नालागढ़ में लगी देश की पहली एपीआई कंपनी के खिलाफ गुस्सा, प्रदर्शन और रैली

2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था उद्घाटन। कंपनी पर जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण का आरोप लगाते हुए आसपास के गांवों के करीब 1,000 लोगों ने खोला मोर्चा
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची
Published on

हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में आज (23 मार्च 2026 को) दवा कंपनी किण्वन प्राइवेट लिमिटेड पर जल, वायु, ध्वनि प्रदूषण के गंभीर आरोप लगाते हुए करीब 1,000 लोगों ने प्रदर्शन किया और रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी नियमों का उल्लंघन कर रही है, इसलिए इसे तत्काल बंद किया जाए। आरोप है कि कंपनी द्वारा किए जा रहे जल प्रदूषण से भूजल प्रदूषित हो गया है और उससे दुर्गंध आ रही है।

किण्वन संघर्ष समिति, हंदूर पर्यावरण मित्र संस्था और हिम परिवेश संस्था द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन और रैली में 10-15 गांवों और शहर के लोग शामिल थे, जिनमें अधिकांश संख्या महिलाओं की थी।

किण्वन संघर्ष समिति के सचिव नरेश घई ने डाउन टू अर्थ को बताया कि नालागढ़ के प्लासड़ा गांव में दवा कंपनी की एपीआई (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स) यूनिट का उद्घाटन 2024 में किया गया था। यह देश की पहली एपीआई यूनिट है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कंपनी लगाने के लिए अनुदान दिया था और पर्यावरण के कानूनों को हटा दिया था। स्थानीय लोग इसकी बड़ी कीमत चुका रहे हैं।

नरेश घई का कहना है कि कंपनी से आने वाली दुर्गंध 4-5 किलोमीटर दूर तक फैली रहती है और लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। उनका कहना है कि दुर्गंध इतनी ज्यादा होती है कि लोगों को अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद करनी पड़ती है।

उन्होंने डाउन टू अर्थ को यह भी बताया कि पिछले दिनों कंपनी का एक टैंकर पकड़ा गया था जिसमें अनुपचारित अपशिष्ट ले जाया जा रहा था। टैंकर पकड़े जाने के बाद कंपनी पर 22 लाख रुपए का जुर्माना लगा था और एफआईआर भी दर्ज हुई थी। उनका कहना है कि कंपनी घनी आबादी के क्षेत्र में लगी है। कुछ दिनों कंपनी के पास नदी में मछलियां मरी हुई मिली थीं।

प्रदर्शनकारियों ने उप मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा है कि इस फैक्ट्री को केवल लगभग 6.71 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलडी) पानी इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है, लेकिन जो काम वहां चल रहा है, उसे देखकर यह समझ आता है कि इतना कम पानी वहां इस्तेमाल नहीं हो सकता। ज्ञापन में सवाल उठाया गया है आखिर इतना सारा पानी कहां से आ रहा है? क्या इसकी कोई अनुमति है या बिना किसी रोकटोक के पानी इस्तेमाल किया जा रहा है?

ज्ञापन के अनुसार, यह फैक्ट्री चिकनी नदी/खड्ड के बिल्कुल पास है। यह नदी इलाके की जीवनरेखा है। इसी के किनारे से करीब 16 सरकारी पेयजल और सिंचाई योजनाएं चलती हैं। इन्हीं योजनाओं से नालागढ़ शहर, रडियाली, रख राम सिंह, न्यू नालागढ़, किरपालपुर, निक्कुवाल, राजपुरा और कई गांवों में पानी जाता है। अगर इसी नदी के पास इतना ज्यादा पानी इस्तेमाल होगा तो आने वाले समय में इन सभी गांवों को पानी की भारी कमी झेलनी पड़ेगी। पहले नदी में साल भर पानी रहता था जिसमें काफी कमी आ गई है।

आरोप है कि फैक्ट्री चलने के बाद भूजल का स्तर गिर रहा है। हैंडपंपों और कुंओं में पानी कम हो रहा है और कई जगह वे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। लोगों की मांग है कि फैक्ट्री में पानी के उपयोग की जांच की जाए, पानी का ज्यादा इस्तेमाल पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाए, चिकनी नदी और उससे जुड़ी पानी की सभी योजनाओं की जांच की जाए, जलशक्ति विभाग नालागढ़ की कार्यप्रणाली की जांच की जाए और इलाके में पानी बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी बातें नहीं सुनी गईं तो वे मजबूर होकर सख्त कदम उठाएंगे।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in