हर साल 80 लाख लोग चागास रोग की चपेट में आते हैं, 10,000 की मौत हो जाती है

विश्व चागास रोग दिवस: दुनिया भर में लगभग 20 लाख महिलाएं, जिनकी उम्र 15 से 44 वर्ष के बीच है, चागास रोग के संक्रमण से प्रभावित हैं।
चागास रोग एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है। यह ट्रायपैनोसोमा क्रूजी नामक परजीवी के कारण होती है।
चागास रोग एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है। यह ट्रायपैनोसोमा क्रूजी नामक परजीवी के कारण होती है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दुनिया भर में लगभग 80 लाख लोग चागास रोग से प्रभावित हैं और हर साल करीब 10,000 लोगों की मृत्यु होती है।

  • विश्व स्तर पर 15 से 44 वर्ष की लगभग 20 लाख महिलाएं ट्रायपैनोसोमा क्रूजी संक्रमण के साथ जीवन जी रही हैं।

  • संक्रमित गर्भवती महिलाओं में लगभग 3 से 5 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी मां से बच्चे में पहुंच जाती है।

  • बिना इलाज के लगभग एक-तिहाई संक्रमित लोगों में दिल, पाचन और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याएं विकसित होती हैं।

  • समय पर इलाज मिलने पर नवजात शिशुओं में चागास रोग के ठीक होने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक होती है।

हर साल 14 अप्रैल को विश्व चागास रोग दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को चागास रोग के बारे में जानकारी देना और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन पहली बार साल 2020 में मनाया गया था। साल 2026 की थीम “महिलाएं देखभाल के केंद्र में, अगली पीढ़ी की रक्षा करती हुई” है। यह विषय इस बात पर जोर देता है कि महिलाएं इस बीमारी को रोकने और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

चागास रोग क्या है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, चागास रोग एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है। यह ट्रायपैनोसोमा क्रूजी नामक परजीवी के कारण होती है। इसे अमेरिकन ट्रिपैनोसोमियासिस भी कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार लंबे समय तक इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी कारण इसे “साइलेंट डिजीज” कहा जाता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकती है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

दुनिया भर में लगभग 80 लाख लोग चागास रोग से प्रभावित हैं। हर साल करीब 10,000 लोगों की इस बीमारी के कारण मृत्यु हो जाती है। यह बीमारी खासकर गरीब और पिछड़े क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग है, जिस पर अभी भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

संक्रमण के तरीके

चागास रोग मुख्य रूप से ट्रायटोमाइन नामक कीड़े के काटने से फैलता है। इसके अलावा यह दूषित भोजन और पेय पदार्थों के सेवन से भी फैल सकता है। यह संक्रमण संक्रमित मां से बच्चे में गर्भावस्था या जन्म के दौरान भी पहुंच सकता है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3 से 5 प्रतिशत मामलों में मां से बच्चे में यह संक्रमण होता है। इसके अलावा संक्रमित खून चढ़ाने, अंग प्रत्यारोपण और प्रयोगशाला दुर्घटनाओं के कारण भी यह बीमारी फैल सकती है।

बीमारी के प्रभाव

चागास रोग का शुरुआती चरण अक्सर बिना लक्षण के होता है। लेकिन समय के साथ यह गंभीर हो सकता है। आंकड़े बताते हैं कि यदि इलाज न किया जाए, तो लगभग एक-तिहाई संक्रमित लोगों में दिल, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याएं विकसित हो सकती हैं। यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए समय पर जांच और उपचार बहुत जरूरी है।

महिलाओं से जुड़े आंकड़े

दुनिया भर में लगभग 20 लाख महिलाएं, जिनकी उम्र 15 से 44 वर्ष के बीच है, इस संक्रमण से प्रभावित हैं। इन महिलाओं को अक्सर सही जानकारी और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती हैं। इसके कारण वे समय पर इलाज नहीं करा पातीं और बीमारी गंभीर हो जाती है।

संक्रमित महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा अधिक होता है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग एक-तिहाई संक्रमित महिलाओं में हृदय संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। इससे गर्भावस्था भी जोखिम भरी हो जाती है। इसके अलावा, अगर महिला संक्रमित है, तो उसके बच्चे में भी संक्रमण का खतरा बना रहता है।

अगर संक्रमित महिलाओं का इलाज गर्भधारण से पहले कर दिया जाए, तो बच्चे में संक्रमण होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। वहीं, अगर नवजात शिशु का समय पर इलाज किया जाए, तो उसके ठीक होने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक होती है।

उपचार और रोकथाम

अगर महिलाओं का इलाज गर्भधारण से पहले कर दिया जाए, तो बच्चे में संक्रमण होने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत तक रोकी जा सकती है। वहीं, अगर नवजात शिशु की पहचान पहले साल में हो जाए और उसका इलाज किया जाए, तो उसके ठीक होने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक होती है।

यह आंकड़े बताते हैं कि समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि लोगों को जागरूक किया जाए और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच दी जाए।

जागरूकता की आवश्यकता

चागास रोग मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो गरीब हैं और जिनके पास स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। इस कारण यह बीमारी अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। जागरूकता की कमी के कारण लोग समय पर जांच नहीं कराते और बीमारी बढ़ती जाती है।

महिलाओं को जागरूक बनाना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। क्योंकि महिलाएं परिवार की देखभाल करती हैं और बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देती हैं। अगर उन्हें सही जानकारी मिलेगी, तो वे इस बीमारी को फैलने से रोक सकती हैं।

चागास रोग एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी है। आंकड़े यह दिखाते हैं कि यह बीमारी लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है और हर साल हजारों लोगों की जान ले रही है। लेकिन सही समय पर जांच और इलाज से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।

महिलाओं को सशक्त बनाना, उन्हें जानकारी देना और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना इस बीमारी को रोकने के लिए बहुत जरूरी है। जागरूकता ही इस बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।

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