

क्या आप आयुर्वेद उपचार में प्रचलित अश्वगंधा से बने उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं तो थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। संभव हो कि वह उत्पाद अश्वगंधा की पत्तियों से बनाया गया हो और वह आपके स्वास्थ्य को जोखिम में डाल सकता है। आयुष मंत्रालय ने हाल ही में जारी एक दिशा-निर्देश में अश्वगंधा की पत्तियों से बने उत्पाद पर पूर्ण रोक लगाते हुए यह बात कही है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने सभी आयुष दवा निर्माताओं, निर्यातकों और विक्रेताओं को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है, “अब से अश्वगंधा (विथानिया सोमनिफेरा) के उत्पादों में केवल पौधे के जड़ का ही उपयोग किया जाए जबकि पत्तियों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।”
मंत्रालय द्वारा 15 अप्रैल, 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि पहले भी छह अक्टूबर 2021 को इस संबंध में सलाह दी गई थी, लेकिन अब यह देखा गया है कि कुछ निर्माता अभी भी अश्वगंधा की पत्तियों का उपयोग कर रहे हैं।
ऊंची मात्रा कोशिकाओं पर साइटोटॉक्सिक यानी कोशिकाओं को डैमेज करने वाला प्रभाव डाल सकता है साथ ही लिवर के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है, “उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में ‘विथानोलाइड्स’ विशेष रूप से ‘विथाफेरिन-ए’ की अधिक मात्रा के कारण संभावित सुरक्षा संबंधी जोखिम हो सकते हैं।” मंत्रालय ने जारी अधिसूचना में कहा, “केवल अश्वगंधा की जड़ों का उपयोग हो, चाहे कच्चे रूप में हो, अर्क के रूप में या किसी अन्य रूप में, एकल या मिश्रित आयुष उत्पादों में किया जाए।”
मंत्रालय ने कहा है, “अश्वगंधा की पत्तियों का उपयोग किसी भी रूप में आयुष दवाओं या उत्पादों में पूरी तरह प्रतिबंधित है।” साथ ही यह भी कहा है कि, ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 161 के तहत यह सुनिश्चित किया जाए कि उत्पाद के लेबल पर उपयोग किए गए पौधे के हिस्सों का स्पष्ट उल्लेख हो।
मंत्रालय के मुतबिक, अश्वगंधा की जड़ आयुष प्रणालियों में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है। हालांकि, 2024 में एक बहु-विषयक विशेषज्ञ समिति द्वारा जारी सुरक्षा रिपोर्ट में भी यह सिफारिश की गई कि स्वास्थ्य लाभ के लिए अश्वगंधा की जड़ों का ही उपयोग किया जाना चाहिए क्योंकि पत्तियों के इस्तेमाल से संभावित सुरक्षा संबंधी जोखिम हो सकते हैं।
इसके बाद खाद्य नियामक संस्था एफएसएसएआई ने भी मंत्रालय के निर्देश पर 16 अप्रैल को यह अधिसूचना जारी की है। मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आयुष ड्रग लाइसेंसिंग प्राधिकरणों और एफएसएसएआई को भी इस निर्देश के अनुपालन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था।