दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप बना कांगो में बढ़ता इबोला संकट, अब तक 1556 लोगों की मौत

कांगो में इबोला के 3,532 मामले, 1,556 मौतें दर्ज; तेजी से फैलता प्रकोप बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इबोला संकट
दुर्लभ बुंदिबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैला संक्रमण, जिसके लिए अभी कोई स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है।
दुर्लभ बुंदिबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैला संक्रमण, जिसके लिए अभी कोई स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से बढ़ा, अब तक 3,532 संक्रमित मामले और 1,556 लोगों की मौत दर्ज की गई।

  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो का इबोला संकट दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप बन गया है।

  • दुर्लभ बुंदिबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैला संक्रमण, जिसके लिए अभी कोई स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है।

  • पूर्वी कांगो में हिंसा और संसाधनों की कमी से इबोला नियंत्रण अभियान को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैज्ञानिक बुंदिबुग्यो इबोला टीके के परीक्षण से बीमारी रोकने की उम्मीद जता रहे हैं।

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में फैला इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से गंभीर होता जा रहा है। देश के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस बीमारी के अब तक 3,532 मामले सामने आ चुके हैं और 1,556 लोगों की मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में संक्रमण और मौतों के कारण यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में बीमारी जिस तेजी से फैली है, वह चिंता का विषय है। यह प्रकोप हाल के वर्षों में सामने आए सबसे गंभीर स्वास्थ्य संकटों में से एक माना जा रहा है।

सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के कार्यवाहक प्रमुख ने इस प्रकोप को अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला संकट बताया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस बीमारी पर अधिक ध्यान देने और मदद बढ़ाने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि दुनिया को इस संकट को गंभीरता से देखने की जरूरत है, क्योंकि बीमारी बहुत तेजी से नए इलाकों में पहुंच रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस स्तर पर यह प्रकोप पिछले कई इबोला संक्रमणों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक घातक साबित हुआ है।

दुर्लभ वायरस स्ट्रेन से बढ़ी चुनौती

इस बार कांगो में इबोला का प्रकोप वायरस के दुर्लभ ‘बुंदिबुग्यो स्ट्रेन’ के कारण फैल रहा है। इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई आधिकारिक रूप से स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के सामने बीमारी को रोकने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

वैज्ञानिक इस वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने पर काम कर रहे हैं। बुंदिबुग्यो इबोला टीके का एक परीक्षण भी शुरू हो चुका है और एक स्वयंसेवक को इसकी पहली खुराक दी जा चुकी है। हालांकि टीके के प्रभाव और सुरक्षा को समझने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है।

कांगो का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट

यह प्रकोप कांगो में वर्ष 2018 से 2020 के बीच फैले इबोला संकट से भी बड़ा हो चुका है। उस समय देश में इबोला के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी और वह कांगो का सबसे घातक प्रकोप माना जाता था।

हालांकि पूरी दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा इबोला संकट 2014 से 2016 के बीच पश्चिमी अफ्रीका में आया था। उस दौरान गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन जैसे देशों में बीमारी तेजी से फैली थी और हजारों लोगों की जान गई थी।

संघर्ष और आर्थिक कमी बनी बड़ी बाधा

कांगो के पूर्वी हिस्से में जारी हिंसा और सुरक्षा की खराब स्थिति इबोला से लड़ने के प्रयासों को मुश्किल बना रही है। यह प्रकोप मुख्य रूप से इतुरी प्रांत में केंद्रित है, लेकिन यह उत्तरी किवु और दक्षिणी किवु जैसे इलाकों तक भी फैल चुका है।

इन क्षेत्रों में कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जिससे स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मरीजों तक पहुंचना, संक्रमित लोगों की पहचान करना और इलाज उपलब्ध कराना कठिन हो रहा है।

इसके अलावा, आर्थिक संसाधनों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। स्वास्थ्य दलों को संक्रमण की जांच, मरीजों की निगरानी और बीमारी को रोकने के लिए पर्याप्त सहायता नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण का वास्तविक आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है।

पड़ोसी देशों पर भी खतरा

कांगो के पड़ोसी देश भी इस बीमारी को लेकर सतर्क हैं। युगांडा ने हाल ही में अपने यहां स्थानीय स्तर पर इबोला संक्रमण खत्म होने की घोषणा की है। वहां आखिरी संक्रमित मरीज के ठीक होने के बाद स्थानीय संक्रमण रुक गया है।

इसके बावजूद स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कांगो में जारी प्रकोप के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही के कारण निगरानी बढ़ाई गई है।

दुनिया से मदद की अपील

विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला को नियंत्रित करने के लिए केवल स्थानीय प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। अंतरराष्ट्रीय सहायता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और वैज्ञानिक शोध इस संकट से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कांगो में जारी इबोला संकट एक बार फिर यह दिखाता है कि संक्रामक बीमारियां सीमाओं तक सीमित नहीं रहतीं। समय पर कदम उठाना, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचाना इस बीमारी को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।

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