

चक्रवाती तूफान अर्नब के मद्देनजर भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 27 और 28 अक्टूबर को विशाखापत्तनम से बापटला तक के तटीय और आसपास के 18 जिलों के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है।
इनमें रेड अलर्ट सबसे उच्च स्तर की चेतावनी है। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के तट से टकराने के अगले दिन केवल छह जिलों में भारी बारिश होने की आशंका है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अमरावती केंद्र के वैज्ञानिक सागिली करुणासागर ने डाउन टू अर्थ को बताया कि 27 अक्टूबर को अर्नब के अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना है।
इसके बाद यह बुधवार, 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यानम के आसपास दस्तक दे सकता है। इस दौरान तूफान की अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की आशंका है, जबकि हवा के झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के प्रभारी सी. पीटर ने डाउन टू अर्थ को बताया कि चक्रवात से प्रभावित होने की आशंका वाले 18 जिलों के 2,700 गांवों की पहचान की गई है। इन गांवों में लगभग सात लाख परिवार रहते हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित और जोखिम वाले लोगों को सुरक्षित ठहराने के लिए 1,900 आश्रय स्थलों की पहचान की है।
पीटर ने बताया, “राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की 12 टीमों में से नौ को तैनात कर दिया गया है, जबकि तीन को तैयार रखा गया है। राज्य में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 10 टीमों में से सात तैनात हैं और तीन को तैयार रखा गया है। इसके अलावा, ओडिशा से एनडीआरएफ की चार और टीमें आनी हैं, जिनमें से दो-दो आंध्र प्रदेश और यानम में तैनात की जाएंगी।”
उन्होंने बताया कि अग्निशमन विभाग ने पेड़ों को काटने और रास्ते साफ करने के लिए 115 टीमें तथा बचाव कार्यों के लिए 13 नाव दल तैयार रखे हैं। इन दलों के पास 853 लाइफबॉय (पानी में तैरने वाले बचाव उपकरण) और 1,328 लाइफ जैकेट हैं।
इस बीच, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से सतर्क रहने और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राज्य सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एहतियात के तौर पर कम से कम सात जिलों में शैक्षणिक संस्थान 27 और 28 अक्टूबर को बंद रहेंगे।
आपातकालीन सहायता के लिए एसडीएमए ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। लोग राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से 112, 1070 या 1800 425 0101 पर संपर्क कर सकते हैं।
राज्य मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक रमना कुमार ने डाउन टू अर्थ को बताया कि आंध्र प्रदेश की तटरेखा लगभग 1,000 किलोमीटर लंबी है। राज्य के 12 तटीय जिलों में 500 से अधिक समुद्री मछुआरा गांव हैं। मौसम विज्ञान विभाग की चक्रवात चेतावनी के बाद राज्य के 350 मछली उतारने वाले केंद्रों से संचालित होने वाली सभी 30,043 मछली पकड़ने वाली नौकाओं को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। समुद्र में मौजूद नौकाओं को तत्काल लौटने के निर्देश दिए गए थे।
कुमार ने बताया कि अब कोई भी नौका समुद्र में नहीं है। मछुआरों को अपनी नौकाएं सुरक्षित स्थानों पर बांधकर रखने को कहा गया है, ताकि चक्रवात के दौरान उठने वाली ऊंची लहरों से उन्हें नुकसान न पहुंचे।
उन्होंने बताया कि प्रभावित जिलों में झींगा और मछली पालन से जुड़ी 460 हैचरी समेत जलीय कृषि करने वाले किसानों को भी एहतियाती उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। उन्हें भारी बारिश के दौरान तटबंधों के टूटने से रोकने, नियमित रूप से पाली जा रही मछलियों और झींगों की मृत्यु की जांच करने तथा बाढ़ और भारी बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बंद रखने को कहा गया है।
राज्य सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को चक्रवात की दिशा पर लगातार नजर रखने और सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित जिलों के कलेक्टरों से कहा गया है कि वे निचले तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते चेतावनी दें और जरूरत पड़ने पर उन्हें चक्रवात आश्रय स्थलों में पहुंचाएं।