चमोली: उफनाया तमक नाला अब शांत, 17 गांवों की आवाजाही बहाल करने को वैकल्पिक मार्ग बनाने में जुटे जवान

पिछले साल अगस्त में भी अचानक जलस्तर बढ़ने से इस गदेरे पर बना सीमेंट-कंक्रीट का पुल बह गया था
कंक्रीट के बड़े-बड़े  पाइप का इस्तेमाल करके एक वैकल्पिक रास्ता बनाया जा रहा है। फोटो: विशेष व्यवस्था से
कंक्रीट के बड़े-बड़े पाइप का इस्तेमाल करके एक वैकल्पिक रास्ता बनाया जा रहा है। फोटो: विशेष व्यवस्था से
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सारांश
  • चमोली जिले में ज्योतिर्मठ-मलारी मार्ग पर उफनाया तमक नाला अब शांत हो गया है, लेकिन तेज बहाव से बीआरओ का वैली ब्रिज और एक कर्मचारी व वाहन बह गए।

  • एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवान सीमेंट ह्यूम पाइपों से वैकल्पिक मार्ग बना रहे हैं, ताकि नीति घाटी के 17 गांवों और सीमा चौकियों की आवाजाही जल्द बहाल हो सके।

  • प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है और वैकल्पिक मार्ग आज शाम या कल सुबह तक तैयार होने की उम्मीद है।

 चमोली में ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर सोमवार शाम उफनाया तमक नाला अब सामान्य है। अपने पीछे भारी मात्रा में मिट्टी, मलबा, पत्थर और बोल्डर छोड़ गया है। पानी के तेज बहाव की चपेट में आकर बहे सीमा सड़क संगठन के एक कर्मचारी की तलाश जारी है। तमक नाले पर बना वैली ब्रिज बहने के बाद एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवान वैकल्पिक मार्ग बनाने में जुटे हैं, ताकि सड़क संपर्क से कटे नीति घाटी के 17 गांवों की आवाजाही बहाल की जा सके।

 भारी बारिश के बीच धौली गंगा घाटी में तमक नाले का जलप्रवाह अचानक तेजी से बढ़ गया।आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में बीआरओ द्वारा निर्मित वैली ब्रिज अत्यधिक जलप्रवाह के कारण पूरी तरह बह गया है। तेज बहाव की चपेट में आने से बीआरओ का एक कर्मचारी और एक वाहन भी बह गया।

घटना के बाद मलारी की ओर जाने वाले वाहनों को पूरी तरह रोक दिया गया। साथ ही प्रशासन ने लोगों को प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्र से दूर रहने और मार्ग की स्थिति समान्य होने तक यात्रा न करने की सलाह दी।

चमोली में जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने डाउन टू अर्थ को बताया कि पानी के उफान में बहे व्यक्ति की खोजबीन जारी है। “द्रोणागिरी, नीति, गमशाली समेत मलारी घाटी के 17 गांवों का संपर्क टूट गया है। ये छोटे-छोटे गांव हैं और यहां ज्यादातर लोग सर्दियों में निचले इलाकों की ओर पलायन कर जाते हैं। इस समय भी वहां ज्यादा आबादी मौजूद नहीं। सीमेंट के बड़े-बड़े ह्यूम पाइप के ज़रिये वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है। आज शाम या कल सुबह तक आवाजाही बहाल कर दी जाएगी।”

उन्होंने बादल फटने की पुष्टि नहीं की। उनके मुताबिक, “वहां बारिश ज्यादा हो रही थी। तमक नाले में बीच-बीच में मिट्टी और पत्थर आता रहता है। क्षेत्र में लगातार कई दिनों से हो रही बारिश से इस गदेरे में बहुत सारा मलबा एक साथ नीचे की ओर आया। पिछले साल अगस्त में भी अचानक जलस्तर बढ़ने से इस गदेरे पर बना सीमेंट-कंक्रीट का पुल बह गया था”।

फरवरी में संसद में बारिश के चलते सड़क, पुल समेत नव-निर्मित इन्फ्रास्ट्रक्टर को होने वाले नुकसान और इस पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया जा चुका है। इसके जवाब में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी थी कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारी बारिश से 51 नए इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा था। तमकनाले पर बना पुल भी इसमें से एक था।

इस साल भी वैली ब्रिज बहने से सीमांत गांवों के साथ-साथ भारत तिब्बत सीमा पुलिस और सेना की चौकियों की आवाजाही फिलहाल बाधित हो गई है। तमक नाला आगे चलकर धौली गंगा नदी में मिल जाता है। धौलीगंगा जोशीमठ के पास अलकनंदा नदी से मिलती है।

देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक 29 जुलाई से 5 अगस्त तक चमोली में सामान्य से 131 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। चमोली और बागेश्वर को छोड़ दें तो 10 जिलों में सामान्य से कम और एक जिले में सामान्य बारिश रिकॉर्ड हुई। हालांकि पिछले 24 घंटे में चमोली में तकरीबन 14 मिलीमीटर ही बारिश हुई।

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