मेघालय में अवैध कोयला खदान विस्फोट से 18 की मौत: एनजीटी ने अधिकारियों से मांगा जवाबी हलफनामा

ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 का उल्लंघन है।
मेघालय के पूर्वी जंतिया हिल्स में दुर्घटनास्थल पर चलाए जा रहे बचाव अभियान की तस्वीर।
फोटो: @DDNewslive / X
मेघालय के पूर्वी जंतिया हिल्स में दुर्घटनास्थल पर चलाए जा रहे बचाव अभियान की तस्वीर। फोटो: @DDNewslive / X
Published on

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मेघालय में हाल ही में हुए अवैध कोयला खदान में विस्फोट के कारण मारे गए 18 लोगों के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।

एनजीटी की प्रधान पीठ ने 6 फरवरी 2026 को एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित समाचार के बाद यह स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल द्वारा की गई।

एनजीटी ने पाया कि पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में रैट-होल कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट अवैध खनन गतिविधियों का उदाहरण है। इस प्रकार की खदानों पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है। अधिकरण ने इस घटना को पर्यावरण कानूनों के लगातार उल्लंघन के रूप में देखा।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 का उल्लंघन है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई बनाम अंकिता सिन्हा एवं अन्य (2021) का हवाला देते हुए एनजीटी ने इस मामले में मेघालय सरकार के मुख्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), पर्यावरण मंत्रालय, पूर्वी जयंतिया हिल्स के जिलाउपायुक्त को प्रतिवादी बनाया है।

ट्रिब्यूनल ने सभी प्रतिवादियों को हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को निर्धारित की है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in