

कई मानकों पर अव्वल रहने वाला केरल बीमारियों में भी अव्वल है। यहां लगभग 40 फीसदी लोग बीमार हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल का नंबर आता है, जहां बीमारों की संख्या 25 फीसदी के आसपास है। यह दिलचस्प आंकड़ा राष्ट्रीय सर्वेक्षण संगठन (एनएसओ) की ताजा रिपोर्ट में सामने आए हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 80वें दौर की स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल में बीमार होने की रिपोर्ट करने वाले व्यक्तियों का अनुपात (पीपीआरए) यानी रुग्णता दर 39.7 प्रतिशत है। यहां पिछले 15 दिनों में बीमार होने की रिपोर्ट करने वाले व्यक्तियों का कुल अनुपात 39.7 प्रतिशत पाया गया। पुरुषों का औसत जहां 36.9 प्रतिशत है, वहीं महिलाओं का औसत 42.4 प्रतिशत है।
केरल के ग्रामीण क्षेत्रों (38.1 प्रतिशत) की तुलना में शहरी क्षेत्रों में यह दर 41.5 प्रतिशत के साथ अधिक है। इसके अतिरिक्त, लैंगिक स्तर पर भी एक बड़ा अंतर दिखाई देता है; जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में 35.8 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 40.2 प्रतिशत महिलाओं ने खुद को बीमार रिपोर्ट किया, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा पुरुषों के 38.0 प्रतिशत के मुकाबले महिलाओं के लिए 44.6 प्रतिशत तक पहुंच गया।
केरल के बाद पश्चिम बंगाल में रुग्णता दर सबसे अधिक है, लेकिन केरल के मुकाबले अंतर काफी अधिक है। पश्चिम बंगाल में रुग्णता दर 24.5 प्रतिशत है। केरल की तरह ही यहां भी ग्रामीण इलाकों (22.2 प्रतिशत) की तुलना में शहरी क्षेत्रों (29.8 प्रतिशत) में बीमारी की रिपोर्टिंग अधिक है, और पुरुषों (21.7 प्रतिशत) की तुलना में महिलाएं (27.4 प्रतिशत) अधिक बीमार रिपोर्ट हुई हैं।
आंध्रप्रदेश भी उन राज्यों में शामिल है, जहां रुग्णता दर 20 प्रतिशत से अधिक है। यहां की रुग्णता दर 21.1 प्रतिशत है। यहां भी महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले अधिक बीमार होने की रिपोर्ट की। महिलाओं का प्रतिशत 23.5 प्रतिशत, पुरुषों का प्रतिशत 18.6 दर्ज किया गया।
एनएसओ की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय औसत (13.1 प्रतिशत) से अधिक बीमारी रिपोर्ट करने वाले राज्यों में केरल (39.7 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (24.5 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (21.1 प्रतिशत), गोवा (18.7 प्रतिशत), तमिलनाडु (18.5 प्रतिशत), ओडिशा (15.4 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (15.3 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (15.2 प्रतिशत), तेलंगाना (15.0 प्रतिशत), पंजाब (14.4 प्रतिशत), असम (14.4 प्रतिशत) और जम्मू-कश्मीर (13.6 प्रतिशत) शामिल हैं।
राष्ट्रीय औसत से कम वाले राज्यों में बिहार (9.9 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (9.7 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (9.5 प्रतिशत), झारखंड (9.2 प्रतिशत) और छत्तीसगढ़ (8.8 प्रतिशत) आदि प्रमुख हैं।
केरल में क्यों हैं सबसे अधिक रुग्णता दर
केरल में बीमारी दर सबसे अधिक होने के दो कारण प्रमुख माने जाते हैं। बताया जाता है कि केरल इस समय एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय संक्रमण से गुजर रहा है, जहां देश की सबसे तेजी से बूढ़ी हो रही आबादी निवास करती है। पबमेड सेंट्रल पर प्रकाशित एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, राज्य में उच्च जीवन प्रत्याशा के कारण बुजुर्गों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जो उम्र के साथ स्वाभाविक रूप से पुरानी और दीर्घकालिक बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
इसके साथ ही, बेहतर जीवन स्तर और बदलती खान-पान की आदतों के कारण केरल में मधुमेह, उच्च रक्तचाप , और हृदय रोगों जैसी गैर-संचारी बीमारियों का जोखिम चरम पर है। यह दोहरा स्वास्थ्य बोझ (एक तरफ बढ़ती उम्र और दूसरी तरफ जीवनशैली से जुड़े क्रोनिक रोग) मिलकर केरल की रुग्णता दर को राष्ट्रीय औसत से बहुत ऊपर ले जाता है।
इसके अलावा केरल में रुग्णता दर अधिक दिखने का सबसे प्राथमिक कारण बीमारी का वास्तविक रूप से अधिक होना नहीं, बल्कि वहां के लोगों में असाधारण स्वास्थ्य जागरूकता और बीमारी को लेकर बेहद संवेदनशील धारणा का होना है।
इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च के एक विस्तृत शोध पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि केरल जैसे अत्यधिक साक्षर समाज में लोग मामूली अस्वस्थता होने पर भी तुरंत खुद को 'बीमार' की श्रेणी में दर्ज कराते हैं और सक्रिय रूप से इलाज तलाशते हैं। इसके विपरीत, कम साक्षरता वाले राज्यों में लोग गंभीर स्थिति होने तक बीमारी को रिपोर्ट ही नहीं करते। इसके अतिरिक्त, केरल का बेहद मजबूत और सुलभ 'प्राइमरी हेल्थकेयर' ढांचा मरीजों के त्वरित पंजीकरण को सुनिश्चित करता है, जिससे राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में रुग्णता के आंकड़े स्वतः ही सबसे ऊंचे स्तर पर दर्ज होते हैं।
बंगाल में भी बुजुर्ग अधिक
पश्चिम बंगाल में बुजुर्ग आबादी (60 वर्ष से अधिक) का अनुपात बहुत तेजी से बढ़ा है, जो वर्तमान अनुमानों के अनुसार राज्य की कुल आबादी का लगभग 12 से 14 प्रतिशत हो चुका है। सोशल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित जनसांख्यिकीय विश्लेषण स्पष्ट करता है कि राज्य बहुत तेजी से एक 'वृद्ध समाज' में तब्दील हो रहा है। वृद्ध होती इस विशाल आबादी के कारण स्वाभाविक रूप से उम्र से संबंधित गंभीर और पुरानी बीमारियां जैसे- जोड़ों का दर्द, श्वसन संबंधी विकार और दृष्टि दोष के मामले बहुत बढ़ गए हैं, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी सर्वेक्षणों में राज्य की कुल रुग्णता दर को ऊपर धकेलते हैं।
आंध्रप्रदेश क्यों है तीसरे नंबर पर
आंध्र प्रदेश की जनसांख्यिकी भी तेजी से वृद्ध समाज की ओर बढ़ रही है, जो उम्र से संबंधित रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील है। रिसर्चगेट पर प्रकाशित एक अध्ययन चिकित्सा अनुसंधान के अनुसार, राज्य में 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 64 प्रतिशत बुजुर्ग किसी न किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं। इस अध्ययन में पाया गया कि बुजुर्गों में मस्कुलोस्केलेटल (जोड़ों व हड्डियों का दर्द), उच्च रक्तचाप, और दृष्टि दोष जैसी बीमारियां सबसे आम हैं, और लगभग 25 प्रतिशत बुजुर्ग आबादी एक से अधिक बीमारियों से ग्रसित है। उम्रदराज होती आबादी का यह बड़ा हिस्सा और उनकी बेहतर स्वास्थ्य रिपोर्टिंग ही आंध्र प्रदेश को देश में तीसरी सबसे उच्च रुग्णता दर वाला राज्य बनाती है।