

देश में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 57,443.39 मेगावाट पहुंची, जबकि वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी गई।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 70 हाइड्रोजन वाहन, 16 रिफ्यूलिंग स्टेशन और 12 पायलट परियोजनाओं को मंजूरी।
असम में पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत 1,695 सौर पंप स्थापित हुए, जबकि 4,000 सौर पंप राज्य को आवंटित किए गए।
चार राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित होंगे, वहीं पीएम-जनमन के तहत 540 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए।
ग्रीन हाईवे नीति के तहत पिछले पांच वर्षों में 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 3.61 करोड़ पौधे लगाए गए।
पवन ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
संसद का मानसून सत्र जारी है। सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा शिक्षा मंत्रालय में मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा में बताया कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। 30 जून 2026 तक देश में पवन ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 57,443.39 मेगावाट हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 6.05 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई। यह भारत में पवन ऊर्जा क्षेत्र की शुरुआत से अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक रिकॉर्ड है।
जोशी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना है। पवन ऊर्जा से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
असम के पहाड़ी जिलों में पीएम-कुसुम योजना
पीएम-कुसुम योजना को लेकर सदन में उठे एक और सवाल का जवाब देते हुए आज, नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण योजना है। यह योजना पूरे देश में राज्यों की मांग के आधार पर लागू की जाती है। असम में इस योजना का कार्यान्वयन असम ऊर्जा विकास एजेंसी द्वारा किया जा रहा है।
जोशी ने बताया कि इस योजना के तहत असम को 4,000 सौर पंप आवंटित किए गए थे। राज्य सरकार ने 1,695 सौर पंपों के लिए कार्य आदेश जारी किए और अब तक सभी 1,695 सौर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। हालांकि करबी आंगलोंग और दीमा हसाओ जिलों से पात्र लाभार्थियों की सूची प्राप्त नहीं होने के कारण वहां योजना का लाभ नहीं दिया जा सका। मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसानों तक सौर ऊर्जा की सुविधा पहुंचे।
परमाणु संयंत्रों से निकलने वाला रेडियोधर्मी कचरा
सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि देश में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित प्रबंधन किया जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, परमाणु बिजली संयंत्रों से हर साल प्रति मेगावाट लगभग 0.15 घन मीटर ठोस रेडियोधर्मी कचरा उत्पन्न होता है। इस कचरे के सुरक्षित निपटान का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है।
सिंह ने बताया कि सभी रिकॉर्ड परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) को नियमित रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
हाइड्रोजन आधारित वाहनों को बढ़ावा
सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन चला रही है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
नाइक ने कहा कि मिशन के अंतर्गत 12 पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनके माध्यम से 70 हाइड्रोजन आधारित वाहनों को सड़कों पर उतारा जाएगा। इनमें 27 बसें और 43 ट्रक शामिल हैं। साथ ही 16 हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन भी 21 मार्गों पर स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के लिए लगभग 410.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है, जिसमें से 41.582 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। यह पहल स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
देश में रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना
रेयर अर्थ कॉरिडोर को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में आज, कार्मिक, जन-शिकायत और पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि भारत में रेयर अर्थ खनिजों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल, कंप्यूटर, रक्षा उपकरण और कई आधुनिक तकनीकों में होता है। इसलिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में चार राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की है।
सिंह ने बताया कि यह योजना परमाणु ऊर्जा विभाग के सहयोग से तैयार की जा रही है। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार और चारों राज्यों के प्रतिनिधियों का एक संयुक्त कार्य समूह बनाया गया है। इसमें आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड भी शामिल है। इस पहल से खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा तथा देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
पीएमजेवीएम के तहत प्रगति
सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, जनजातीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) चलाया जा रहा है। इस योजना के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की आजीविका बढ़ाने के लिए वन धन विकास केंद्र स्थापित किए जाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से जनजातीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित की जाती है।
यह योजना जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है। अब तक देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 540 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनसे लगभग 46,042 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लोगों को लाभ मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पांच वन धन विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे 319 लाभार्थी जुड़े हुए हैं। इन केंद्रों को ट्राइफेड के माध्यम से बाजार से जोड़ा जाता है।
देश में ग्रीन राजमार्ग परियोजनाएं
देश में ग्रीन राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए सरकार ग्रीन हाईवे (रोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यीकरण एवं रखरखाव) नीति, 2015 के तहत पौधारोपण का कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और पर्यावरण संरक्षण करना है।
गडकरी ने बताया कि पिछले पांच सालों में देश के लगभग 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 3.61 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में एक अहम कदम है।