2024-25 में 13.12 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसलों पर टूटा मौसम का कहर, सरकार ने दिया जवाब

आज, छह फरवरी, 2026 को संसद के दोनों सदनों, राज्यसभा व लोकसभा में सरकार द्वारा कृषि, स्वास्थ्य, पोषण और जैविक प्रमाणन से जुड़े कई अहम विषयों पर उठाए गए मुद्दों पर जानकारी दी।
साल 2024-25 में प्राकृतिक आपदाओं से देश में 13.12 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ।
साल 2024-25 में प्राकृतिक आपदाओं से देश में 13.12 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत महाराष्ट्र में 5,775 करोड़ रुपये के दावे 83 लाख किसानों को मिले।

  • साल 2024-25 में प्राकृतिक आपदाओं से देश में 13.12 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ।

  • सिक्किम राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी की मान्यता प्रमाणन प्रक्रिया में गंभीर खामियों के कारण निलंबित हुई।

  • डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत 8.48 करोड़ किसान आईडी बनीं और 604 जिलों में डिजिटल फसल सर्वे हुआ।

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पंजाब को केंद्रीय सहायता 55 प्रतिशत बढ़कर 878.21 करोड़ रुपये हुई।

प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसल क्षेत्र

संसद का बजट सत्र जारी है, देश में सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, असमय बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को भारी नुकसान होता है। इस विषय पर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार के पास फसल क्षति से संबंधित आंकड़े केंद्रीय स्तर पर संकलित नहीं किए जाते।

हालांकि, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार साल 2024-25 में लगभग 13,12,157 हेक्टेयर फसल क्षेत्र चरम मौसमीय आपदाओं के कारण प्रभावित हुआ। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्राकृतिक आपदाएं आज भी भारतीय कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि किसानों को फसल नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीयाई) लागू की है। ठाकुर ने बताया कि यह योजना बुवाई से पहले लेकर कटाई के बाद तक फसलों को जोखिम से सुरक्षा प्रदान करती है।

यह योजना केवल उन्हीं फसलों और क्षेत्रों पर लागू होती है, जिन्हें संबंधित राज्य सरकारें अधिसूचित करती हैं। पीएमएफबीयाई का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सिक्किम में जैविक प्रमाणन एजेंसी का निलंबन

सिक्किम में जैविक प्रमाणन को लेकर उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में बताया कि जैविक खेती और जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस मामले में सिक्किम राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी (एसएसओसीए) की मान्यता निलंबित कर दी गई है।

राष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय (एनएबी) द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि एजेंसी द्वारा प्रमाणन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाहियां बरती गई। इन खामियों के कारण जैविक उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर बुरा प्रभाव पड़ा। इसी वजह से राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के तहत एजेंसी की मान्यता अस्थायी रूप से निलंबित की गई है।

महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दावे

सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, इसी बीच सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में बताया कि महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत साल 2024-25 में कुल 5,954 करोड़ रुपये के दावे दर्ज किए गए। इनमें से 5,775 करोड़ रुपये का भुगतान लगभग 83 लाख किसानों को किया जा चुका है। अभी 179 करोड़ रुपये के दावे लंबित हैं।

ठाकुर ने बताया कि सामान्यतः बीमा कंपनियां राज्य सरकार से आवश्यक फसल उत्पादन आंकड़े हासिल होने के 21 दिनों के भीतर भुगतान कर देती हैं। कुछ मामलों में भुगतान में देरी राज्य सरकार की सब्सिडी में देरी, बैंकों द्वारा गलत या देर से बीमा प्रस्ताव भेजने तथा फसल आंकड़ों को लेकर विवाद के कारण होती है। इन समस्याओं के समाधान के बाद लंबित दावों का निपटान किया जाता है।

छोटे और सीमांत किसानों के लिए डिजिटल कृषि

डिजिटल कृषि को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल एक जवाब में आज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने डिजिटल कृषि मिशन के तहत कृषि क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) विकसित करने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। इसके अंतर्गत एग्रीस्टैक, कृषि निर्णय समर्थन प्रणाली और डिजिटल मृदा स्वास्थ्य मानचित्र जैसी पहलें शामिल हैं।

एग्रीस्टैक में तीन प्रमुख रजिस्ट्रियां हैं -

  • भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र

  • फसल बुआई रजिस्ट्री

  • किसान रजिस्ट्रेशन

चार फरवरी, 2026 तक 8.48 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसके अलावा खरीफ 2025 में 604 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 28.5 करोड़ से अधिक भूखंडों को कवर किया गया। इस प्रणाली में महिला किसानों, किरायेदार और पट्टेदार किसानों को भी शामिल करने की व्यवस्था है।

पंजाब के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत फंड

सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत पंजाब को दी जाने वाली केंद्रीय सहायता में भारी वृद्धि हुई है।

वित्त वर्ष 2020-21 में 568.14 करोड़ रुपये की तुलना में 2024-25 में यह राशि बढ़कर 878.21 करोड़ रुपये हो गई, जो लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि है। इस फंड का उपयोग स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, मानव संसाधन बढ़ाने और वंचित वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है।

तमिलनाडु के लिए पोषण अभियान फंड

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मिशन पोषण 2.0 के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में तमिलनाडु को 3,593.76 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण स्तर में सुधार लाना और कुपोषण की समस्या से प्रभावी रूप से निपटना है।

संसद के दोनों सदनों में जानकारी देते हुए सरकार ने दावा कि वह कृषि सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में लगातार प्रयास कर रही है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने, किसानों को बीमा सुरक्षा देने, डिजिटल प्रणाली को मजबूत करने और राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की दिशा में ये कदम देश के समग्र विकास के लिए अहम हैं।

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