साल 2026 में भारत में खुशी का स्तर 16 फीसद गिरकर 72 फीसदी पहुंचा: रिपोर्ट
भारत में 2026 में 72% लोग खुश हैं, पिछले साल के 88% से 16% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
भारत 29 देशों में 22वें स्थान पर है, जिससे स्पष्ट होता है कि खुशी का स्तर स्थिर नहीं है।
खुशी के मुख्य कारण हैं आर्थिक सुरक्षा, जीवन पर नियंत्रण, उद्देश्य, दोस्त और परिवार के मजबूत रिश्ते, मानसिक स्वास्थ्य।
दुख के प्रमुख कारण वही हैं, खराब आर्थिक स्थिति, जीवन में उद्देश्य की कमी, नियंत्रण की कमी और स्वास्थ्य समस्याएं।
पिछले 15 वर्षों में खुशी का स्तर बदलता रहा, 2011 में 89% और महामारी 2020 में 66% तक गिर गया।
अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस हर साल 20 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने 12 जुलाई 2012 को की थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि लोगों के जीवन में खुशी और मानसिक संतुलन उतना ही जरूरी है जितना आर्थिक विकास। पहली बार यह दिवस 2013 में मनाया गया था और तब से हर साल इसे लोगों के जीवन में सकारात्मक सोच और संतुलन लाने के लिए मनाया जाता है।
भारत में खुशी का स्तर 2026
इंस्टिट्यूट पब्लिक डे सोंडेज डी'ओपिनियन सेक्टर (आईपीएसओएस) के ग्लोबल हैप्पीनेस सर्वे 2026 के अनुसार भारत में 72 प्रतिशत लोग खुद को खुश बताते हैं। यह आंकड़ा देखने में अच्छा लगता है, लेकिन पिछले साल के 88 प्रतिशत के मुकाबले इसमें 16 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। इस गिरावट के कारण भारत 29 देशों में 22वें स्थान पर पहुंच गया है। यह स्थिति बताती है कि देश में खुशी का स्तर अभी भी स्थिर नहीं है और इसमें उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
खुशी और दुख के समान कारण
इस सर्वे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन कारणों से लोग खुश होते हैं, वही कारण उनकी दुख का कारण भी बनते हैं। यानी अगर ये चीजें मौजूद हैं तो लोग खुश रहते हैं, और अगर ये नहीं हैं तो वही चीजें उन्हें परेशान करती हैं। इससे यह साफ होता है कि खुशी बहुत हद तक जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
खुशी के मुख्य कारण
भारत में लोगों की खुशी कुछ प्रमुख बातों पर आधारित है। जब लोगों को लगता है कि उनके जीवन पर उनका नियंत्रण है, तो वे अधिक संतुष्ट महसूस करते हैं। इसके अलावा जीवन में उद्देश्य होना भी खुशी का एक बड़ा कारण है। आर्थिक स्थिति का मजबूत होना भी लोगों को सुरक्षित महसूस कराता है, जिससे खुशी बढ़ती है।
साथ ही, अच्छे दोस्त और परिवार के रिश्ते लोगों के जीवन में खुशी लाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ होता है, तो वह जीवन को सकारात्मक नजरिए से देखता है और अधिक खुश रहता है।
दुख के मुख्य कारण
जब इन जरूरी चीजों की कमी होती है, तो वही खुशी के कारण दुख में बदल जाते हैं। खराब आर्थिक स्थिति लोगों के लिए सबसे बड़ा तनाव बन जाती है। जीवन में उद्देश्य की कमी होने पर व्यक्ति खुद को खाली और असंतुष्ट महसूस करता है।
इसके अलावा जब लोगों को लगता है कि उनके जीवन पर उनका नियंत्रण नहीं है, तो वे तनाव में आ जाते हैं। रिश्तों में दूरी और दोस्तों की कमी भी दुख का कारण बनती है। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याएं भी लोगों की खुशी को कम कर देती हैं।
समय के साथ बदलती खुशी
पिछले 15 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि भारत में खुशी का स्तर लगातार बदलता रहा है। साल 2011 में खुशी का स्तर सबसे ज्यादा 89 प्रतिशत था। इसके बाद समय के साथ इसमें गिरावट आई।
साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान यह घटकर 66 प्रतिशत हो गया, जो सबसे कम स्तर था। इस दौरान लोगों के जीवन, काम और रिश्तों पर गहरा असर पड़ा। महामारी के बाद स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन अब फिर से गिरावट देखने को मिल रही है। इस प्रकार खुशी का स्तर एक "यो-यो प्रभाव" की तरह ऊपर-नीचे होता रहा है।
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि भारत में खुशी केवल एक भावना नहीं है, बल्कि यह कई सामाजिक, आर्थिक और मानसिक कारणों पर निर्भर करती है। लोगों की खुशी इस बात पर आधारित है कि उन्हें जीवन की जरूरी चीजें कितनी आसानी और स्थिरता के साथ मिलती हैं।
अगर लोगों को आर्थिक सुरक्षा, अच्छे रिश्ते, जीवन का उद्देश्य और मानसिक शांति मिलती है, तो वे खुश रहते हैं। लेकिन इनकी कमी होने पर वही चीजें तनाव और दुख का कारण बन जाती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि व्यक्ति और समाज दोनों मिलकर एक संतुलित और सुरक्षित वातावरण बनाएं, जिससे लोगों की खुशी लंबे समय तक बनी रह सके।


