भारत में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधी यात्राएं सबसे महंगी: रिपोर्ट

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी प्रति यात्रा का औसत खर्च 29,454 रुपए और शहरी क्षेत्रों का औसत खर्च 41,649 रुपए है
भारत के ग्रामीण इलाकों से स्वास्थ्य संबंधी यात्राएं अधिक होती हैं। फोटो: विकास चौधरी/सीएसई
भारत के ग्रामीण इलाकों से स्वास्थ्य संबंधी यात्राएं अधिक होती हैं। फोटो: विकास चौधरी/सीएसई
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भारत के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से अक्सर लोगों को स्वास्थ्य कारणों से आकस्मिक या नियोजित यात्राएं करनी पड़ती हैं। ये यात्राएं गांव से शहर, एक शहर से दूसरे शहर या एक राज्य से दूसरे राज्य में हो सकती हैं।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा 23 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (एनएसएस) के 80वें दौर की रिपोर्ट “भारत में घरेलू पर्यटन” में पाया गया है कि एक साल में स्वास्थ्य और चिकित्सीय कारणों से हुई यात्राओं पर सबसे अधिक खर्च होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 365 दिनों में “स्वास्थ्य और चिकित्सा” के मकसद से पूरी की गई हर यात्रा का औसत खर्च सबसे ज्यादा 32,167 रुपए था, जबकि “खरीदारी” के मकसद से की गई यात्रा दूसरी सबसे महंगी (18,981 रुपए) यात्रा थी। ग्रामीण क्षेत्रों से की गई स्वास्थ्य संबंधी यात्रा का औसत खर्च 29,454 रुपए और शहरी क्षेत्रों से की गई यात्रा का औसत खर्च 41,649 रुपए रहा।

भारत में घरेलू पर्यटन पर होने वाले व्यय को जानने के लिए यह सर्वेक्षण जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किया गया था। सर्वेक्षण में संपूर्ण भारत के 1,42,603 ग्रामीण परिवारों और 1,03,510 शहरी परिवारों को शामिल गया था।

इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि साल भर में कितने भारतीय परिवारों ने किस मकसद से रातभर रुकने वाली यात्राएं कीं, कितने परिवारों ने 30 दिन में यात्राएं कीं और कितने परिवारों ने एकदिनी यात्रा की। साथ ही यह भी जानना था कि इन यात्राओं पर कितना और किस मद पर खर्च हुआ।  

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक चिकित्सीय यात्राएं

सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति 100 परिवारों द्वारा एक साल में कुल 127 रातभर रुकने वाली यात्राएं छुट्टी मनाने एवं मनोरंजन, तीर्थ एवं धार्मिक, स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय और खरीदारी के उद्देश्य से की गईं। इनमें औसतन 49 रातभर रुकने वाली यात्राएं स्वास्थ्य कारणों से थीं। यह तीर्थ और धार्मिक यात्राओं (62) के बाद सर्वाधिक की गई यात्राएं हैं। इन इलाकों में छुट्टी मनाने एवं मनोरंजन के उद्देश्य से 16 यात्राएं और खरीदारी के लिए केवल एक यात्रा हुई।

वहीं शहरी क्षेत्रों में एक साल में 132 रातभर रुकने वाली यात्राएं हुईं। इनमें सर्वाधिक 61 यात्राएं तीर्थ और धार्मिक उद्देश्य के लिए, 48 यात्राएं छुट्टी मनाने एवं मनोरंजन के लिए, 22 यात्राएं स्वास्थ्य कारणों के लिए और 1 यात्रा खरीदारी के लिए हुई।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और चिकित्सीय उद्देश्य के लिए होने वाली यात्राओं में दोगुने से अधिक का अंतर है। ये यात्राएं ग्रामीण इलाकों में दयनीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तरफ भी इशारा करती हैं। ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए अक्सर शहरों या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।

30 प्रतिशत यात्राएं स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, एक साल में संपन्न हुई रातभर रुकने वाली औसतन 100 यात्राओं में लगभग 48 यात्राएं तीर्थयात्रा और धार्मिक उद्देश्यों के लिए थीं, जबकि 30 यात्राएं स्वास्थ्य और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए थीं। एक साल में ग्रामीण क्षेत्रों की 38.4 प्रतिशत यात्राएं इस उद्देश्य के लिए थीं जबकि शहरी क्षेत्र में 16.5 प्रतिशत यात्राएं इससे जुड़ी थीं। यात्रा के साधन पर बात करते हुए रिपोर्ट कहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों से स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय यात्रा के लिए 26.5 प्रतिशत लोगों ने बस, 7.2 प्रतिशत ने ट्रेन, 0.2 प्रतिशत ने हवाई, 17.3 प्रतिशत ने निजी वाहन और 46.7 प्रतिशत ने किराए के वाहन से यात्रा की।

वहीं दूसरी तरफ शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधी यात्रा के लिए 20.9 प्रतिशत ने बस, 12.7 प्रतिशत ने ट्रेन, 1.3 प्रतिशत ने हवाई, 23.9 प्रतिशत ने नजी वाहन और 39.8 प्रतिशत ने किराए के वाहन से यात्रा की। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, साल भर में रातभर रुकने वाली स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधी 32.3 प्रतिशत यात्राएं 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए की गईं।

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