

पीएम कुसुम योजना से लाखों किसानों को सोलर सिंचाई पंप और आसान वित्तीय सहायता का फायदा मिला
सरकार का दावा जैविक खेती, दाल उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई नई पहल में तेजी
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर सख्ती, साल 2025-26 में 5.19 करोड़ रुपये से अधिक जुर्माना वसूला गया
जलवायु अनुकूल मछुआरा गांव, स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी से सतत विकास को मिला बल
हीटवेव से बचाव के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की तैयारी मजबूत, देशभर में निगरानी और समय पर स्वास्थ्य सलाह जारी
खेती के लिए सोलर सिंचाई पंप पर सब्सिडी
सदन में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में आज, नई और नवीकरणीय ऊर्जा तथा बिजली राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मंत्रालय किसानों को खेती के लिए सोलर सिंचाई पंप लगाने में मदद देने के लिए पीएम कुसुम योजना लागू कर रहा है। इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने पर सब्सिडी दी जाती है। देश के अधिकांश हिस्सों में 30 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाती है।
नाइक ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों के किसानों को 50 प्रतिशत तक सहायता मिलती है। यह योजना कृषि अवसंरचना कोष से भी जुड़ी है, जिससे किसानों को आसान ऋण और ब्याज में राहत मिलती है। 30 जून 2026 तक मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं, जिनमें पीएम कुसुम भी शामिल है, के तहत 14.65 लाख से अधिक किसान स्टैंडअलोन सोलर पंप का लाभ ले चुके हैं। इसके अलावा 16.32 लाख से अधिक किसानों को कृषि फीडर के सोलराइजेशन का लाभ मिला है।
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक
सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में कहा कि सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए), 2003 की धारा चार के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना प्रतिबंधित है। यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर 200 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
जाधव ने बताया कि सरकार लगातार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर इस कानून का पालन सुनिश्चित कर रही है। जाधव ने राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के प्रबंधन सूचना प्रणाली पोर्टल का हवाला दिया। जिसमें में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में पूरे देश में 5.19 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को तंबाकू से होने वाली बीमारियों से बचाना और सार्वजनिक स्थानों को धूम्रपान मुक्त बनाना है।
जैविक खेती को बढ़ावा
जैविक खेती को लेकर सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए दो प्रमुख योजनाएं चला रहा है। पहली योजना परंपरागत कृषि विकास योजना है, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। दूसरी योजना मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन है, जो पूर्वोत्तर राज्यों के लिए है।
ठाकुर ने कहा कि इन योजनाओं के तहत किसानों को उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रमाणन और विपणन तक सहायता दी जाती है। सरकार ने छोटे किसानों के लिए पीजीएस-इंडिया नाम की आसान और कम लागत वाली जैविक प्रमाणन व्यवस्था भी शुरू की है। अब तक 16.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक प्रमाणन मिल चुका है और 24.14 लाख किसानों को इसका लाभ मिला है। इसके अलावा 500 से अधिक जैविक ब्रांड विकसित किए गए हैं।
मसूर उत्पादन बढ़ाने की योजना
सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा है कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज योजना चला रहा है। इस योजना का विशेष ध्यान अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों पर है।
ठाकुर ने योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नई और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों के बीज उपलब्ध कराए जाते हैं। किसानों को प्रमाणित बीज, बीज किट, आधुनिक खेती की जानकारी, प्रशिक्षण और कटाई के बाद की सुविधाएं भी दी जाती हैं। राज्यों को ब्रीडर बीज खरीदने के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता भी दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य देश में दालों का उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
जलवायु अनुकूल मछुआरा गांव
संसद में सवालों का सिलसिला जारी रहा, इसी बीच सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एक नई पहल शुरू की है। इसके अंतर्गत देश के तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 100 मौजूदा तटीय मछुआरा गांवों को जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांव के रूप में विकसित किया जाएगा।
ललन सिंह ने कहा कि इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक गांव के विकास पर दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और पूरी राशि केंद्र सरकार देगी। तमिलनाडु में 16 गांवों को इस योजना के लिए मंजूरी दी गई है। इन गांवों के विकास के लिए 32 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 16 करोड़ रुपये की पहली और दूसरी किस्त जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस योजना से मछुआरों की आय बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में प्रगति
कार्बन उत्सर्जन को लेकर सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर देते हुए आज, भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने लोकसभा में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के तहत कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत की पहली द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में साल 2005 की तुलना में देश की जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 37.38 प्रतिशत की कमी आई है।
इसके साथ ही देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में बिना -जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। भारत ने यह लक्ष्य वर्ष 2030 से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।
देश में हीटवेव से बचाव की तैयारी
सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुआ आज, गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम हीटवेव से लोगों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा रहा है। मंत्रालय ने हीटवेव के दौरान राज्यों के स्वास्थ्य विभागों के लिए दिशा-निर्देश और आम लोगों के लिए सलाह जारी की है।
राय ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी के आधार पर राज्यों और जिलों को रंग आधारित स्वास्थ्य सलाह भी भेजी जाती है ताकि समय रहते तैयारी की जा सके। देशभर में 51 हजार से अधिक रिपोर्टिंग इकाइयों के माध्यम से हीटवेव से जुड़ी बीमारियों और मौतों की निगरानी की जा रही है। एक मार्च 2026 से 26 जुलाई 2026 तक देश में 4,853 हीट स्ट्रोक के मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हीटवेव के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।