फोटो फीचर: नशा हीरे का

मध्य प्रदेश के पन्ना को कुदरत ने एक बेशकीमती उपहार से नवाजा है। वह है यहां जमीन में हीरे की उपस्थिति। इसी कारण इसे हीरानगरी के रूप में जाना जाता है। बरसात के मौसम में हीरे की खोज में हजारों मजदूर, किसान और ठेकेदार जुट जाते हैं। हीरा सबको तो नहीं मिलता लेकिन जिसको भी मिलता है, वह अन्य बहुत से लोगों में हीरे की हसरत जगा देता है। हीरे की खोज में लगे लोगों की मानें तो यह काम नशे की तरह है, जो ज्यादातर लोगों को बर्बाद कर चुका है, लेकिन लोग नुकसान उठाने के बाद भी इसे जारी रखने की हिम्मत दिखाते हैं। भागीरथ ने फोटो पत्रकार विकास चौधरी के साथ 100 से अधिक खदानों वाले सरकोहा गांव का दौरा किया और खनन प्रक्रिया को समझा
मचाई और छनाई : रातभर हौदी में पड़े रहने वाले मलबे की अगले दिन सुबह-सुबह मचाई और छनाई की जाती है। इससे सारी मिट्टी और रेत निकल जाती है। इस प्रक्रिया में काफी पानी लगता है। आमतौर पर गड्ढों में भरा बरसात का पानी इसमें इस्तेमाल होता है
मचाई और छनाई : रातभर हौदी में पड़े रहने वाले मलबे की अगले दिन सुबह-सुबह मचाई और छनाई की जाती है। इससे सारी मिट्टी और रेत निकल जाती है। इस प्रक्रिया में काफी पानी लगता है। आमतौर पर गड्ढों में भरा बरसात का पानी इसमें इस्तेमाल होता है फोटो: विकास चौधरी / सीएसई
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मलबे का स्टॉक : पन्ना में जिस निजी जमीन या खेत पर किसान या ठेकेदार को खनन करना होता है, वह साल के शुरुआती महीनों में हीरा कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करवाता है। रजिस्ट्रेशन के बाद साल भर का पट्टा मिल जाता है। इसके बाद किसान या ठेकेदार जेसीबी की मदद से पट्टे वाली जमीन पर खुदाई कराता है। करीब 20 फीट तक होने वाली इस खुदाई से मलबे का ढेर (ग्रेवल स्टॉक) जमा हो जाता है
मलबे का स्टॉक : पन्ना में जिस निजी जमीन या खेत पर किसान या ठेकेदार को खनन करना होता है, वह साल के शुरुआती महीनों में हीरा कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करवाता है। रजिस्ट्रेशन के बाद साल भर का पट्टा मिल जाता है। इसके बाद किसान या ठेकेदार जेसीबी की मदद से पट्टे वाली जमीन पर खुदाई कराता है। करीब 20 फीट तक होने वाली इस खुदाई से मलबे का ढेर (ग्रेवल स्टॉक) जमा हो जाता है
रातभर हौदी में : खुदाई बरसात से पहले कर ली जाती है। बरसात के बाद इस मलबे के ढेर में हीरा खोजने का काम शुरू हो जाता है। आमतौर पर सुबह छह से दोपहर 12 बजे तक जारी रहने वाली इस खोज में सबसे पहले मलबे को रातभर पानी से भरी हौदियों में डाला जाता है ताकि मलबे से मिट्टी, रेत और कंकड़-पत्थर अलग हो जाएं
रातभर हौदी में : खुदाई बरसात से पहले कर ली जाती है। बरसात के बाद इस मलबे के ढेर में हीरा खोजने का काम शुरू हो जाता है। आमतौर पर सुबह छह से दोपहर 12 बजे तक जारी रहने वाली इस खोज में सबसे पहले मलबे को रातभर पानी से भरी हौदियों में डाला जाता है ताकि मलबे से मिट्टी, रेत और कंकड़-पत्थर अलग हो जाएं
सुखाई : मचाई और छनाई के बाद कंकड़-पत्थरों को सूखने के लिए डाल दिया जाता है। कुछ घंटों में कंकड़-पत्थरों से पानी रिस जाता और धूप लगने पर सूख जाता है
सुखाई : मचाई और छनाई के बाद कंकड़-पत्थरों को सूखने के लिए डाल दिया जाता है। कुछ घंटों में कंकड़-पत्थरों से पानी रिस जाता और धूप लगने पर सूख जाता है
पैनी नजर : सूखने के बाद बिनाई का काम शुरू होता है, जिसमें सूखे कंकड़-पत्थरों में बहुत ध्यान से हीरा खोजा जाता है। इस दौरान ठेकेदार या खदान का मालिक मजदूरों पर पैनी नजर रखता है। हीरा मिलने पर उसे हीरा कार्यालय में जमा करा दिया जाता है। नीलामी के बाद उसका सही मूल्य तय होता है
पैनी नजर : सूखने के बाद बिनाई का काम शुरू होता है, जिसमें सूखे कंकड़-पत्थरों में बहुत ध्यान से हीरा खोजा जाता है। इस दौरान ठेकेदार या खदान का मालिक मजदूरों पर पैनी नजर रखता है। हीरा मिलने पर उसे हीरा कार्यालय में जमा करा दिया जाता है। नीलामी के बाद उसका सही मूल्य तय होता है
हीरे से करोड़पति : 60 साल के स्वामीदीन पाल सितंबर 2024 में रातोंरात करोड़पति बन गए। एक छोटी-सी हीरा खदान के मालिक स्वामीदीन को 32 कैरेट 80 सेंट का एक बड़ा हीरा मिला जिसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए आंकी गई। स्वामीदीन ने तीन साल पहले खनन शुरू किया था
हीरे से करोड़पति : 60 साल के स्वामीदीन पाल सितंबर 2024 में रातोंरात करोड़पति बन गए। एक छोटी-सी हीरा खदान के मालिक स्वामीदीन को 32 कैरेट 80 सेंट का एक बड़ा हीरा मिला जिसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए आंकी गई। स्वामीदीन ने तीन साल पहले खनन शुरू किया था
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