बना रहा। दोनों समय पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये किसी खास समय के रीयल-टाइम आंकड़े हैं, 24 घंटे का औसत नहीं। रात 11 बजे दिल्ली का एक्यूआई गंभीर श्रेणी की 401 की सीमा से 28 अंक नीचे था।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दूसरे शहरों में भी रात 9 से 11 बजे के बीच प्रदूषण का स्तर बढ़ा। गाजियाबाद में एक्यूआई 353 से 360, नोएडा में 312 से 319, गुरुग्राम में 276 से 280 और फरीदाबाद में 291 से 297 हो गया। ग्रेटर नोएडा में यह 299 से बढ़कर 301 पहुंचा और हवा खराब से बहुत खराब श्रेणी में आ गई। बहादुरगढ़ में एक्यूआई 327 से 340 और रोहतक में 328 से 339 दर्ज किया गया। हालांकि, बल्लभगढ़ में यह 388 से घटकर 383 और बुलंदशहर में 374 से घटकर 368 रहा। रात 11 बजे बल्लभगढ़ का एक्यूआई इन शहरों में सबसे अधिक था।

देश के 285 शहरों की सूची में दिल्ली रात 11 बजे 373 एक्यूआई के साथ चौथे स्थान पर मौजूद था। उससे ऊपर मंडी गोबिंदगढ़ में 389, खोरा में 384 और बल्लभगढ़ में 383 एक्यूआई दर्ज किया गया।

दिवाली के दौरान 10 साल के 24 घंटे के औसत एक्यूआई का विश्लेषण, विवेक मिश्राौ2अं
दिवाली के दौरान 10 साल के 24 घंटे के औसत एक्यूआई का विश्लेषण, विवेक मिश्राौ2अं

दिल्ली में फैली प्रदूषण की परत

दिवाली के बाद 9 नवंबर की सुबह भी दिल्ली की हवा में खास सुधार नहीं दिखा। सुबह 3 बजे के उपलब्ध आंकड़ों में दिल्ली का एक्यूआई 367 था। सीपीसीबी के डैशबोर्ड पर पिछले तीन दिनों के आंकड़े 6 नवंबर को 382, 7 नवंबर को 369 और 8 नवंबर को 376 दर्ज थे। इस तरह लगातार तीन दिन शहर की हवा बहुत खराब श्रेणी में बनी रही।

डैशबोर्ड के निगरानी केंद्रों वाले नक्शे में दिल्ली के बड़े हिस्से में लाल रंग के संकेतक दिखाई देते हैं। ये अलग-अलग निगरानी केंद्रों की एक्यूआई रीडिंग हैं। इसका अर्थ है कि प्रदूषण केवल एक या दो इलाकों तक सीमित नहीं था, बल्कि शहर के कई हिस्सों में हवा की गुणवत्ता खराब थी। हालांकि, शहर के समग्र एक्यूआई और अलग-अलग निगरानी केंद्रों के आंकड़ों में अंतर है। समग्र एक्यूआई से यह नहीं पता चलता कि हर इलाके में प्रदूषण का स्तर समान है।

सीपीसीबी के मुताबिक, 8 नवंबर को दिल्ली का दैनिक औसत एक्यूआई 376 रहा, जबकि 7 नवंबर को यह 369 था। इस तरह दैनिक औसत में सात अंकों की वृद्धि हुई। इसे रात 9 और 11 बजे के रीयल-टाइम आंकड़ों से अलग समझना चाहिए।

बीती आठ दिवाली का सबक

दिवाली के आसपास दिल्ली-एनसीआर के छह शहरों दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद के एक्यूआई आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण बताता है कि 2017 से 2025 के बीच नौ में से आठ वर्षों में दिवाली के अगले दिन इन शहरों का औसत एक्यूआई दिवाली वाले दिन से अधिक रहा। वर्ष 2022 इसका अपवाद था।

नवंबर में दिवाली पड़ने वाले पांच वर्षों के आंकड़े इस रुझान को और स्पष्ट करते हैं। 2018 में दिवाली के दिन इन छह शहरों का औसत एक्यूआई करीब 269 था, जो अगले दिन बढ़कर 416 हो गया। 2020 में यह 404 से बढ़कर 430 और 2021 में 387 से बढ़कर करीब 469 पहुंचा। 2023 में दिवाली के दिन औसत एक्यूआई करीब 187 था, लेकिन अगले दिन यह बढ़कर 352 हो गया।

2021 में अगले दिन सभी छह शहरों में एक्यूआई 460 के आसपास या उससे अधिक था। दिल्ली में यह 382 से बढ़कर 462, गाजियाबाद में 419 से 470, नोएडा में 404 से 475, ग्रेटर नोएडा में 322 से 464, गुरुग्राम में 395 से 472 और फरीदाबाद में 399 से 469 पहुंच गया।

2023 का आंकड़ा एक अलग तस्वीर दिखाता है। उस साल दिवाली के दिन दिल्ली का एक्यूआई 218, नोएडा का 189 और ग्रेटर नोएडा का 165 था। अगले दिन ये क्रमश: 358, 363 और 342 हो गए। छह शहरों का औसत एक्यूआई एक दिन में करीब 88 फीसदी बढ़ा। यानी दिवाली के दिन अपेक्षाकृत बेहतर रही हवा अगले दिन बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई।

हालांकि, हर साल यह रुझान एक जैसा नहीं था। 2022 में दिवाली के दिन छह शहरों का औसत एक्यूआई करीब 295 था, जबकि अगले दिन यह घटकर 287 रह गया। उस साल दिल्ली का एक्यूआई 312 से घटकर 302 और गाजियाबाद का 300 से 266 हो गया था।

अक्टूबर में दिवाली पड़ने वाले वर्षों में भी ज्यादातर बार अगले दिन एक्यूआई बढ़ा। 2017 में दिवाली के दिन उपलब्ध पांच शहरों का औसत करीब 300 था, जो अगले दिन उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर 404 तक पहुंचा। 2019 में छह शहरों का औसत 340 से बढ़कर 378 और 2024 में 276 से बढ़कर 281 हुआ। 2025 में यह 291 से बढ़कर 319 पहुंच गया।

इस तरह 2017 से 2025 के बीच दिवाली के अगले दिन प्रदूषण बढ़ने का रुझान अक्टूबर और नवंबर, दोनों महीने में दिवाली पड़ने वाले वर्षों में दिखाई दिया। 2026 के आंकड़े भी बताते हैं कि इस बार दिवाली की रात कई इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंची, हालांकि अभी इस वर्ष के लिए पिछले वर्षों की तरह तीन दिनों का तुलनीय छह शहरों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

दिवाली के अगले दिन दिल्ली-एनसीआर की 24 घंटे औसत एक्यूआई में हुए बदलाव, विवेक मिश्रा
दिवाली के अगले दिन दिल्ली-एनसीआर की 24 घंटे औसत एक्यूआई में हुए बदलाव, विवेक मिश्रा

85 फीसदी मौकों पर एक्यूआई बढ़ा

2017 से 2025 के बीच दिल्ली-एनसीआर के छह शहरों में दिवाली के दिन और उसके अगले दिन के एक्यूआई की तुलना करने पर पता चलता है कि ज्यादातर मौकों पर अगले दिन हवा की गुणवत्ता और खराब हुई। उपलब्ध 52 तुलनाओं में 44 बार एक्यूआई बढ़ा, सात बार घटा और एक बार इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इसका मतलब है कि इन नौ वर्षों में छह शहरों में दिवाली के अगले दिन करीब 85 फीसदी मौकों पर एक्यूआई बढ़ा। केवल 2022 ऐसा साल रहा, जब छह में से पांच शहरों में अगले दिन एक्यूआई घटा। इसके उलट, 2023 में सभी छह शहरों में अगले दिन एक्यूआई में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

दस साल और दर्जनों आदेश

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2016 से अक्टूबर 2026 के बीच कई अहम हस्तक्षेप किए। इन आदेशों का रुख समय के साथ बदलता रहा। शुरुआत में बिक्री के लाइसेंस निलंबित किए गए, फिर चरणबद्ध नियंत्रण और हरित पटाखों को अनुमति दी गई। बाद में पूरे साल के प्रतिबंध की दिशा में कदम बढ़ा, लेकिन उसके प्रभावी क्रियान्वयन में मुश्किलों के बाद अदालत ने फिर सीमित अवधि की अनुमति दी।

नवंबर 2016 में अरुण गोपाल मामले में अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की थोक और खुदरा बिक्री के सभी लाइसेंस निलंबित करने का निर्देश दिया था। सितंबर 2017 में अदालत ने इस पूर्ण रोक को संशोधित करते हुए चरणबद्ध नियंत्रण का रास्ता अपनाया और अस्थायी लाइसेंसों की संख्या आधी करने का निर्देश दिया।

23 अक्टूबर 2018 को अदालत ने कम उत्सर्जन वाले और हरित पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति दी, जबकि दूसरे पटाखों पर रोक लगाई। इसके साथ ही पटाखों की बिक्री लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों तक सीमित की गई, ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाई गई और बेरियम लवण के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया। दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए रात 8 से 10 बजे तक की समय सीमा भी तय की गई। 31 अक्टूबर 2018 को अदालत ने स्पष्ट किया कि कम उत्सर्जन वाले पटाखों और बेरियम पर रोक संबंधी निर्देश दिल्ली-एनसीआर के लिए हैं, जबकि समय सीमा और कुछ अन्य निर्देश पूरे देश में लागू होंगे।

29 अक्टूबर 2021 को अदालत ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन पहले से तय प्रतिबंधित रसायनों और हरित पटाखों संबंधी निर्देशों को जारी रखा।

7 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेरियम और प्रतिबंधित रसायनों वाले पटाखों पर रोक के उसके निर्देश केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में लागू हैं।

नवंबर 2024 में अदालत ने दिल्ली सरकार से पटाखों पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल किए और दूसरे एनसीआर राज्यों को भी इस दिशा में निर्णय लेने को कहा। 19 दिसंबर 2024 को दिल्ली सरकार ने पूरे साल पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया, जो 1 जनवरी 2025 से प्रभावी होना था। अदालत ने इस प्रतिबंध को एनसीआर के दूसरे राज्यों में भी लागू करने की जरूरत बताई।

17 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा को अपने एनसीआर क्षेत्रों में दिल्ली की तरह स्थायी प्रतिबंध लगाने पर विचार करने को कहा और तब तक इन राज्यों में लागू प्रतिबंध को आगे बढ़ा दिया। 3 अप्रैल 2025 को अदालत ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 5 के तहत एनसीआर क्षेत्रों में समान प्रतिबंध संबंधी निर्देश जारी करने को कहा।

हालांकि, 2025 में अदालत ने अपने रुख में फिर बदलाव किया। 15 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी और परीक्षण के तौर पर प्रमाणित हरित पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की सीमित अनुमति दी। बिक्री के लिए 18 से 20 अक्टूबर की अवधि और पटाखे चलाने के लिए दिवाली से एक दिन पहले तथा दिवाली के दिन सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे का समय तय किया गया।

29 अक्टूबर 2026 को अदालत ने एक बार फिर सीमित अवधि के लिए प्रमाणित हरित पटाखों की अनुमति दी। इसके तहत 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे चलाने की अनुमति थी। अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर रोक लगाई गई। अदालत ने 9 नवंबर 2026 से पूर्ण प्रतिबंध दोबारा लागू करने का निर्देश दिया।

इस तरह एक दशक में अदालत का रुख पूर्ण रोक से नियंत्रित अनुमति और फिर पूर्ण प्रतिबंध की ओर लौटने के बाद दोबारा सीमित अनुमति तक पहुंचा। लेकिन इस बार भी दिवाली की रात दिल्ली के 20 निगरानी केंद्रों पर हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।

पटाखे अकेले जिम्मेदार नहीं, मौसम भी बड़ी वजह

दिल्ली में दिवाली के बाद प्रदूषण बढ़ने की आशंका केवल पटाखों के धुएं से नहीं जुड़ी थी। दिल्ली के वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी तंत्र ने 9 नवंबर से हवा के गंभीर श्रेणी में पहुंचने और अगले कुछ दिनों तक इसी स्थिति में बने रहने का अनुमान जताया था। इसके पीछे प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, दिवाली समारोह और आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं को कारण बताया गया।

पूर्व चेतावनी तंत्र के मुताबिक, वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे रहने और हवा की औसत गति 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम होने पर प्रदूषकों के फैलाव में बाधा आती है। ऐसी परिस्थितियों में उत्सर्जित प्रदूषक वातावरण में जमा हो सकते हैं।

वहीं, फोरकास्ट के मुताबिक, 8 नवंबर को शहर के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 19 फीसदी रहने की आशंका थी। पराली जलाने की हिस्सेदारी 3.5 फीसदी आंकी गई थी। 9 नवंबर के लिए इसका अनुमान करीब 2.99 फीसदी था। पीएम2.5 दिल्ली में प्रमुख प्रदूषक बना रहा। पटाखों से निकलने वाले उत्सर्जन ने भी हवा में कणीय प्रदूषण का भार बढ़ाया। दिवाली के अगले दिन एक्यूआई को दरअसल मौसम की स्थिति, हवा की गति, प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। नौ वर्षों के आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि दिवाली के अगले दिन दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर शहरों में हवा और खराब हुई। वहीं, 2026 के आंकड़े बताते हैं कि पटाखों पर नियंत्रण के लिए तय समय और नियमों के बावजूद दिवाली की रात दिल्ली के कई इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी तक पहुंच गई। फोरकास्ट के मुताबिक, वायु गुणवत्ता की स्थिति आने वाले कुछ दिन ऐसी ही बनी रह सकती है।