भारत में हर 118 लोगों में से एक हेपेटाइटिस बी व हर 345 लोगों में से एक व्यक्ति हेपेटाइटिस सी से जूझ रहा है

विश्व हेपेटाइटिस दिवस: भारत उन 10 देशों में शामिल है, जहां मिलकर दुनिया में हेपेटाइटिस बी से होने वाली 69 प्रतिशत मौतें और हेपेटाइटिस सी से होने वाली करीब 58 प्रतिशत मौतें दर्ज की जाती हैं।
हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी, जन्म के 24 घंटे में वैक्सीन संक्रमण रोकने में मददगार।
हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी, जन्म के 24 घंटे में वैक्सीन संक्रमण रोकने में मददगार।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • विश्व हेपेटाइटिस दिवस आज: जागरूकता, जांच और समय पर इलाज से बीमारी के खतरे को कम करने पर जोर।

  • भारत में हेपेटाइटिस नियंत्रण अभियान तेज, मुफ्त जांच और इलाज सुविधाओं से लाखों लोगों को मिल रही स्वास्थ्य सहायता।

  • डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट: हेपेटाइटिस बी और सी से होने वाली वैश्विक मौतों में भारत सहित दस देशों की बड़ी हिस्सेदारी।

  • हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी, जन्म के 24 घंटे में वैक्सीन संक्रमण रोकने में मददगार।

  • लक्षण न दिखने पर भी फैल सकता है हेपेटाइटिस, विशेषज्ञों ने समय पर जांच कराने की सलाह दी।

हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस बीमारी के बारे में जागरूक करना और इसकी रोकथाम, जांच तथा इलाज के महत्व को समझाना है। हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें लिवर (यकृत) में सूजन आ जाती है। यह बीमारी हेपेटाइटिस वायरस के कारण हो सकती है, लेकिन इसके अलावा शराब, कुछ दवाओं, जहरीले पदार्थों और ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण भी लिवर प्रभावित हो सकता है।

हेपेटाइटिस वायरस के पांच प्रमुख प्रकार होते हैं, जिन्हें ए, बी, सी, डी और ई कहा जाता है। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी सबसे ज्यादा गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि ये लंबे समय तक शरीर में रहकर क्रॉनिक बीमारी का कारण बन सकते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर इससे सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

हेपेटाइटिस अब भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वायरल हेपेटाइटिस आज भी दुनिया की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। बीमारी की रोकथाम के लिए टीके उपलब्ध हैं, संक्रमण से बचाव के उपाय मौजूद हैं और कुछ प्रकार के हेपेटाइटिस का इलाज भी संभव है। इसके बावजूद हर साल बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं और मौत का शिकार होते हैं।

हेपेटाइटिस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई लोगों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे लोग अनजाने में संक्रमण को दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। इसलिए समय पर जांच कराना बहुत जरूरी है। हेपेटाइटिस की पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका जांच है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत उन 10 देशों में शामिल है, जहां मिलकर दुनिया में हेपेटाइटिस बी से होने वाली लगभग 69 प्रतिशत मौतें और हेपेटाइटिस सी से होने वाली करीब 58 प्रतिशत मौतें दर्ज की जाती हैं।

भारत में हेपेटाइटिस नियंत्रण के लिए प्रयास तेज

भारत ने वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस को नियंत्रित करने के लक्ष्य की दिशा में कई कदम उठाए हैं। सरकार ने 2018 में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम के तहत देशभर में हेपेटाइटिस बी और सी की मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

इस योजना के तहत मरीजों को मुफ्त दवाएं और जांच सेवाएं दी जाती हैं। सरकार ने इसे अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ जोड़ा है, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक इलाज की सुविधा पहुंच सके। अब स्वास्थ्य सेवाओं को जिला अस्पतालों से आगे बढ़ाकर स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सस्ती जेनेरिक दवाओं, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और बेहतर स्वास्थ्य योजनाओं के उपयोग से हेपेटाइटिस के इलाज को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।

भारत में संक्रमण की स्थिति

भारत में हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण को लेकर समय-समय पर सर्वे किए जाते हैं। साल 2021 के एचआईवी सेंटिनल सर्विलांस आंकड़ों के अनुसार, जांच किए गए लोगों में लगभग 0.85 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस बी और 0.29 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित पाए गए। इसका मतलब है कि लगभग हर 118 लोगों में से एक व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और हर 345 लोगों में से एक व्यक्ति हेपेटाइटिस सी से प्रभावित हो सकता है।

विश्व स्तर पर भी यह बीमारी चिंता का विषय बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में लगभग 28.7 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी के साथ जीवन जी रहे थे। इसी वर्ष हेपेटाइटिस बी और सी से जुड़ी बीमारियों के कारण करीब 13 लाख लोगों की मौत हुई।

टीकाकरण और बचाव है सबसे जरूरी

हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। बच्चों को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी का टीका लगाना संक्रमण रोकने का महत्वपूर्ण तरीका है। हालांकि साल 2024 में दुनिया के केवल 45 प्रतिशत नवजात शिशुओं को यह टीका समय पर मिल पाया।

हेपेटाइटिस से बचने के लिए सुरक्षित रक्त जांच, साफ सुई का इस्तेमाल, संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क से बचाव और समय पर टीकाकरण जरूरी है। लोगों को बीमारी के लक्षणों और जांच की आवश्यकता के बारे में जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है।

“हेपेटाइटिस: इसे खत्म करने के लिए बाधाएं हटाएं”

विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2026 की थीम “हेपेटाइटिस: इसे खत्म करने के लिए बाधाएं हटाएं” रखी गई है। इसका संदेश है कि हर व्यक्ति तक जांच, इलाज और बचाव की सुविधाएं आसानी से पहुंचनी चाहिए।

हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों और आम लोगों के सहयोग की जरूरत है। जागरूकता, समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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