

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इस्पात क्षेत्र में ग्रीन तकनीक अपनाने हेतु चार पायलट परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई।
केरल में बर्ड फ्लू से 1156 किसान प्रभावित हुए और 1.68 लाख से अधिक पक्षियों को रोकथाम के लिए नष्ट किया गया।
केंद्रीय जल आयोग और डीआरडीओ द्वारा बाढ़ और हिमस्खलन पूर्वानुमान के लिए एआई तकनीकों का उपयोग शुरू किया गया है।
नीति आयोग और सीएसआईआर की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 27.5 करोड़ बच्चों में खतरनाक स्तर तक सीसा प्रदूषण पाया गया।
चावल फोर्टिफिकेशन योजना के तहत पोषण सुधार के लिए आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 युक्त चावल देशभर में वितरित किया जा रहा है।
देश में ग्रीन इस्पात और हाइड्रोजन तकनीक की दिशा में पहल
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में सदन में सवालों का सिलसिला जारी है। इसी बीच सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, इस्पात मंत्रालय में राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने लोकसभा में बताया कि भारत सरकार इस्पात के क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत छोटे इस्पात संयंत्रों को ग्रीन हाइड्रोजन आधारित तकनीकों में बदलने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत झारखंड, कर्नाटक और ओडिशा में चार पायलट परियोजनाओं को कुल 83.376 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई है।
वर्मा ने बताया कि यह पहल इस्पात उद्योग में प्रदूषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही इस्पात मंत्रालय ने 23 दिसंबर 2024 को ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी भी जारी की है, जिसके तहत कम उत्सर्जन वाले इस्पात को परिभाषित और वर्गीकृत किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 85 इस्पात इकाइयों को ग्रीन स्टील प्रमाणन दिया गया है और कुल 14.64 मिलियन टन ग्रीन स्टील का उत्पादन हो रहा है। यह पहल भारत को टिकाऊ औद्योगिक विकास की ओर ले जाती है।
केरल में बर्ड फ्लू की स्थिति
बर्ड फ्लू को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर देते हुए आज, मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में कहा कि केरल में एवियन इन्फ्लुएंजा यानी बर्ड फ्लू का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसके कारण साल 2024-25 में 1156 किसान प्रभावित हुए हैं और 1,68,472 पक्षियों को मारना पड़ा है।
ललन सिंह ने कहा कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए राज्यों को सहायता प्रदान करती है। यह सहायता पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत दी जाती है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों 50:50 के अनुपात में खर्च साझा करते हैं। इसका उद्देश्य बीमारी के प्रसार को रोकना और किसानों को आर्थिक सहायता देना है।
आपदा प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग
सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारत में आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग ने 2025 में बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए एआई आधारित मॉडल विकसित करने की पहल की है। यह मॉडल नदियों के जल स्तर का छोटे अवधि का पूर्वानुमान लगाने में मदद करेगा। इसके अलावा आयोग अपने पोर्टल के माध्यम से सात दिन का बाढ़ पूर्वानुमान भी जारी कर रहा है।
राय ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन भी हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन के पूर्वानुमान के लिए एआई तकनीक का उपयोग कर रहा है। इस संबंध एक स्वचालित एआई आधारित हिमस्खलन पूर्वानुमान प्रणाली पर भी काम चल रहा है। यह तकनीक सेना और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
अपतटीय पवन ऊर्जा की संभावनाएं
सदन में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अपतटीय पवन ऊर्जा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास आठ-आठ जगहों की पहचान की गई है, जहां पवन ऊर्जा उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं।
हालांकि महाराष्ट्र तट पर किए गए अध्ययन में हवा की गति 6.1 से 6.5 मीटर प्रति सेकंड पाई गई, जो व्यावसायिक नजरिए से काफी नहीं मानी जाती। इस कारण वहां पवन ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाएं कम हैं। यह जानकारी भविष्य की ऊर्जा नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत में सीसा यानी लेड प्रदूषण की बढ़ती समस्या
सीसा यानी लेड प्रदूषण को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में कहा कि भारत में सीसा प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। मंत्री ने नीति आयोग और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि देश में 19 वर्ष से कम आयु के लगभग 27.5 करोड़ बच्चों के रक्त में सीसे का स्तर सामान्य से अधिक है।
यह समस्या बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इसलिए इस दिशा में जागरूकता और नियंत्रण उपायों की आवश्यकता है।
निपाह वायरस के मामले
सदन में उठे एक और प्रश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में बताया कि निपाह वायरस एक खतरनाक संक्रामक रोग है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका मुख्य स्रोत चमगादड़ माने जाते हैं। भारत में हाल के वर्षों में इसके कुछ मामले सामने आए हैं। जाधव ने कहा कि 2025 में केरल में चार मामले और 2026 में पश्चिम बंगाल में दो मामले दर्ज किए गए।
यह बीमारी तेजी से फैल सकती है और इसकी मृत्यु दर भी अधिक होती है। इसलिए सरकार इस पर लगातार नजर रख रही है और रोकथाम के उपाय कर रही है।
सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन
सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार ने सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। जो राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन है। इसके तहत शून्य से 40 वर्ष की आयु के लोगों की जांच की जा रही है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में।
पटेल ने बताया कि अब तक 6.97 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। यह अभियान 2047 तक इस बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
चावल फोर्टिफिकेशन और पोषण सुरक्षा
चावल फोर्टिफिकेशन को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आज, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभानिया ने राज्यसभा में कहा कि देश में कुपोषण और एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 मिलाए जाते हैं।
मंत्री ने बताया कि यह चावल विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे पीडीएस, आईसीडीएस और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से वितरित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम लगभग पूरे देश में लागू है और इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर पोषण प्रदान करना है।